वीआरएस ले बच्चों को नौकरी नहीं लगवा सकेंगे रेलकर्मी

| March 11, 2019

अम्बाला| रेलवे कर्मचारी वीआरएस लेकर आश्रित बच्चों को नौकरी नहीं दिला सकेंगे। रेलवे में कार्यरत ट्रैक मैन, कीमैन,…

रेल कर्मचारियों के लिए बुरी खबर है। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश पर मुहर लगाते हुए लारजेस योजना बंद करने का आदेश दिया है।








अब रेलवे कर्मचारी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले अपने बेटे-बेटी को अपनी जगह नौकरी नहीं दिला पाएंगे। गत 6 मार्च को फैसला आने के बाद नेशनल फेडरेशन ऑफ रेलवे ने मंत्रलय को पत्र लिख इसका विकल्प तलाशने की मांग की है। 2016 में एक कर्मचारी के आश्रित को नौकरी नहीं मिलने पर उसने पंजाब व हरियाणा हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।




2017 में हाई कोर्ट ने रेलवे को लारजेस योजना बंद करने का आदेश दिया था। अपने आदेश में हाई कोर्ट ने रेलवे को कहा था- ‘यह नौकरी देने का गलत तरीका है। बैक डोर से नौकरी देना बंद करें।’ इसके बाद रेलवे के तत्कालीन रेलवे महाप्रबंधक आरसी लोहानी ने पत्र जारी कर योजना बंद कर दी थी। इसके खिलाफ कर्मचारी सुप्रीम कोर्ट चले गए थे।

यह है लारजेस योजना: रेलवे में ट्रैक मैन, कीमैन, गैंगमैन, पेट्रोल मैन, पायलट और संरक्षा से जुड़े कर्मचारी (ग्रुप डी) इस योजना का लाभ ले सकते थे।




वह 33 साल की सेवाओं के बाद मेडिकली अनफिट या अन्य कारणों के कारण स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले अपने बेटे या बेटी को नौकरी दिला देते थे। उन्हें लिखित परीक्षा भी नहीं देनी पड़ती थी। अनुकंपा के आधार पर सीधी नियुक्ति मिल जाती थी। लारजेस योजना के तहत मंडल स्तर पर ही नौकरी मिल जाती थी। मंडल स्तर पर कार्रवाई पूरी होने के बाद मेडिकल फिट होने के बाद नियुक्ति हो जाती थी।

Category: Indian Railways, News

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