पेंशन स्कीम में प्रशासनिक आदेश से कैसे हो सकता है बदलाव : हाई कोर्ट

| February 26, 2019

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राज्य कर्मचारियों की नए पेंशन स्कीम पर राज्य सरकार से पूछा है कि, जब कर्मचारी सेवा नियमावली में पेंशन की व्यवस्था है तो सरकार इसे प्रशासनिक आदेश से कैसे बदल सकती है। क्या सरकार केन्द्र की योजना को कर्मचारियों की इच्छा के विपरीत अपना सकती है। जब सुप्रीम कोर्ट ने अंशदान को वेतन का हिस्सा माना है तो सरकार उसे शेयर मार्केट में बिना कर्मचारियों की सहमति के कैसे लगा सकती है। शेयर डूबने की स्थिति में क्या सरकार न्यूनतम पेंशन तय करने पर विचार करेगी।









कोर्ट ने इन तमाम बिन्दुओं पर राज्य सरकार को अपना रुख स्पष्ट करने का आदेश दिया है। साथ ही 27 फरवरी को हलफनामा दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने हड़ताल के दो दिनों का वेतन पुलवामा शहीदों के परिवार के सहायतार्थ देने पर हामी भरने के बाद कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों को हलफनामा दाखिल करने को कहा है। मामले की सुनवाई 27 फरवरी को होगी। यह आदेश जस्टिस सुधीर अग्रवाल तथा जस्टिस राजेन्द्र कुमार की खंडपीठ ने कर्मचारी हड़ताल से न्यायिक कार्यवाही में व्यवधान को लेकर कायम जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है।







राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि, नई पेंशन स्कीम केन्द्र सरकार की है जिसे 2004 में लाया गया। राज्य सरकार ने इस योजना को 2005 के बाद नियुक्त कर्मचारियों पर लागू करते हुए अपनाया है। केन्द्र की योजना में राज्य सरकार को बदलाव करने का अधिकार नहीं है। इस पर कोर्ट ने कहा कि योजना बाध्यकारी नहीं थी तो बिना कर्मचारियों की सहमति के राज्य सरकार ने क्यों अपनाया।

Category: News, Uncategorized

About the Author ()

Comments are closed.