स्मार्ट बनेंगे सरकारी ऑफिस, कॉरपोरेट के ढर्रे पर होगा काम

| January 23, 2019

नई दिल्ली : सरकारी दफ्तर कॉरपोरेट की तरह दिखेंगे। काम का ढर्रा भी कॉरपोरेट सरीखा होगा। केंद सरकार ने इसके लिए एक माडॅल तय कर लिया है। कई तरह के पॉयलट प्रोजेक्ट को अंजाम देने के बाद जल्द ही तमाम दफ्तरों के लिए नए मॉडल को अमल में लाया जाएगा। बदलते वक्त के हिसाब से सरकारी दफ्तर किस तरह के हों और वहां कामकाज की संस्कृति कैसी हो, इसे तय करने के लिए केंद्र सरकार ने लगभग 400 अलग-अलग जगहों पर प्रयोग किए थे। दो साल तक चले इन प्रयोगों पर लगभग 50 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च भी आया था। सूत्रों के अनुसार, इस साल कई चरणों में दफ्तरों को स्मार्ट बनाने का काम शुरू हो जाएगा।








जरूरतें बदलीं, ऑफिस नहीं

डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल ऐंड ट्रेनिंग (डीओपीटी) ने यह कवायद एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म के तहत की है। इसके लिए नीति आयोग, शहरी विकास मंत्रालय और एनआईसी से भी रिपोर्ट मांगी गई थी। डीओपीटी का मानना है कि अब ऑफिसों और वहां आने वाले लोगों की जरूरतें बदल गईं हैं। हालांकि ऑफिस नहीं बदला। मसलन, भले तमाम ऑफिसों में कंप्यूटर लगे हों, लेकिन उससे जुड़ी चीजें किस तरह रखी जाएंगी, इसके लिए गाइडलाइंस आज तक नहीं बनी। स्मार्ट ऑफिस में फाइलों के बोझ कम होने के बाद इसके लिए नए सिरे से रेकॉर्ड रखने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।




अधिकारियों के अनुसार, तीस सालों से सरकारी दफ्तरों में खरीद की प्रक्रिया नहीं बदली है। इससे जरूरत के हिसाब से नई चीजों के लिए बजट लेने में बहुत कागजी प्रक्रिया से गुजरना होता था। जैसे फैक्स मशीन की खरीद दफ्तर में आसान है, जबकि प्रिंटर की खरीद प्रक्रिया कठिन। अब इसमें बदलाव कर सुलभ बनाया गया है। मिसाल के तौर पर कई ऐसी चीजें अब भी खरीद की प्रक्रिया में हैं, जो बनती ही नहीं। उनकी भी लिस्टिंग की जा रही है।




फाइलों का फ्लो चार्ट बनेगा

ऑफिस को स्मार्ट बनाने के साथ ही फाइलों के मूवमेंट के लिए भी फ्लो चार्ट बनेगा। इसके तहत एक कर्मचारी के पास किसी फाइल को निबटाने के लिए कितनी समय-सीमा हो, यह तय किया जा रहा है। उस समय-सीमा के बाद यह फाइल अपने-आप ऊपर के अधिकारी के पास चली जाएगी

Category: DOPT, News

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