Indian Railway to adopt European Train Control System

| February 25, 2019

यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम संभालेगी ट्रेनों की रफ्तार, यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम लेबल-2 के लिए कार्ययोजना मंजूर
यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम की शुरुआत, चार रेल सेक्शनों पर कार्य मंजूर , 640 किमी. पर ईटीसीएस लगाने पर खर्च होंगे 1609 करोड़ रपए85 स्टेशनों और पांच सौ लोको पर लगेंगे उपकरण, ज्यादा ट्रेनें चलेंगी तेज रफ्तार से








गतिमान एक्सप्रेस और वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों के परिचालन से देश में सेमी हाईस्पीड ट्रेनों का दौर शुरू हो गया है। लिहाजा तेज रफ्तार ट्रेनें और उन पर संरक्षा नियंतण्रकी मांग निरंतर बढ़ती जा रही है। ऐसे में रेलवे ने यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (ईटीसीएस) लेबल-2 को अपनाने के लिए बहुत तेजी से कदम बढ़ा दिए हैं। वैसे तो देश के कई रेलमार्गो पर ईटीसीएस लगाने की योजना बन रही है, लेकिन मार्च में चार परियोजनाओं पर ईटीसीएस शुरू होने जा रहा है। 640 किलोमीटर की चार परियोजनाओं पर 1609 करोड़ रपए खर्च होंगे। हालांकि देश में सुरक्षित ट्रेन चलाने के लिए पूरी तरह से ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम पर ट्रेन कोलिजन अवाइडिंग सिस्टम (टीसीएएस) का 160 किलोमीटर की रफ्तार से ट्रायल किया जा रहा है। इस सिस्टम को तीन स्वदेशी कम्पनियों ने विकसित किया है। दरअसल, 160 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से वंदे भारत एक्सप्रेस और गतिमान एक्सप्रेस चलने के बाद देश के अन्य रेलमार्गो पर भी सेमी हाईस्पीड ट्रेनें चलाने का दबाव बढ़ गया है।




लिहाजा मौजूदा रेललाइनों पर ट्रेनों के दबाव के मद्देनजर अत्याधुनिक सिग्नलिंग और संरक्षा पण्राली को लगाया जा रहा है। इससे मौजूदा रेललाइनों पर ज्यादा और सुरक्षित ट्रेनें चलाई जा सकेंगी। इनमें से कुछ ट्रेनें ऐसी भी होंगी, जिसकी रफ्तार 160 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। इसके लिए रेलवे यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम लगाने का काम शुरू दिया गया है। इसके लिए 640 रूट किलोमीटर कर चार परियोजनाएं मंजूर की गई हैं और इन पर करीब 1609 करोड़ रपए की लागत आई है। यह परियोजनाएं झांसी, बीना, नागपुर, येरागुंटाला, रेणुगुंटा, विजियनागरम और पलासा की हैं। इनके लिए गाजियाबाद से मुगलसराय और मथुरा से वडोदरा जैसे रेल सेक्शन पर भी यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम लगाने की योजना है, जिससे ज्यादा से ज्यादा सेमी हाई स्पीड ट्रेनें चलाई जा सकें।




इसके लिए 85 स्टेशनों पर और पांच सौ लोको पर उपकरण लगाए जाएंगे। यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम लगाने के साथ-साथ संरक्षा की दृष्टि से ट्रेन कोलिजन एवाडेन सिस्टम लगाने का काम तेज हो गया है। टीसीएस का 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर दक्षिण मध्य रेलवे के 1199 किलोमीटर पर ट्रायल किया जा रहा है। यह रूट सेक्शन बिदर-परली बैजनाथ-परभानी, मनमाड़-परभानी-नादेड़-सकिंदराबाद-गडवाल-दोन-गुंटाकल सेक्शन हैं। इसमें 159 लोको में भी यह सिस्टम लगाया जाएगा। वास्तव में टीसीएएस का 250 किलोमीटर का सफल ट्रायल रेलवे बोर्ड के चेयरमैन विनोद कुमार यादव जब दक्षिण मध्य रेलवे के महाप्रबंधक थे, तब लिंगमापल्ली-विकाराबाद-वादी-बिदर रेल सेक्शन पर किया गया था। यह 110 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार पर ट्रायल था। हालांकि संरक्षा और तेज रफ्तार के मद्देनजर देशभर के रेललाइनों पर यह सिस्टम लगाया जाना तय है। यह मांग के अनुसार लगातार लगाया जाएगा। 

Category: Indian Railways, News

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