नयी पेंशन स्कीम – कर्मचारियों को गृहमंत्री ने आश्वासन दिया

| April 18, 2019

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद का प्रतिनिधि मंडल केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से इप्सेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीपी मिश्र के नेतृत्व में मिला। प्रतिनिधि मंडल में परिषद के अध्यक्ष सुरेश रावत, संगठन प्रमुख डॉ. के के सचान, वरिष्ठ उपाध्यक्ष गिरीश चन्द्र मिश्रा, महामंत्री अतुल मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव रहे। .








परिषद के महामंत्री अतुल मिश्रा ने गृह मंत्री को बताया कि पुरानी पेंशन बहाली, प्रदेश के लाखों कर्मचारियों की वेतन विसंगति, भत्तों में समानता, कैशलेस इलाज की सुविधा के लिए बनाई जा रही नीति पर शीघ्र निर्णय कराएं। ये प्रकरण शासन स्तर पर लम्बित हैं। उन्होंने कहा कि पुरानी पेंशन योजना पर भी भारत सरकार को निर्णय लेना है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह जी ने कहा कि इस समय लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लगी हुई है इसलिए केन्द्र व राज्य सरकार कोई निर्णय नहीं कर सकती है। वे मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव से कहेंगे कि संगठन के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर कर्मचारियों के हित में निर्णय करें। राजनाथ सिंह ने कहा कि उनकी मंशा है कि केन्द्र व राज्य के कर्मचारियों के वेतन भत्ते और अन्य सुविधाओं में समानता होनी चाहिये। इसपर गम्भीरता से पहले से ही विचार किया जा रहा है। निर्णय लेने में कुछ वैधानिक कठिनाइयां आ रही है जिसका हल निकाला जायेगा। उत्तर प्रदेश में तो पहले ही लागू किया जा चुका है। .




‘ कर्मचारियों का प्रतिनिधि मंडल गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मिला.

‘ गृहमंत्री बोले कर्मचारियों को अपने परिवार का अंग मानते हैं .

देश में पहली अप्रैल 2005 से लागू नई पेंशन योजना राय सरकार के साथ ही करीब 60 हजार नए कर्मचारियों, अधिकारियों और शिक्षकों के लिए सिरदर्द साबित हो रही है। करीब सवा तीन साल बीत गए, लेकिन इस अवधि में भर्ती हुए कर्मचारियों के वेतन से भविष्य निधि या पेंशन के मद में धनराशि की कटौती नहीं की जा रही है।ड्ढr नई पेंशन योजना में नए कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के समय पुराने कर्मचारियों की तरह पेंशन और पारिवारिक पेंशन के घोषित लाभ नहीं मिलेंगे।

इस योना में नए कर्मचारियों से वेतन और महँगाई भत्ते का 10 फीसदी अंशदान लिया जाना था। इतना ही अंशदान सेवायोजक यानी राय सरकार अथवा संबंधित स्वायत्तशासी संस्थानिजी शिक्षण संस्था द्वारा किया जाना था, लेकिन पहली अप्रैल 2005 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों के वेतन से अंशदान की राशि अब तक नहीं काटी गई। न ही सेवायोजक ने अपना अंशदान कहीं अलग खाते में जमा किया।ड्ढr केन्द्र सरकार ने वर्ष 2004 में नई पेंशन योजना लागू की थी।




उसने नई पेंशन योजना की निधि के लिए अलग से खाते तक खुलवा दिए और निधि के निवेश के लिए हाल में फण्ड मैनेजर भी नियुक्त कर दिए, लेकिन राय सरकार ऊहापोह में रही। अब वह नई पेंशन योजना पर अमल करना शुरू करती है, तो करीब सवा तीन साल के दौरान भर्ती हुए कर्मचारियों के वेतन से बकाए अंशदान की बड़ी राशि वसूलनी पड़ेगी, जो कर्मचारियों में असंतोष पैदा कर सकता है। शासन भी मानता है कि नई पेंशन योजना की प्रक्रिया में विलम्ब से पेचीदगियाँ बढ़ीं हैं।

सूत्रों के अनुसार वित्त विभाग इस योजना के दायर में आने वाले कर्मचारियों से बकाए अंशदान की एक मुश्त धनराशि वेतन से काटने के बजाय कई किस्तों में धनराशि वसूलने की तैयारी कर रहा है। इस संबंध में शीघ्र निर्णय लिए जाने की उम्मीद है।ड्ढr सरकार भी मानती है कि नई पेंशन योजना में उसे कर्मचारियों के अंशदान की राशि के बराबर कई सौ करोड़ रुपए का अपना अंशदान भी अलग खाते में जमा कर निधि बनानी पड़ेगी। उसके बाद निधि की आधी राशि के निवेश के लिए केन्द्र सरकार की तर्ज पर फण्ड मैनेजर भी नियुक्त करने होंगे। यदि फण्ड मैनेजर अच्छे हुए तो भविष्य निधि और पेंशन की पुरानी स्कीम की तुलना में नए कर्मचारियों को सेवा निवृत्ति के समय भविष्य के नाम पर अच्छी धनराशि भी मिल सकती है।

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