पीएफ कटौती के लिए भत्ते भी मूल वेतन में जुड़ेंगे

| March 2, 2019

निर्णय का अनुपालन सुनिश्चित करेंगे : ईपीएफओ

नई दिल्ली:- सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि है नियोक्ता कंपनी विशेष भत्तों (स्पेशल अलाउंस) को कर्मचारी की बेसिक सैलरी (मूल वेतन) से अलग नहीं कर सकतीं और पीएफ कटौती के लिए भत्तों को बेसिक वेतन में जोड़ा जाना चाहिए। .








अदालत ने गुरुवार को फैसले में कहा कि कंपनियां पीएफ की गणना के लिए विशेष भत्तों को मूल वेतन से अलग नहीं रख सकतीं। कोर्ट ने इस मामले में ईपीएफओ के खिलाफ कंपनियों की याचिका खारिज कर दी। कंपनियों ने पीएफ कटौती के लिए कर्मचारियों के भत्तों को मूल वेतन में जोड़ने के फैसले को चुनौती दी थी।

कोर्ट के सामने सवाल था कि क्या विशेष भत्ते पीएफ एक्ट की धारा 2(बी)(2) के तहत बेसिक वेतन का हिस्सा हैं। जानकारों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से 15,000 रुपये बेसिक वेतन से ऊपर वालों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। जिन लोगों का पीएफ अंशदान इस फैसले से बढ़ेगा, उनकी टेकहोम सैलरी पर असर पड़ेगा।




मान लीजिए कि आपका मूल वेतन 15 हजार है और स्पेशल अलाउंस 15 हजार है तो आपका पीएफ कंपनी और कर्मचारियों को मिलाकर 3600 रुपये बनता है, क्योंकि इसमें स्पेशल अलाउंस जोड़ा नहीं जाता है। लेकिन अदालती निर्णय के बाद पीएफ अंशदान की गणना 30 हजार पर की जाएगी। कई जगह पर कंपनियों का पीएफ भी सीटीसी का हिस्सा होता है, ऐसे में नए सिरे से गणना पर कर्मचारी के वेतन के हिस्से से ही उसकी कटौती होगी।





कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने कहा है कि अदालती फैसले का अनुपालन सुनिश्चित करेगा। ईपीएफओ के एक ट्रस्टी विरिजेश उपाध्याय ने कहा है कि यह बहुत समय से लंबित मामला है, जिसे कोर्ट ने सुलझाया है। कर्मचारी के मूल वेतन का 12 प्रतिशत और उतना ही कंपनी पीएफ में अंशदान के तौर पर देती है, जिसका प्रबंधन ईपीएफओ करता है। वेतन का बाकी हिस्सा स्पेशल अलाउंस, ट्रेवल अलाउंस या एचआरए के तौर पर जुड़ता है। .

हजार रुपये से अधिक बेसिक सैलरी वालों पर असर नहीं.

प्रतिशत नियोक्ता और कर्मियों प्रत्येक का अंशदान पीएफ में.

प्रतिशत नियोक्ता और कर्मियों प्रत्येक का अंशदान पीएफ में.

हजार रुपये से अधिक बेसिक सैलरी वालों पर असर नहीं

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