पूर्व सैनिक रेलवे ट्रैक का रख-रखाव करेंगे – रेलवे बोर्ड का फैसला सही नहीं : शिव गोपाल

| May 26, 2019

रेलवे बोर्ड ने बड़े पैमाने पर रिक्त रेल संरक्षा के पदों पर पूर्व सैनिकों को तैनात करने का फैसला किया है। इस निर्णय के अनुसार पूर्व सैनिकों को पुल संगठन, ट्रैक मशीन संगठन सहित अन्य संरक्षा संगठनों में नौकरी पर रखा जाएगा। .

रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष वी.के. यादव व रेलवे बोर्ड के सदस्य स्टाफ, सदस्य इंजीनियरिंग व वित्त आयुक्त ने रिक्त संरक्षा पदों पर पूर्व सैनिकों को तैनात करने का आदेश 24 मई को जारी कर दिया है। .








सभी जोनल रेलवे के महाप्रबंधकों को भेजे आदेश में कहा गया है कि अविलंब भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की जरूरत है। आदेश में कहा है कि रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी) व रेलवे भर्ती सेल (आरआरसी) रिक्त संरक्षा पदों पर भर्ती की प्रक्रिया कर रहा है। .

बतातें हैं कि एक लाख से अधिक संरक्षा पद रिक्त हैं। हालांकि पिछले साल एक सवा लाख से अधिक पदों को भरने के लिए परीक्षा आयोजित हो चुकी है। लेकिन इसका परिणाम अभी चरणों में आएगा। इस दौरान बड़ी संख्या में संरक्षा पद रिक्त होने से ट्रेन परिचालन में कठिनाई आ रही है। इसको देखते हुए रेलवे बोर्ड ने तत्काल पूर्व सैनिकों को ठेके पर रखने का फैसला किया है। उनका कार्यकाल दो वर्ष का होगा। उनको पे ग्रेड ए से लेकर सात के वेतनमान पर रखा जाएगा। .




पूर्व सैनिकों को बतौर संरक्षा कर्मी ट्रैक मरम्मत व रख रखाव, पुलों की मरम्मत व रख रखाव, इसके अलावा इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, सिग्नल एंड टेलीकॉम संबंधी संरक्षा से जुड़े कार्यों को करेंगे। हालांकि पूर्व सैनिक रेलवे के सुपरवाइजर की देख रेख में उक्त कार्यों को अंजाम देंगे। आदेश में उल्लेख है कि रिक्त पदों पर स्थायी भर्ती होने के साथ ही पूर्व सैनिकों की संख्या कम होती जाएगी। लेकिन काफी बड़े पैमाने पर पूर्व सैनिकों को संरक्षा व सुरक्षा से जुड़े कार्यों पर रखा जाएगा। विदित हो कि 2018 में पूर्व सैनिकों को एसी श्रेणी कोच में बतौर कोच सहायक के पद पर रखने का फैसला पहले ही किया जा चुका है। रेलवे में लगभग 3000 से 4000 हजार कोच सहायक के पद हैं। .




एआईआरएफ के महामंत्री शिव गोपाल मिश्रा ने रेलवे बोर्ड के इस फैसले को सही नहीं माना है। उनका तर्क है कि संरक्षा से जुड़े कार्य जानकार कर्मी ही कर सकेंगे। सेना में पुल संगठन पृथक है। इस कार्य में उन्हें परेशानी नहीं होगी। लेकिन ट्रैक मशीन संगठन व अन्य संरक्षा विभाग के कार्य करना पूर्व सैनिकों के लिए बड़ी चुनौती होगी। यह रेल व यात्री संरक्षा से खिलवाड़ करने के समान है। इसका विरोध किया जाएगा। .

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