आयकर रिटर्न में गलत जानकारी के लिए आप ही होंगे जिम्मेदार

| April 19, 2019

आशीष कुमार को अपने कानों पर भरोसा नहीं हुआ जब उनके एक दोस्त ने पिछले साल मिली आयकर रिफंड की बड़ी रकम के बारे में बताया. उनके दोस्त ने कहा, ‘पिछली बार जिस प्रैक्टिशनर की मदद से इनकम टैक्स रिटर्न फाइल किया गया था उसने रिफंड की रकम का 15% कमीशन के तौर पर लिया.’

इस बार आशीष ने अपनी किस्मत आजमाने की सोची और अपने फॉर्म 16 के साथ अन्य जानकारी उसे भेज दी. कुछ दिन बाद ही उन्हें आयकर विभाग से इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की सूचना मिल गयी. इस रिटर्न में उन्होंने रिफंड के रूप में 50,000 रुपये क्लेम किया. यही वह मुकाम है जहां से कहानी में पेंच फंसता है. आईटीआर भरने वाले ने आशीष की ग्रॉस इनकम 1.65 लाख रुपये कम दिखाई है.








उस व्यक्ति का दावा है कि इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 10 के हिसाब से कुछ भत्ते पर टैक्स छूट का दावा किया गया है जिसका जिक्र फॉर्म 16 में नहीं है. साल 2017-18 में आशीष की आमदनी फॉर्म 16 के हिसाब से 14.85 लाख रुपये थी, जबकि इनकम टैक्स रिटर्न में यह 13.2 लाख रुपये दिखाई गयी.

आशीष इनकम टैक्स रिफंड के रूप में 50,000 रुपये पाने की बात से बहुत खुश थे. कुछ टैक्स एक्सपर्ट की बात सुनने के बाद हालांकि उनकी खुशी काफूर हो गयी. दिल्ली के एक चार्टर्ड अकाउंटेंट ने कहा, ‘इस साल से करदाताओं को आईटीआर में सैलरी का ब्रेक अप देना है. इसमें टैक्स छूट वाले भत्ते के बारे में भी लिखना है.’




टैक्स विभाग के एसेसमेंट में आंकड़ों में किसी तरह की गड़बड़ी से करदाता को नोटिस मिल सकता है. आशीष की तरह हजारों करदाता ऐसे होंगे जिन्होंने गलत आईटीआर भरा होगा. टैक्स विभाग के अधिकारियों की नजर इस बार उन लोगों पर विशेष तौर पर रहेगी जिनका इनकम टैक्स रिफंड 50,000 से दो लाख रुपये के बीच है.

ऑनलाइन रिटर्न फाइलिंग के लिए दस्तावेज जरूरी नहीं

आईटीआर में गड़बड़ी इसलिए भी होती है क्योंकि ऑनलाइन फाइलिंग में दस्तावेजों की जरूरत नहीं पड़ती. मुंबई के एक चार्टर्ड अकाउंटेंट ने कहा, ‘आप एचआरए क्लेम कर सकते हैं और मेडिकल इंश्योरेंस, होम लोन, एजुकेशन लोन आदि के लिए बिना सबूत दिए डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं.’ टैक्स विशेषज्ञ हालांकि चेतावनी देते हैं कि अगर स्क्रूटनी में मामला पकड़ में आ गया तो आपको भारी जुर्माना चुकाना पड़ सकता है.




अशोक माहेश्वरी एंड एसोसिएट्स के पार्टनर अमित माहेश्वरी ने कहा, ‘इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 270A के हिसाब से आमदनी की गलत जानकारी देने या टैक्स चुराने के किसी भी कदम पर टैक्स देनदारी का 200% जुर्माना लगाया जा सकता है.’ क्लियर टैक्स.इन के सीईओ अर्चित गुप्ता ने कहा, ‘इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 10 के हिसाब से टैक्स बचाने के लिए हर तरह के दस्तावेज आपके नियोक्ता को दिया जाना चाहिए. अगर फॉर्म 16 में इन बातों का जिक्र नहीं है तो इन भत्तों पर छूट क्लेम करना नुकसानदेह साबित हो सकता है.’

गलत कटौती का दावा
बहुत से करदाता वित्त वर्ष की समाप्ति से पहले टैक्स प्लानिंग नहीं कर पाते. बहुत से करदाताओं के पास टैक्स सेविंग करने के लिए रकम नहीं होती. इसके बाद भी वे सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख और सेक्शन 80D के तहत 25-55,000 रुपये के टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं. टैक्स विशेषज्ञ कहते हैं कि अब इस तरह के फ्रॉड को पकड़ना आसान है. टैक्सफाइल.इन के शुभम अग्रवाल ने कहा, ‘आपने मेडिकल इंश्योरेंस खरीदा है या नहीं, यह जानना टैक्स विभाग के लिए बहुत आसान है.’

दान देने में धोखा
टैक्स बचत का सबसे आसान तरीका इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 80G था. किसी धर्मार्थ संस्था को दान देकर करदाता इनकम टैक्स में छूट का फायदा उठा लेते थे. यह रकम करदाता को वापस नकदी में मिल जाती थी. आमतौर पर इस रकम के 50 फीसदी पर टैक्स छूट मिल जाती थी. अगर कोई व्यक्ति 30% टैक्स स्लैब में है और वह किसी धार्मिक संस्था को एक लाख रुपये का दान देता था तो उसे 50,000 रुपये की रकम पर टैक्स छूट मिलती थी. इस हिसाब से उसकी टैक्स बचत 15,450 रुपये होती थी.

अब सरकार ने इसके प्रावधान भी बदल दिए हैं.

अगर आपका रिटर्न रिजेक्ट हो जाय
अगर आपको आमदनी के आंकड़े अलग-अलग हैं तो आपका आईटीआर रिजेक्ट हो सकता है. एक बार करदाता को इसे सही करने का मौका मिलता है, लेकिन जान-बुझकर की गयी गलती पर गंभीर कार्रवाई हो सकती है. माय मनी मंत्रा.कॉम के एमडी राज खोसला ने कहा, ‘अगर आयकर अधिकारी को यह लगा कि टैक्स चुकाने वाला व्यक्ति जान-बूझकर आमदनी छिपाने के प्रयास कर रहा है तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है.’

गलती हो ही जाए तो क्या करें

आप अपने इनकम टैक्स रिटर्न को रिवाइज कर सकते हैं. इसमें आपको अपनी गलतियों को सुधारने का मौका मिलता है. आप रिवाइज्ड रिटर्न फाइल कर अपनी गलतियों को सुधार सकते हैं.

Category: News

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