सरकारी नौकरी में यह खेल पुराना है – घर बैठे लिया जाता रहा वेतन

| May 31, 2019

सरकारी नौकरी में यह खेल पुराना है – घर बैठे लिया जाता रहा वेतन

हरियाणा में मातृत्व अवकाश के नाम पर ठेकेदारों, अधिकारियों, चिकित्सकों से मिलीभगत कर फर्जी तरीके से लंबी छुट्टियां और घर बैठे वेतन लेने का ‘खेल’ पुराना है। न केवल सरकारी विभागों, बल्कि निजी कंपनियों और संस्थानों में भी मातृत्व अवकाश के नाम पर गलत तरीके से सुविधाओं का फायदा उठाने के मामले सामने आते रहे हैं। बाकायदा गर्भावस्था और डिलीवरी की झूठी रिपोर्ट बनवाते हुए सरकारी खजाने को चपत लगाई जाती रही।








मातृत्व लाभ (संशोधन) अधिनियम 2017 के अनुसार दस या इससे अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों में गर्भवती महिला 26 सप्ताह के मातृत्व अवकाश की पात्र होती हैं। यह प्रसव की अनुमानित तिथि से आठ सप्ताह पहले से शुरू होंगे। पहली दो गर्भावस्थाओं के लिए 26 सप्ताह और तीसरे बच्चे के लिए 12 सप्ताह के अवकाश की व्यवस्था है। उन माताओं को भी 12 सप्ताह का वैतनिक अवकाश देने का प्रावधान है जिन्होंने तीन महीने या उससे छोटे शिशु को गोद लिया है या जिनके यहां सरोगेसी के जरिये बच्चा हुआ है।




कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआइसी) के दायरे में आने वाली महिला कर्मचारियों को निगम से जुड़े अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं मिलती हैं। ईएसआइ कार्डधारक महिलाओं को गर्भवती होने पर डिलीवरी के दौरान 84 दिन का मातृत्व अवकाश (सवेतन) प्रदान किया जाता है। गर्भपात (कम से कम तीन माह) कराने पर महिला को 42 दिन का (सवेतन) अवकाश भी दिया जाता है। इस अवकाश का पैसा निगम की ओर से महिला कर्मचारी के बैंक खाते में डाल दिया जाता है।

गर्भवती महिलाओं को ऐसे मिलता लाभ : वर्ष 1961 के मातृत्व लाभ अधिनियम के तहत मातृत्व अवकाश के वेतन की गणना अंतिम तीन महीने के औसत दैनिक वेतन के आधार पर की जाती है। वेतन का दावा तभी किया जा सकता है जब पिछले 12 महीने के दौरान न्यूनतम 80 दिन तक काम किया हो।




मातृत्व अवकाश की अवधि खत्म हो जाए तो मातृत्व लाभ (संशोधन) अधिनियम घर से काम करने के प्रावधानों की भी इजाजत देता है। हालांकि यह काम की प्रकृति पर निर्भर करेगा। दूसरी तिमाही शुरू होने पर गर्भवती महिलाओं को बॉस और एचआर डिपार्टमेंट से बात करनी चाहिए। वह आपको कंपनी की पॉलिसी के बारे में बताएंगे और साथ ही लीव लेने का तरीका भी। ज्यादातर कंपनियां लिखित में एडवांस नोटिस मांगती हैं। कई कंपनियां कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा फायदे और अन्य चिकित्सा भत्ते उपलब्ध कराती हैं। अगर जरूरत पड़े तो कानून एक महीने की सिक लीव (बीमारी की छुट्टी) लेने की भी इजाजत देता है।

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