Railway enhanced facilities in vande bharat train

| May 17, 2019

एक लाख किलोमीटर का सफर पूरा करने के साथ ही देश की पहली स्वदेशी सेमी-हाईस्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस ने अपनी तकनीकी उत्कृष्टता साबित कर दी है। शुरुआती चुनौतियों के बावजूद अब तक इस ट्रेन का एक भी फेरा रद नहीं हुआ है। इससे स्वदेशी तकनीक के प्रति रेलवे का भरोसा बढ़ा है। चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री ने वंदे भारत का जो दूसरा रैक बनाया है, उसमें पहले रैक की कई खामियों को दूर कर लिया गया है। इस माह के अंत तक यह रैक दिल्ली पहुंच जाएगा, ताकि जून या जुलाई में नए रेल मंत्री द्वारा स्वीकृत रूट पर इसका संचालन शुरू किया जा सके।








शुरुआती चुनौतियों के बावजूद दिल्ली से वाराणसी के बीच चलाई गई पहली वंदे भारत एक्सप्रेस को लोगों ने बहुत पसंद किया है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पहले दिन (17 फरवरी) से आज तक यह ट्रेन खचाखच भरी चल रही है और इसका संचालन रेलवे के लिए फायदे का सौदा साबित हो रहा है। इससे अफसरों का मनोबल बढ़ा है और वे इसे कई अन्य रूटों पर चलाने की तैयारियों में जुट गए हैं।




इसके लिए उन्होंने कई रूटों का विकल्प तैयार किया है। इनमें वाराणसी-पटना-हावड़ा और दिल्ली-मुंबई जैसे लंबे रूट शामिल हैं। हालांकि, इस पर अंतिम फैसला नई केंद्र सरकार लेगी, लेकिन अधिकारियों ने अपनी तरफ से इतना अवश्य सुनिश्चित कर दिया है कि नए रेल मंत्री को ट्रेन में पहली वंदे भारत की खामियों का शिकवा सुनने को न मिले।




सीटों में बदलाव नहीं

नए रैक में भी एक शिकायत कमोबेश बनी रहेगी। वह है सीट का पीछे की ओर कम झुकना। रेलवे अफसर इसे ठीक करने को राजी नहीं हैं। उनका कहना है कि वंदे भारत की मोल्डेड रबर की सीटों को जानबूझकर अपेक्षाकृत सीधा रखा गया है, क्योंकि लंबी दूरी में सीधे बैठने से रीढ़ स्वस्थ रहती है।

Category: Indian Railways, News

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