स्मृति शेष : जार्ज के नेतृत्व में हुई हड़ताल से रेलकर्मियों को मिला था बोनस

| January 30, 2019

पूर्व केंद्रीय मंत्री जार्ज फर्नांडिस ने बोनस समेत कई अन्य मांगों को लेकर जार्ज ने देशभर के रेलकर्मियों को एकजुट किया था। हड़ताल से बैक फुट पर आई सरकार ने बोनस का प्रावधान किया था।

पूर्व केंद्रीय मंत्री जार्ज फर्नांडिस के नेतृत्व में ही वर्ष 1974 में भारतीय रेलवे स्तर पर पहली बार रेल हड़ताल हुई थी। बोनस समेत कई अन्य मांगों को लेकर जार्ज ने देशभर के रेलकर्मियों को एकजुट किया था। इस हड़ताल से बैक फुट पर आई केंद्र सरकार ने वर्ष 1979-80 में रेलकर्मियों के लिए बोनस का प्रावधान कर दिया।








जार्ज वर्ष 1973 से 76 तक आल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन (एआइआरएफ) के अध्यक्ष रहे। इस दौरान वे रेलकर्मियों की आवाज बन गए थे। आज भी उनकी आवाज रेलकर्मियों के दिलों में है। वे न सिर्फ रेलकर्मियों के लिए बल्कि जीवन भर देश भर के मजदूरों के लिए संघर्ष करते रहे। उनके संघर्षों की कहानी आज भी नरमू के महामंत्री केएल गुप्त को याद है। बकौल महामंत्री, जार्ज के समय वह एआइआरएफ के कार्यकारी अध्यक्ष हुआ करते थे। जार्ज का जीवन सादगी में बीता। उन्होंने अपना पूरा जीवन कर्मचारियों, मजदूरों, कामगारों और गरीबों के लिए समर्पित कर दिया। वर्ष 2010 में उनसे आखिरी मुलाकात हुई थी। विश्वविद्यालय कार्यक्रम में आए जार्ज ने उन्हें बुलाया था। कुशलक्षेम के साथ एआइआरएफ के बारे में भी जानकारी ली। केएल गुप्त आज भी एआइआरएफ के सहायक महामंत्री हैं।




समाजवाद से ही होगा मुल्क का कल्याण

विवि से सेवानिवृत प्रो. प्रभाशंकर पांडेय ने कहा कि जार्ज फर्नांडीज जब अंतिम बार गोरखपुर आए थे। सुबह मधुकर दीघे की आत्मकथा का विमोचन किया।  शाम को गोरखपुर क्लब में हम लोगों के साथ बैठकर बातचीत की। उसमें एडवोकेट अमरनाथ श्रीवास्तव भी थे जिन्होंने इमरजेंसी के दौरान जार्ज फर्नांडीज की पैरवी निश्शुल्क की थी। अभी चार-पांच साल पहले जब जार्ज फर्नांडीज बहुत बीमार थे तो दिल्ली उनसे मिलने गया था। चलते वक्त उन्होंने मुझसे कहा कि समाजवादी विचार कभी मत छोडऩा। इसी से मुल्क का कल्याण होने वाला है।




डॉ. लोहिया की किताबों का संरक्षण करने की दी सलाह

डॉ. राममनोहर लोहिया पुस्तकालय के सचिव सिद्धार्थ प्रिय उपाध्याय बताते हैं कि मजदूर आंदोलन से निकले संघर्षशील नेता जार्ज फर्नांडीज 2005 में अंतिम बार गोरखपुर आए थे। उन्होंने समाजवादी नेता मधुकर दीघे की आत्म कथा ‘समाजवादी आंदोलन की पथरीली राहेंÓ का विमोचन किया था। मेरे पिता सुभाष उपाध्याय समाजवादी नेता थे, उन्होंने जार्ज फर्नांडीज से मेरी मुलाकात कराई तो उन्होंने डॉ. लोहिया की किताबों का संरक्षण करने की सलाह दी थी। तभी से मैं डॉ. लोहिया की किताबों के संरक्षण की जिम्मेदारी उठा रहा हूं। इसी क्रम में डॉ. राममनोहर लोहिया पुस्तकालय की स्थापना हुई।

एआइआरएफ और नरमू ने दी श्रद्धांजलि

एआइआरएफ और नरमू ने केंद्रीय कार्यालय में शोक सभा आयोजित कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर केएल गुप्त, नवीन कुमार मिश्र, दिलीप धर दूबे, ओंकारनाथ सिंह, विनय श्रीवास्तव, रतन कुमार, आनंद, संजीव भद्रा आदि पदाधिकारी मौजूद थे।

Category: Indian Railways, News

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