रेलवे और अन्य केंद्रीय कर्मचारियों में रोष – ट्रस्ट के माध्यम से होगा कोल अफसरों की न्यू पेंशन स्कीम का संचालन

| May 8, 2019

अगर कोल कर्मचारी अपने पेंशन फण्ड का संचालन खुद कर सकते हैं तो रेलवे के कर्मचारी क्यों नहीं कर सकते। कोल कर्मियों के लिए लागू पेंशन स्कीम का मैनेजमेंट LIC को दिया गया है जबकि केंद्रीय और राज्य कर्मचारियों के फण्ड मैनेजमेंट का काम PFRDA कर रहा है। मुद्दा यह भी है कि कोल कर्मचारी अपनी पेंशन स्कीम का निर्धारण स्वयम कर सकते हैं तो अन्य केंद्रीय कर्मचारी क्यों नहीं पुरानी पेंशन स्कीम को स्वयं चुन सकते। यह सवाल रेलवे और केंद्रीय कर्मचारियों को रोज कचोटता है कि सामाजिक सुरक्षा के नाम पर पेंशन एक अधिकार के रूप में उनका हक़ छीन लिया गया है। पुरानी पेंशन स्कीम कर्मचारियों का हक है इसलिए पेंशन PFRDA के जरिये आए या फिर LIC से मिले या फिर पुरानी पेंशन हों कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद न्यूनतम गारंटी अवश्य होना चाहिए।








कोयला कंपनियों में काम करने वाले अफसरों के न्यू पेंशन स्कीम( एनपीएस) का संचालन ट्रस्ट के माध्यम से किया जाएगा। कोल कंपनी के अफसर व सीएमओएआई के पदाधिकारी ट्रस्ट के मेंबर बनाए हैं। इधर कोल इंडिया प्रबंधन की ओर से पेंशन स्कीम के प्रबंधन के लिए एलआईसी को फंड मैनेजर बनाया है। जिसे करीब 1131 करोड़ रुपए दिए गए हैं।




वर्ष 2007 से सेवानिवृत्त कोल इंडिया के अधिकारियों के साथ कंपनी के 16 हजार से अधिक कोयला अधिकारियों को एनपीएस का लाभ दिया जाएगा। जिसे कोल इंडिया एक्जीक्यूटिव डिफाइंड कंट्रीब्यूशन पेंशन स्कीम का नाम दिया गया है। यह योजना कोल इंडिया के कर्मचारियों के लिए नियमित पेंशन योजना के अतिरिक्त है। जिसका प्रबंधन कोल माइंस प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (सीएमपीएफओ) करता है। एक अधिकारी के अनुसार एलआईसी को दिया गया फंड वर्तमान में कोल इंडिया के 12,388 अधिकारियों के लिए है। जनवरी 2007 के बाद करीब 3,800 लोग सेवानिवृत्त हो चुके हैं। अधिकारियों के लिए वर्ष 2007 में दूसरे वेतन समझौता के दौरान इसका प्रावधान किया गया था। जिसमें वेतन पुनरीक्षण में 30 प्रतिशत सुपरएनुएशन बेनीफिट का प्रावधान किया गया।

अफसर व सीएमओआई के पदाधिकारी ट्रस्ट मेंबर

कई अफसरों को नहीं मिल पाया है लाभ, निराकरण की कोशिश: राठौर

कोयला अधिकारियों के संगठन एआईएसीई के संयोजक पीके सिंह राठौर ने कहा है कि एनपीएस लागू कर दिया गया है। लेकिन वैसे अधिकतर 2007-2008 सेवानिवृत्त हुए अफसर जिनकी 2लाख से कम है। उनका अब तक भुगतान नहीं किया हुआ है। साथ ही जिन अफसरों की मृत्यु हुई है, उनके आश्रित प|ी को भी राशि नहीं मिला है। प्रबंधन कोशिश कर रहा है कि जल्द भुगतान हो जाए। हमारा संगठन भी इसके लिए प्रयास कर रहा है।



नोडल अफसर भी बनाए गए लेकिन संपर्क नहीं होने से परेशानी

सेवानिवृत्त कोल अफसरों को लाभ दिलाने व एनपीएस संबंधी समस्या निराकरण के लिए सभी कोल कंपनियों में नोडल अफसर बनाया गया है और उनके मोबाइल नंबर भी जारी किए गए हैं। लेकिन इसे लेकर कई की शिकायत है कि अधिकारियों के नंबर से समय पर संपर्क नहीं हो पाता है। जिससे समस्या के निराकरण में परेशानी आ रही है। इसी तरह फार्म-10 ई समय पर नहीं भर पाने वाले करीब 2 से 3 हजार अफसरों को भी एनपीएस का भुगतान कार्रवाई नहीं हो पाई है।

एक संघ के पदाधिकारी ही मेंबर दूसरे संगठन काे एतराज

बताया जा रहा है कि एनपीएस के संचालन के लिए जो ट्रस्ट बनाया गया है उसमें प्रबंधन के अफसरों के अलावा कोयला अधिकारी संगठन सीएमओएआई के पदाधिकारी सदस्य हैं। वहीं बीते कुछ वर्षों के दौरान कोयला अधिकारियों का एक नया संगठन एआईएसीई भी सामने आया है। एआईएसीई ने एतराज जताते हुए कहा है कि उनके संघ का पंजीयन दूसरे संगठन की अपेक्षा वैधानिक स्थिति में है। जिसमें अधिकांश सदस्य सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं। प्रबंधन को इस पर गौर करना चाहिए।

Category: News, NPS, Pensioners

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