Central Government Employees disappointed with political class

| April 13, 2019

सातवें वेतन आयोग पर खुशखबरी का इंतजार कर रहे केंद्र सरकार के कर्मचारियों की उम्मीदें और धराशायी हो गई हैं. बहुत समय से उन्हें कई तरह के आश्वासन दिए गए कि उनके मूल न्यूनतम वेतन के साथ-साथ फिटमेंट फैक्टर को भी बढ़ाया जाएगा. सभी चर्चाओं, विचार-विमर्श और विनती के बावजूद केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर कोई फैसला नहीं लिया है. लाखों कर्मचारियों को इस मामले में खुशखबरी मिलने का इंतजार करते हुए छोड़ दिया गया है.








केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए फिर भी एक आशा की किरण थी. वो थे लोकसभा चुनाव 2019 के लिए सभी पार्टियों के घोषणापत्र. 11 अप्रैल को लोकसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान हुए. इससे पहले सभी पार्टियों के घोषणापत्र जारी किए गए हैं. हालांकि किसी भी घोषणापत्र केंद्रीय सरकारी कर्मचारी के लिए कोई वादा नहीं किया गया है. सरकारी कर्मचारियों को प्रमुख राजनीतिक दलों के घोषणापत्र से उम्मीद थी. हालांकि किसी भी पक्ष ने अपने घोषणापत्र में इस मुद्दे का उल्लेख नहीं कियाऔर कोई अन्य आश्वासन भी नहीं दिया.




भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ने अपने घोषणापत्र जारी किए लेकिन सरकारी कर्मचारियों के लिए कोई वादा नहीं किया गया. कई वादे हैं जो किसानों के लिए हैं लेकिन जब सरकारी कर्मचारियों की बात आती है तो सभी दल मूक बने हुए हैं. रिपोर्ट आई थीं कि सरकारी एक आखिरी निर्णय ले सकती है. इसी के बाद सरकारी कर्मचारियों की उम्मीदें काफी बढ़ गई थीं. आदर्श आचार संहिता लागू होने से एक महीने पहले कम से कम तीन कैबिनेट बैठकें हुईं थीं.




हालांकि, मंत्रिमंडल की किसी भी बैठक में वेतन वृद्धि का कोई उल्लेख नहीं किया गया था. एक बार आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद यह सरकारी कर्मचारियों के लिए निराशा थी क्योंकि आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद सरकार को कोई नीतिगत निर्णय या घोषणा करने की अनुमति नहीं है. इसके बाद सराकरी कर्मचारियों के लिए आशा की किरण बनी नई सरकार के वादे. उन्हें घोषणापत्रों में किसी प्रकार की घोषणा की उम्मीद हो गई. सरकार हालांकि संकेत दे रही है कि कोई और वेतन आयोग नहीं होगा और सातवां वेतन आयोग अंतिम था.

Category: News, Seventh Pay Commission

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