किसानों और मिडिल क्लास पर अंतरिम बजट का होगा फोकस

| January 28, 2019

लो कसभा चुनाव जीतने के मकसद से मोदी सरकार अपने आखिरी बजट में ग्रामीण क्षेत्रों पर भी शहरी इलाकों की तरह ध्यान दे सकती है। यह अंतरिम बजट होगा, लेकिन इसका दायरा हो सकता है कि वोट ऑन एकाउंट की तरह सीमित न हो। एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने बताया कि सरकार पूर्व वित्त मंत्रियों प्रणब मुखर्जी और पी चिदंबरम की बनाई हुई लीक का सहारा ले सकती है, जिन्होंने राहत पैकेज के तहत टैक्स में बदलाव भी किए थे।

यह इस सरकार का छठा बजट होगा। इसमें मिडल क्लास के लिए कुछ टैक्स रियायतें हो सकती हैं। इसके साथ ही किसानों की परेशानी घटाने के लिए कुछ कदमों का ऐलान किया जा सकता है।








अधिकारी ने कहा, ‘इससे पहले भी वित्त मंत्रियों ने अंतरिम बजट में रियायतों की घोषणा की थी।’

एक कृषि पैकेज पर काम किया जा रहा है। इसमें इनकम ट्रांसफर, मिनिमम सपोर्ट प्राइस स्कीम को नरम करने और समय पर चुकाए जाने वाले कृषि कर्ज पर ब्याज माफी सहित कई विकल्प तौले जा रहे हैं। एक अन्य सरकारी अधिकारी ने बताया कि यह चर्चा भी चल रही है कि पैकेज की घोषणा बजट से पहले ही कर दी जाए। अरुण जेटली का इलाज चल रहा है, लिहाजा अंतरिम वित्त मंत्री पीयूष गोयल पहली फरवरी को बजट पेश कर सकते हैं।

एक ठोस प्रस्ताव पर विचार करने के लिए सोमवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक हो सकती है। कई राज्य सरकारों ने कृषि कर्ज माफी की घोषणा की है। केंद्र ने यह संकेत दिया था कि इस तरह के कदमों से किसानों की समस्या दूर नहीं होगी और वह दीर्घकालिक प्रभाव वाले कदमों पर विचार कर रहा है।




2009-10 के लिए अंतरिम बजट पर चर्चा के जवाब में मुखर्जी ने वैश्विक सुस्ती से प्रभावित अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए सर्विस टैक्स और एक्साइज ड्यूटी में 2 प्रतिशत कटौती की घोषणा की थी। वहीं चिदंबरम ने 2014-15 के लिए अंतरिम बजट में सर्विस टैक्स और कस्टम्स ड्यूटी में बदलाव करने के अलावा ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए एक्साइज ड्यूटी में कमी की घोषणा की थी। हालांकि दोनों ने डायरेक्ट टैक्स में बदलाव नहीं किया था।

डेलॉयट, हास्किंस एंड सेल्स के पार्टनर रोहिंग्टन सिधवा ने कहा, ‘किसानों को राहत दिए जाने और पर्सनल टैक्स रेट्स में कमी की संभावना ज्यादा दिख रही है।’ सर्विस टैक्स और सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी (पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स पर टैक्स को छोड़कर) को गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स में शामिल किया जा चुका है। जीएसटी पर निर्णय इससे जुड़ी काउंसिल करती है।




बजट की तैयारी के दौरान मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के लिए कस्टम्स ड्यूटी में बदलाव करने और कुछ राहत देने पर भी विचार किया गया था। डिजिटल ट्रांजैक्शंस बढ़ाने की खातिर इंसेंटिव्स देने और टैक्सपेयर्स के लिए एग्जेम्प्शन लिमिट को बढ़ाकर 3.5 लाख रुपये करने या ज्यादा डिडक्शंस की इजाजत देने पर भी गौर किया गया है।

अरुण जेटली की अनुपस्थिति में अंतरिम वित्त मंत्री पीयूष गोयल बजट पेश कर सकते हैं
सरकार पूर्व वित्त मंत्रियों प्रणब मुखर्जी और पी चिदंबरम की बनाई हुई लीक का सहारा ले सकती है, जिन्होंने राहत पैकेज के तहत टैक्स में बदलाव भी किए थे

Category: Finance Ministry, News

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