रेल हादसे रोकने के लिए आधुनिक सिग्नल प्रणाली को मंजूरी

| January 28, 2019

केंद्र सरकार ने मिशन जीरो एक्सीटेंड लागू कर रेल यात्रा को सुरक्षित बनाने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। इसके तहत 450 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर सिग्नल सिस्टम को आधुनिक बनाने की मंजूरी दे दी है। इसमें पहली बार कई आधुनिक तकनीक का एकीकृत रूप में इस्तेमाल होगा। .

ट्रेन परिचालन के पूर्ण रूप से कंप्यूटरीकृत होने से मानवीय चूक से होने वाले ट्रेन हादसे थम जाएंगे।.








रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि गत सप्ताह 450 किलोमीटर से अधिक लंबे रेलवे ट्रैक पर एकीकृत सिग्नल सिस्टम लगाने की मंजूरी दे दी गई है। इस पर 1200 करोड़ रुपये की लागत आएगी। उन्होंने बताया कि दिल्ली-चेन्नई रूट के झांसी-बीना के बीच 150 किलोमीटर ट्रैक पर सिग्नल सिस्टम को आधुनिक बनाया जाएगा। इसके अलावा रेनिगुंटा सेक्शन (155 किलोमीटर), विजयनगरम सेक्शन (140 किलोमीटर) सहित मध्य रेलवे में आधुनिक सिग्नल सिस्टम लगाया जाएगा।.

उन्होंने बताया कि यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (ईटीसीएस) के अलावा एलटीई बेस्ड मोबाइल ट्रेन रेडियो कम्यूनिकेशन (एमअीआरसी) सिस्टम लगाया जाएगा। .




सुदूर छोटे दो स्टेशनों के बीच (सेक्शन) ट्रेनों-मालगाड़ियों की पता लगाने के लिए डाग्नोस्टिक एंड प्रीटेक्टिव सिस्टम, एडवांस मेनटेंस सिस्टम लगाए जाएंगे। .

यहां आधुनिक तकनीक की मदद से रेलवे ट्रैक, स्टेशन, सिग्नल सिस्टम, इंटरलॉकिंग सिस्टम आदि ऑनलाइन निगरानी हो सकेगी। इसके अलावा समयबद्ध मरम्मत व एडवांस मरम्मत की जरुरत का पता चल सकेगा। यह सिस्टम मानवीय त्रुटि की गुंजाइश समाप्त *कर देगा।.

रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि ईटीसीएस लेवल-1 को ट्रेन प्रोटेक्शन एंड वार्निग सिस्टम (टीपीडब्ल्यूएस) के नाम से जानते हैं। यह 342 किलोमीटर ट्रैक पर लगाया जा चुका है। यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (ईटीसीएस) लेवल-2 है। इसमें वायरेस के जरिए सूचनाएं ट्रेन ड्राइवर को मिलेंगी। यह इंजन के केबिन में लगा सिस्टम आगे चल रही ट्रेन की रफ्तार का अंदाजा स्वत: लगा लेगा। इसके आधार पर स्क्रीन पर ड्राइवर को सिग्नल हरा, पीला या लाल दिखाई देगा। ईटीसीएस आगे दौड़ती ट्रेन की रफ्तार के आधार पर पीछे वाली ट्रेन की गति तय कर देती है।



रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि ईटीसीएस लेवल-1 को ट्रेन प्रोटेक्शन एंड वार्निग सिस्टम (टीपीडब्ल्यूएस) के नाम से जानते हैं। यह 342 किलोमीटर ट्रैक पर लगाया जा चुका है। यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (ईटीसीएस) लेवल-2 है। इसमें वायरेस के जरिए सूचनाएं ट्रेन ड्राइवर को मिलेंगी। यह इंजन के केबिन में लगा सिस्टम आगे चल रही ट्रेन की रफ्तार का अंदाजा स्वत: लगा लेगा। इसके आधार पर स्क्रीन पर ड्राइवर को सिग्नल हरा, पीला या लाल दिखाई देगा। ईटीसीएस आगे दौड़ती ट्रेन की रफ्तार के आधार पर पीछे वाली ट्रेन की गति तय कर देती है।

Category: Indian Railways, News

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