Election 2019 3rd phase : वोटिंग नहीं कर पाए रेलवे के 30 प्रतिशत चालक, ये है वजह

| April 28, 2019

रेलवे का 30 प्रतिशत रनिंग स्टाफ इस बार अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं कर पाएंगे। दरअसल में वे ड्यूटी पर रहेंगे। इसका उन्हें मलाल भी रहेगा। हालांकि पहली बार उन्हें डाकमत से मतदान करने की सुविधा देने की बात कही जा रही है। लेकिन इसकी जानकारी एक भी चालक को नहीं है और न लॉबी के नोटिस बोर्ड में सूचना चस्पा किया गया है। चुनाव की तारीख घोषित होने के बाद आयोग द्वारा शत-प्रतिशत मतदान के लिए जागरूकता अभियान चलाया गया।







अधिकारी व कर्मचारियों के अलावा समाजिक संस्थाओं की मदद लेकर आम जनता से अपील की गई। माना जाता है कि जितनी अधिक संख्या में मतदान होगा परिणाम बेहतर और निष्पक्ष आता है। तमाम व्यवस्थाओं के बावजूद कई ऐसे कर्मचारी हंै, जो मतदान करने से वंचित हो जाते हैं। इनमें रेलवे का रनिंग स्टाफ भी शामिल है। अकेले बिलासपुर रेल मंडल की बात करें तो यहां तकरीबन 1500 कोचिंग व मालगाड़ी चालक व सहायक चालक हंै।




इनमें से ज्यादातर लोगों की मतदाता सूची में नाम भी है। वे मतदान करने का अधिकार रखते हैं। लेकिन ड्यूटी के कारण 30 प्रतिश चालक व सहायक वोटिंग से वंचित हो जाएंगे। इनमें वे शामिल हैं जिनकी सोमवार की रात या मंगलवार की तड़के सुबह ड्यूटी लगेगी। एक बार ड्यूटी पर जाने के बाद वे 24 से 36 घंटे घर से बाहर होते हैं। इस लिहाज से मतदान के समय पर उनकी घर वापसी संभव नहीं है।
व्यवस्था करने में नाकाम रहा प्रशासन

इस संबंध में वरिष्ठ चालकों से पूछने पर उनका कहना है कि एसोसिएशन के अलावा व्यक्ति रूप से रेल प्रशासन को यह मांग की गई थी ऐसी व्यवस्था कराई जाए ताकि वे सभी वोटिंग कर सके। छुट्टी मिलनी तो संभव नहीं है। क्योंकि इस स्थिति में ट्रेनें खड़ी हो जाएंगी। इसी दबाव के कारण इस बार डाकमत से वोटिंग की व्यवस्था की गई। लेकिन प्रशासन यह सूचना पहंुचाने में नाकाम रहा।




यह है डाकमत से वोटिंग का नियम

इस डाकमत से वोटिंग करने का नियम यह है कि पहले एक फार्म भरकर जमा करना होता है। इसके बाद निर्वाचन कार्यालय उनके लिए इस तरह के इंतजाम करता है। ट्रेन चालकों में से एक भी ऐसे नहीं है जिन्हें रेल प्रशासन ने सूचना दी हो। यही वजह है कि इसकी प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए। लिहाजा अब वे वोटिंग नहीं कर पाएंगे।

बस चालकों की सक्रियता आई कम

चुनाव ड्यूटी में बड़ी संख्या में बस से लेकर अलग-अलग वाहनों को अधिग्रहण किया जाता है। अधिग्रहण की कार्रवाई तीन दिन पहले ही पूरी कर ली जाती है। मसलन वाहन चालक तीन दिन पहले दल को मतदान केंद्रों तक पहंुचाने और मतदान के बाद वापस लाने में व्यस्त हो जाते हैं।

इसके चलते वे मतदान नहीं कर पाते थे। इस बार उन्होंने इसे लेकर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और पुख्ता इंतजाम करने का आग्रह किया। इसके बाद डाकमत पत्र की सुविधा प्रदान की गई है।

Category: Indian Railways, News

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