ट्रेन में यात्रा स्वयं की जिम्मेदारी से करें, क्योंकि चोरी इस वजह से नहीं रोक पाएगा भारतीय रेलवे

| May 5, 2019

रतलाम। अगर आप ट्रेन में यात्रा करने जा रहे है तो स्वयं की जिम्मेदारी से करें, क्योंकि भारतीय रेलवे में लगातार हो रही चोरियों को रोकने में वे असमर्थ है। इसकी एक बड़ी वजह ट्रेन के डिब्बों में टीटीई का नहीं होना है। कुछ इसी प्रकार पश्चिम रेलवे के रतलाम रेल मंडल में हुआ है। टीटीई की कमी से जुझ रहा रतलाम रेल मंडल में अप्रैल माह में कुल 6850 यात्री डिब्बे बगैर टीटीई के दौड़े है। रेलवे की प्राथमिकता वातानुकूलित यानी की एसी डिब्बे तो है, लेकिन स्नीपर याने की शयनयान नहीं है। मंडल में ट्रेन में रतलाम, उज्जैन, इंदौर व चित्तौडग़ढ़ से टीटीई की ड्यूटी लगाई जाती है। लगातार चोरियों के बाद भी रेलवे कर्मचारी बढ़ाने पर विचार नहीं कर रही है।








इस तरह समझे इसको

रेलवे में टीटीई के अधिकारी सीटीआई याने की मुख्य टिकट पर्यवेक्षक को हर माह में दो बार वाणिज्य विभाग को ये रिपोर्ट देना होती है कि एक पखवाडे़ में कितने यात्री डिब्बों में टीटीई की ड्यूटी पाइंट होने के बाद भी नहीं लग पाई। मंडल मुख्यालय को जो आंकडे़ मिले है उसके अनुसार पश्चिम रेलवे में सबसे अधिक बगैर टीटीई की ट्रेन रतलाम में दौड़ रही है। यहां पर 6850 डिब्बे याने की २४ डिब्बों की एक ट्रेन हो तो पूरी 285 ट्रेन बगैर टीटीई के चली है। असल में ये सब ट्रेनों की बढ़ती संख्या, लगातार बढ़ती विशेष ट्रेन, टीटीई की नई भर्ती नहीं होना, टीटीई का सेवानिवृत होना आदि के कारण हो रहा है। ये असर आता यात्री की जिंदगी मेंट्रेन में टीटीई का बड़ा महत्व यात्रियों के लिए है। दो दिन पूर्व ही गोधरा से लेकर रतलाम तक एक महिला यात्री को ट्रेन में टीटीई के समय पर नहीं मिलने की वजह से परेशानी का सफर करना पड़ा, जबकि नागदा में जाकर मदद मिली। इसी प्रकार गोधरा से दाहोद के बीच हो रही चोरी की घटना का एक बड़ा कारण ही शयनयान में टीटीई का नहीं होना है।




इस तरह चले बगैर टीटीई के

रतलाम-कुल 2000 डिब्बे
चित्तौडग़ढ़-350 डिब्बे
उज्जैन-2500 डिब्बे
इंदौर-2000 हजार डिब्बे

कर्मचारियों की भारी कमी
असल में मंडल मुख्यालय में 160 टीटीई, इंदौर में 96 टीटीई, उज्जैन में 36 टीटीई व चित्तौडग़ढ़ में मात्र 27 टीटीई काम कर रहे है। रतलाम में तो इस वर्ष 18 टीटीई सेवानिवृत हो जाएंगे, जबकि १६ नए टीटी मिले है तो उनको बुकिंग, पार्सल, लगेज अन्य कार्य में लगाया जा रहा है।




हमारी पीड़ा कोई समझना नहीं चाहता
ये सही है कि टीटी की कमी से कार्य पर असर पड़ रहा है। टीटी है ही नहीं तो ड्यूटी किसकी लगाए। ट्रेन बढ़ रही है व कर्मच्री कम होते जा रहे है। असल में कर्मचारी भर्ती नहीं करके सरकार निजीकरण की दिशा में रेलवे को ले जा रही है। इसको बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
– राजेंद्र वर्मा, अध्यक्ष, ऑल इंडिया रेलवे टिकट चेकिंग आर्गेनाइजेशन

 

Category: Indian Railways, News

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