उत्तर व पूर्वोत्तर रेलवे की लड़ाई में यात्री परेशान हो रहे हैं। उत्तर रेलवे के अधिकारियों ने पूर्वोत्तर रेलवे की 287 ट्रेनों को सिग्नल नहीं दिया, जिससे ट्रेनें आउटर या रास्ते में रुकी रहीं। इससे ट्रेनें लेटलतीफी की शिकार हो गई। इन ट्रेनों में सवार तकरीबन तीन लाख यात्री रास्ते में फंसे रहे। आए दिन देरी से चल रही ट्रेनों का ब्यौरा खंगाला गया तो यह सच सामने आया। इस मामले में पूर्वोत्तर रेलवे डीआरएम ने उत्तर रेलवे डीआरम को इस बाबत पत्र लिखा है।








रेलवे बोर्ड ने रेलवे के सभी मंडलों को निर्देश दिए थे कि ट्रेनों की समय सारणी सुधारी जाए। इससे यात्रियों को हो रही असुविधा दूर की जा सके। उत्तर व पूर्वात्तर रेलवे के बीच इंटरचेंज प्वाइंट पर ट्रेनों को लाइन क्लियर देने में समस्याएं खड़ी की जा रही है। इसको लेकर पूर्वोतर रेलवे डीआरएम विजयलक्ष्मी कौशिक ने उत्तर रेलवे डीआरएम सतीश कुमार को पत्र लिखा है। इसमें कहा है कि इंटरचेंज प्वॉइंट पर पूर्वोत्तर रेलवे की ट्रेनों को लाइन नहीं मिलने से ट्रेनों की समय सारणी बिगड़ रही है। बीते दिसंबर माह में पूर्वोत्तर रेलवे की 146 मेल-एक्सप्रेस ट्रेनें लेट रहीं।.




समय सारणी की गलत फीडिंग से 24 ट्रेनें लेट : पूर्वोत्तर रेलवे की 146 ट्रेनों को लाइन क्लीयर नहीं मिलने से दस मिनट से अधिक की देरी से पहुंची। वहीं 141 मेल-एक्सप्रेस की टाइमिंग उत्तर रेलवे की वजह से बिगड़ी। 34 ट्रेनों को आउटर पर खड़ा रखा गया और 24 ट्रेनें ऐसी हैं, जो गलत फीडिंग की वजह से लेटलतीफी की शिकार हुईं। .

उत्तर रेलवे के इंटरचेंज प्वॉइंट के चलते पूर्वोत्तर रेलवे की शताब्दी, डबलडेकर, पुष्पक, कैफियत, वैशाली, चेन्नई लखनऊ एक्सप्रेस, राप्तीसागर, चित्रकूट, हमसफर, बाघ, उत्सर्ग, गोरखपुर एलटीटी, गोरखपुर पनवेल, कुशीनगर, अवध एक्सप्रेस आदि ट्रेनों की समय सारणी प्रभावित हो रही है। .




उत्तर रेलवे के डीआरएम सतीश कुमार ने बताया कि लखनऊ मंडल में ट्रेनों की तय समय सारणी को सुधारा जा रहा है। इंटरचेंज प्वॉइंट पर ट्रेनों की गलत टाइमिंग फीड होने की बात सामने नहीं आई है। पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन से ट्रेनों के संचालन पर बातचीत हो रही है, ताकि यात्रियों को ट्रेनों की देरी पर असुविधा न हो।.

लाख यात्रियों को यात्रा के दौरान उठानी पड़ी दिक्कत.

ट्रेनों को सिग्नल नहीं देने का पूर्वोत्तर रेलवे ने लगाया आरोप.