हाईकोर्ट की टिप्पणी – बिना नौकरी सांसदों को पेंशन और नौकरी कर रहे कर्मचारियों को पेंशन नहीं

| February 9, 2019

‘ स्कीम अच्छी को समय पर लागू करे सरकार.

‘ हाईकोर्ट ने 25 फरवरी तक*मांगा जवाब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुरानी पेंशन स्कीम बहाली की मांग को लेकर राज्यकर्मियों की हड़ताल पर राज्य सरकार के रवैये की तीखी आलोचना की है और पूछा है कि बिना कर्मचारियों की सहमति के उनका अंशदान शेयर में सरकार कैसे लगा सकती है। सरकार असंतुष्ट कर्मचारियों से काम कैसे ले सकती है। नई पेंशन स्कीम अच्छी है तो इसे सांसदों व विधायकों की पेंशन पर क्यों नहीं लागू किया जाता।








कोर्ट ने कहा कि सरकार लूट-खसोट वाली करोड़ों की योजना लागू करने में नहीं हिचकती और उनसे 35 साल की सेवा के बाद भी कर्मचारियों को पेंशन नहीं देना चाहती। सरकार को क्या कर्मचारियों को न्यूनतम पेंशन देने का आश्वासन नहीं देना चाहिए। सांसदों, विधायकों को बिना नौकरी के सरकार पेंशन दे रही है तो लंबी नौकरी के बाद कर्मचारियों को क्यों नहीं दे रही।




सांसद विधायक वकालत सहित अन्य व्यवसाय भी कर सकते हैं फिर भी वे पेंशन के हकदार कैसे हैं। कोर्ट ने कहा कि कर्मचारियों की हड़ताल से सरकार का नहीं लोगों का नुकसान होता है। कोर्ट में पेश कर्मचारी नेताओं को कोर्ट ने अपनी शिकायत व पेंशन स्कीम की खामियां का दस दिन में ब्योरा पेश करने व सरकार को इस पर विचार कर 25 फरवरी को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।




यह आदेश न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति राजेन्द्र कुमार की खंडपीठ ने राजकीय मुद्रणालयकर्मियों की हड़ताल से कागजलिस्ट न छपने से न्यायालय प्रशासन को पंगु बनाने पर कायम जनहित याचिका पर दिया है।.

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