रेलवे में गार्ड का लिंक खत्म करने पर जताया गया विरोध, 48 घंटे के भीतर आदेश वापस लेने की चेतावनी दी

| May 14, 2019

उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल कार्यालय के सोमवार एक आदेश के बाद गार्ड और यूनियन कर्मियों में खलबली मच गई। रेलवे ने मालगाड़ियों के गार्ड के लिंक खत्म कर सीधे ड्यूटी पर भेजने की व्यवस्था कर दी। इससे गार्डों को मिलने वाले रेस्ट में कमी आ गई। इसके चलते नार्दन रेलवे मेन्स यूनियन और उत्तरी रेलवे मजदूर यूनियन और गार्डों ने मिलकर स्टेशन निदेशक का घेराव कर हंगामा किया। यूनियन कर्मियों ने 48 घंटे के भीतर गार्ड के लिंक को खत्म करने वाले आदेश को वापस लेने की बात कही। यूनियन कर्मियों की मानें तो मंडल स्तर पर 50 फीसदी से भी कम गार्ड हैं। रेलवे गार्ड की भर्ती पूरी करने की जगह कर्मचारियों को प्रताड़ित कर रहा है। .








रेलवे में गार्ड की ड्यूटी लिंक के आधार पर लगाई जाती है। लखनऊ मंडल में 152 गार्ड होने चाहिए, लेकिन रेलवे के पास केवल 95 गार्ड ही मौजूद हैं। ये पैसेंजर और मेल ट्रेनें चलाते हैं। 57 गार्ड की कमी है। .

वहीं, गुड्स यार्ड में 142 की संख्या होनी चाहिए, जबकि वहां 136 गार्ड ही ऑन रोल है। इसमें 25 से 30 गार्ड पैसेंजर और मेल ट्रेनें चलाते थे। इनका लिंक लगाकर ड्यूटी लगाई जाती है। मसलन, एक ट्रेन से गार्ड के वापस पहुंचने पर उसकी लिंक ट्रेन के पहुंचने तक गार्ड को रेस्ट मिलता था। कम से कम 14 से 16 घंटे का रेस्ट मिल जाता था। .




लेकिन, सोमवार रेल अधिकारियों ने लिंक खत्म कर दिया। मसलन, गार्ड की उपलब्धता के आधार पर उसका रेस्ट कम कर उसको मौजूद ट्रेन को चलाना होगा। जबकि गार्ड की क्षमता पूरी होने पर यह मुसीबत नहीं होती। इसी बात को लेकर गार्ड और यूनियन कर्मियों ने मिलकर स्टेशन निदेशक सुदीप सिंह से लिंक को खत्म करने वाले आदेश को वापस लेने के लिए हंगामा किया।

गार्ड की कमियां जल्द होंगी दूर: रेल अधिकारियों के मुताबिक पोर्टर, शंटमैन और टीएनसी स्टाफ को गार्ड में प्रमोशन मिलता है। पहले 84 रेलकर्मचारियों ने परीक्षा दी थी, जिसमें 26 ही पास हुए थे। इसमें से भी पांच ने बाद में छोड़ दिया था। गार्ड की सीधी भर्ती में समय लगेगा। इससे पहले प्रमोशन भर्ती परीक्षा में बड़ी संख्या में कर्मचारी बैठ सकेंगे। इससे काफी हद तक समस्याएं दूर होंगी।




गार्ड का लिंक खत्म करने के विरोध में चारबाग में प्रदर्शन करते कर्मचारी। .

रेलवे में ट्रेनों को चलाने के लिए लिंक बनाया जाता है। मसलन, एक गार्ड अगर ट्रेन लेकर जाता है और वापस लौटता है तो उसे 14 से 16 घंटे तक रेस्ट करने का समय मिलता है। इसके बाद उसे ट्रेन लेकर जाना होता है। इस हिसाब से गार्ड की ड्यूटी लगती है। अब ऐसे में अगर वह ट्रेन से लौटता है और रेस्ट पूरा होने के बाद उसे जिस ट्रेन को लेकर जाना है और वह लेट है तो उसका रेस्ट बढ़ता रहेगा। ट्रेन 8 घंटे लेट हो गई तो उसे 24 घंटे का रेस्ट मिल जाएगा। .

रेलवे ने इसी लिंक को खत्म कर ट्रेन के देरी से आने पर गार्ड को दूसरी ट्रेन पर भेजने का निर्णय दिया। मसलन, ट्रेन और गार्ड की उपलब्धता और यात्रियों की सुविधा को देखते हुए गार्ड को ट्रेन चलाना पड़ेगा। इससे यूनियन खफा है।

रेलवे ने इसी लिंक को खत्म कर ट्रेन के देरी से आने पर गार्ड को दूसरी ट्रेन पर भेजने का निर्णय दिया। मसलन, ट्रेन और गार्ड की उपलब्धता और यात्रियों की सुविधा को देखते हुए गार्ड को ट्रेन चलाना पड़ेगा। इससे यूनियन खफा है। .

यह हुई समस्या

यूनियन कर्मियों की मांग को मंडल अधिकारियों तक पहुंचा दिया गया है। मंडल अधिकारी ही इसमें निर्णय लेंगे। फिलहाल, अभी लिंक के आधार पर ही ड्यूटी लगाई जा रही है। .

-सुदीप सिंह,

स्टेशन निदेशक, चारबाग

Category: Indian Railways, News

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