उदाहरण के साथ समझें, ग्रैच्युटी की गणना और इस पर टैक्स छूट के नियम

| April 13, 2019

पेमेंट ऑफ ग्रैच्युटी ऐक्ट, 1972 कहता है कि 10 से ज्यादा कर्मियों वाले खान, तेल उत्पादन क्षेत्र, फैक्ट्री, दुकान आदि के लिए अपने कर्मियों को ग्रैच्युटी देना अनिवार्य है। वैसे जो कंपनियां इस कानून के दायरे में नहीं आती हैं, वे भी चाहें तो अपने एंप्लॉयीज को ग्रैच्युटी दे सकती हैं।

नई दिल्ली :- ग्रैच्युटी, रिटायरमेंट पर मिलने वाली एकमुश्त रकम होती है। यह रकम एंप्लॉयी के नौकरी से रिजाइन करने, उसकी मृत्यु होने और दुर्घटना या बीमारी के कारण अपंग होने पर भी मिलती है, बशर्ते उसने एक ही कंपनी में कम-से-कम 5 वर्ष काम किया हो। दूसरे शब्दों में कहें तो यह लंबी अवधि तक लगातार काम करने के लिए एंप्लॉयी को कंपनी की तरफ से दिया गया एक उपहार होता है। हालांकि, यह कंपनी की मर्जी पर निर्भर नहीं करता कि वह उपहार दे या नहीं, बल्कि यह कानून अनिवार्य है।








क्या कहता है कानून?
पेमेंट ऑफ ग्रैच्युटी ऐक्ट, 1972 कहता है कि 10 से ज्यादा कर्मियों वाले खान, तेल उत्पादन क्षेत्र, फैक्ट्री, दुकान आदि के लिए अपने कर्मियों को ग्रैच्युटी देना अनिवार्य है। वैसे जो कंपनियां इस कानून के दायरे में नहीं आती हैं, वे भी चाहें तो अपने एंप्लॉयीज को ग्रैच्युटी दे सकती हैं।

गणना के अलग-अलग नियम
सरकारी कर्मचारियों, ग्रैच्युटी ऐक्ट के दायरे में आने वाले कर्मचारियों और इसके दायरे से बाहर वाले कर्मचारियों के लिए ग्रैच्युटी की रकम और इस पर लगने वाले टैक्स की गणना के अलग-अलग नियम हैं। आइए ग्रैच्युटी ऐक्ट के दायरे में आने वाले कर्मचारियों के लिए ग्रैच्युटी की रकम और इस पर मिलने वाली टैक्स छूट की गणना के नियम समझें…




यह है फॉर्म्युला 
ग्रैच्युटी की रकम कितनी होगी, यह मुख्य रूप से दो कारकों पर निर्भर करती है। पहला- एंप्लॉयी ने उस कंपनी में कितने साल काम किया और उसकी आखिरी सैलरी क्या थी। यहां सैलरी का मतलब मूल वेतन (बेसिक सैलरी) और महंगाई भत्ता (डीए) है। सैलरी के दूसरे कंपोनेंट्स इसमें शामिल नहीं होते।

पेमेंट ऑफ ग्रैच्युटी ऐक्ट के दायरे में आते हैं तो ग्रैच्युटी की रकम की गणना करने के लिए काम के कुल वर्ष को 15 दिन की सैलरी से गुना करें। याद रखें कि 15 दिनों की सैलरी निकालने के लिए आपको आखिरी महीने की सैलरी (मूल वेतन और महंगाई भत्ता) में 26 से भाग देकर जो आए उसमें 15 से गुना करना होता है।

उदाहरण
मान लीजिए, आपको आखिरी सैलरी में मूल वेतन और महंगाई भत्ता मिलाकर 25,000 रुपये मिले थे और आपने कुल 12 वर्षों तक नौकरी की। तो आप ग्रैच्युटी की गणना के लिए 25,000 में 26 से भाग दें, जो आए उसमें क्रमशः 15 और 12 से गुना करें। यानी, {(25,000/26)x15}x12 = ₹1,73,077 रुपये।




पेमेंट ऑफ ग्रैच्युटी ऐक्ट के दायरे में नहीं आते हैं तो यानी अगर आपकी कंपनी ग्रैच्युटी ऐक्ट के दायरे में नहीं आती है, फिर भी ग्रैच्युटी दे रही है तो 15 दिनों की सैलरी के लिए आपको ऊपर का फॉर्म्युला लागू नहीं करना होगा, बल्कि 25,000 रुपये में उस महीने के कुल दिनों से भाग देकर, फिर 15 से गुना करना होगा। यानी, आखिरी महीने के 15 दिनों की सैलरी को 12 से गुना करने के बाद जो आंकड़ा आता है, वही आपकी ग्रैच्युटी की रकम होगी।

उदाहरण

फिर मान लीजिए, आपने मार्च महीने में रिटायर हुए और आपको आखिरी सैलरी में मूल वेतन और महंगाई भत्ता मिलाकर 25,000 रुपये मिले थे और आपने कुल 12 वर्षों तक नौकरी की। तो आप ग्रैच्युटी की गणना के लिए 25,000 में 31 (मार्च महीने में 31 दिन होते हैं) से भाग दें, जो आए उसमें क्रमशः 15 और 12 से गुना करें। यानी, {(25,000/31)x15}x12 = ₹1,45,161 रुपये।

ग्रैच्युटी पर टैक्स छूट
इनकम टैक्स ऐक्ट, 1961 के तहत ग्रैच्युटी की एक निश्चित रकम पर टैक्स नहीं देना पड़ता है। टैक्स छूट के दायरे में ग्रैच्युटी की उतनी ही रकम आएगी जो इन तीनों में सबसे कम होगी- फॉर्म्युला आधारित ग्रैच्युटी की उचित रकम, आपको मिली ग्रैच्युटी की वास्तविक रकम और 20 लाख रुपये। सरकार ने तय कर दिया है कि 20 लाख रुपये से ज्यादा ग्रैच्युटी की रकम पर टैक्स छूट नहीं मिलेगी। पहले यह सीमा 10 लाख रुपये की थी। लेकिन, 2018 में पेमेंट ऑफ ग्रैच्युटी ऐक्ट में संशोधन करके टैक्स छूट के लिए ग्रैच्युटी की रकम 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी। बाद में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ट्वीट कर स्पष्ट किया कि इस बढ़ी हुई सीमा के दायरे में सभी सरकारी कर्मचारियों, पेमेंट ऑफ ग्रैच्युटी ऐक्ट के दायरे में आने वाले कर्मचारियों के साथ-साथ इस ऐक्ट के दायरे में नहीं आने वाले एंप्लॉयी भी आएंगे।

उदाहरण
मान लीजिए कि आपके एंप्लॉयर ने आपको 12 लाख रुपये ग्रैच्युटी दी। अब आप 25,000 रुपये की सैलरी वाला ऊपर का उदाहरण यहां लागू करेंगे तो कानून आपका उचित ग्रैच्युटी 1,73,077 रुपये होगा। दूसरी ओर, आपको मिली ग्रैच्युटी की वास्तविक रकम 5 लाख रुपये है और सरकार की ओर से तय ऊपरी सीमा 20 लाख रुपये है। इनमें सबसे कम रकम 1,73,077 रुपये है। यानी, आपकी यही रकम टैक्स फ्री होगी और शेष 3,26,923 रुपये पर टैक्स देना होगा।

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