Better retirement planning can fetch you more

| March 7, 2019

सुरेश को लगता है कि रिटायरमेंट में लंबा वक्त बाकी है। इसी वजह से वे उसकी प्लानिंग नहीं करते। रिटायरमेंट प्लानिंग टालने से जिंदगी के आखिरी पड़ाव में आर्थिक तंगी हो सकती है। अगर आप रिटायरमेंट के बाद किसी पर आश्रित नहीं रहना चाहते तो आपको नौकरी करने के दौरान ही कंफर्टेबल लाइफ के लिए पर्याप्त पैसा जमा कर लेना चाहिए। यह तभी हो सकता है, जब आपकी इसकी प्लानिंग जल्द शुरू करें। पेंशन या प्रॉविडेंट फंड की बचत से आप वित्तीय आजादी नहीं हासिल कर सकते। आपको रेगुलर इनवेस्टमेंट के जरिये रिटायरमेंट फंड तैयार करना चाहिए/







पब्लिक प्रॉविडेंट फंड, नेशनल पेंशन स्कीम, शेयरों और म्यूचुअल फंड में सीधे निवेश से रिटायरमेंट के लिए फंड जमा किया जा सकता है। किन प्रॉडक्ट्स में निवेश करना है, यह उम्र, रिटर्न की उम्मीद और रिस्क उठाने की क्षमता से तय होता है। नीचे हम रिटायरमेंट प्लानिंग के कुछ आसान उपाय बता रहे हैं:

जल्द शुरुआत करें 

रिटायरमेंट के लिए बचत की शुरुआत जल्द करें। मान लेते हैं कि आपकी उम्र 25 साल है और 65 साल की उम्र में आप रिटायर होंगे। ऐसे में अगर 40 साल तक अगर हर महीने 5,000 रुपये भी बचाते हैं तो 12 पर्सेंट के अनुमानित रिटर्न के साथ कुल रकम 6 करोड़ रुपये होगी। अगर आप बचत करने में पांच साल की देरी करते हैं तो यही रकम घटकर 3.25 करोड़ रुपये रह जाएगी। इसलिए कम उम्र से बचत करना जरूरी है। आप छोटी रकम से भी इसकी शुरुआत कर सकते हैं और नियमित तौर पर निवेश करें। सैलरी बढ़ने के साथ आप निवेश की रकम बढ़ा सकते हैं।



कितने फंड की जरूरत है, पता लगाएं 

रिटायरमेंट प्लानिंग के वक्त मन में पहला सवाल यही आता है कि कितना फंड काफी होगा/ अपनी लाइफस्टाइल के हिसाब से आप इसका अंदाजा लगा सकते हैं कि रिटायरमेंट के बाद आपको हर साल कितनी रकम की जरूरत पड़ेगी। इस रकम में 20 से गुणा करिए। इससे आपको रिटायरमेंट के वक्त की कुल रकम का पता चल जाएगा। इसमें आपकी अधिकतम उम्र 85 साल मानी गई है। हमने यह भी माना है कि 65 साल के बाद आप रिटायर होंगे। रिटायरमेंट के वक्त कितने पैसों की जरूरत पड़ेगी, इसका पता लगाने के लिए आप कई ऑनलाइन टूल का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें महंगाई दर, रिस्क की क्षमता आदि के साथ इसका अंदाजा लगाया जाता है।



निवेश के सही विकल्प का चुनाव 

रिटायरमेंट की बचत के लिए प्रॉविडेंट फंड लोकप्रिय जरिया है। ज्यादातर लोग कंपनी के जरिये पीएफ में निवेश करते हैं। अगर आपके पास पीएफ या पीपीएफ एकाउंट है तो रिटायरमेंट के वक्त उसमें जमा रकम कितनी होगी, इसका अनुमान लगाया जा सकता है। ऊपर हमने रिटायरमेंट के लिए कुल रकम का अनुमान लगाया था। पीएफ में जमा रकम को उसमें से घटाने के बाद जो रकम बचती है, उसके लिए आपको इनवेस्टमेंट करना होगा। आप रिटर्न की उम्मीद और जोखिम सहने की क्षमता के आधार पर निवेश कर सकते हैं। मान लीजिए कि मिस्टर एक्स की उम्र 30 साल है और वह 60 साल की उम्र में रिटायर होने वाले हैं और उस वक्त उन्हें 5 करोड़ रुपये की जरूरत होगी। उनकी सैलरी 85,000 रुपये महीना है। आइए, अब उनके लिए निवेश के कुछ विकल्पों पर गौर करते हैं:

पहला विकल्प 

सबसे सुरक्षित तरीका पीपीएफ में निवेश होगा। 50 साल की उम्र तक 5 करोड़ रुपये बचाने के लिए उन्हें हर महीने 29,000 रुपयों का निवेश पीपीएफ में करना होगा। उनकी सैलरी और खर्च को देखते हुए यह रकम काफी ज्यादा है।

दूसरा विकल्प 

कम निवेश के साथ इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए उन्हें कम रिस्क वाले प्रॉडक्ट्स में निवेश करना चाहिए। मान लीजिए कि वह हर महीने पीपीएफ में 8,000 रुपये निवेश करते हैं। इससे 30 साल के बाद उनके पास 1.4 करोड़ रुपये हो जाएंगे। बाकी के 3.6 करोड़ के लिए वह एनपीएस और म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं। अगर वह एनपीएस में 5,000 रुपये हर महीने लगाते हैं (इसमें तुलनात्मक तौर पर कम रिस्क है और अनुमानित रिटर्न 12 पर्सेंट माना गया है) तो 30 साल में उनके पास 1.75 करोड़ रुपये जमा हो जाएंगे। बाकी के 1.85 करोड़ के लिए वह म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं। इसमें 15 पर्सेंट का अनुमानित रिटर्न माना गया है। उन्हें हर महीने इसके लिए 2,500 रुपये का निवेश करना होगा। इन सभी विकल्पों से उन्हें हर महीने 15,500 रुपये के निवेश पर 30 साल के बाद 56 लाख रुपये मिलेंगे। रिटायरमेंट प्लानिंग के अलावा पीएफ, एनपीएस और म्यूचुअल फंड में निवेश से टैक्स बचाने में भी मदद मिलती है। इनकम टैक्स के सेक्शन 80सी के तहत हर साल 1.5 लाख रुपये के निवेश को टैक्स छूट मिली हुई है। यह पैसा पीएफ और इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ईएलएसएस) में लगाया जा सकता है। एनपीएस में भी साल में 50 हजार रुपये के निवेश पर टैक्स छूट मिलती है। इतना याद रखें कि रिटायरमेंट प्लानिंग लंबे समय की प्रक्रिया है। अगर आप अनुशासित होकर निवेश करते हैं तो उम्र के आखिरी पड़ाव में आपको पैसों की चिंता नहीं करनी होगी।

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