लार्जेस में अटके मामलों की सूची रेलवे बोर्ड ने मांगी, वन टाइम सेटल करने की योजना

| January 17, 2019

रेलवे बोर्ड ने सभी रेल जोनों से लार्जेस योजना के तहत 27 अक्टूबर 2017 के पूर्व लंबित ऐसे मामलों की रिपोर्ट मांगी है, जिसमें इस योजना के तहत रेल कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति हो चुकी थी व उनके आश्रित बच्चों का मेडिकल व अन्य परीक्षण हो चुका था, किंतु उन्हें नियुक्ति नहीं मिल सकी थी. माना जा रहा है कि रेलवे बोर्ड ऐसे लंबित मामलों को एकमुश्त निराकरण की तैयारी में है. दरअसल इस मामले को डबलूसीआरईयू के महामंत्री मुकेश गालव ने रेलवे बोर्ड के समक्ष उठाया था, उस दौरान एडीशनल मेंबर कार्मिक मनोज पांडेय ने इस मामले में कोई ठोस निर्णय लिये जाने का आश्वासन दिया था.








इस संबंध में पमरे एम्पलाइज यूनियन के महामंत्री मुकेश गालव ने बताया कि रेलवे ने लार्जेस स्कीम को अक्टूबर 2017 में अचानक बंद कर दिया था, जिस समय इस स्कीम को बंद करने की घोषणा की गई थी, उस समय पूरे देश में ऐसे हजारों मामले नियुक्ति के लिए अटके थे, जिनमें से पमरे में 6 सौ मामले थे, जिसमें काफी कर्मचारी रिटायर हो चुके थे, उनके बच्चों का मेडिकल परीक्षण भी हो चुका था, केवल नियुक्ति दी जानी थी, साथ ही ऐसे कई मामले थे, जिनमें कर्मचारियों का रिटायरमेंट मंजूर कर लिया था औैर उनके बच्चों का परीक्षण होना शेष रहा, लेकिन इस स्कीम को बंद किये जाने से यह मामले भी अटक गये थे.




इस मामले को वेस्ट सेंट्रल रेलवे ने एआईआरएफ के माध्यम से रेलवे बोड के समक्ष प्रमुखता से उठाया था. जिस पर 15 जनवरी 2019 को रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे को एक पत्र जारी किया है, जिसमें 27 अक्टूबर 2017 के पूर्व लार्जेस स्कीम के तहत इस तरह के जितने मामले लंबित हैं, उन सभी प्रकरणों की जानकारी मांगी है. माना जा रहा है कि रेलवे बोर्ड पेंडिंग इन मामलों का निराकरण शीघ्र करेगी.

पमरे के 6 सौ से ज्यादा कर्मचारी अधर में अटक गये थे पमरे एम्पलाइज यूनियन के महामंत्री मुकेश गालव ने बताया कि रेलवे बोर्ड के लार्जेस स्कीम समाप्त करने के निर्देश से पश्चिम मध्य रेलवे के जबलपुर, भोपाल व कोटा मंडलों के लगभग 6 सौ कर्मचारी अधर में अटक गये थे, क्योंकि उन्होंने लार्जेस स्कीम के तहत प्रक्रिया पूरी करते हुए आवेदन दिया था और उनके बच्चों की स्क्रीनिंग व मेडिकल टेस्ट भी हो चुका था, सिर्फ रेल कर्मचारी को रिटायरमेंट देकर उनके बच्चों को नियुक्ति प्रदान करना था, एडीशनल मेंबर पर्सनल से मिले थे यूनियन महामंत्री, मिला था आश्वासन इस मामले को लेकर गुरूवार 11 अक्टूबर 2018 को डबलूसीआरईयू के महामंत्री मुकेश गालव नई दिल्ली में रेलवे बोर्ड में एडीशनल मेंबर पर्सनल मनोज पाण्डे से मुलाकात करते हुए पमरे के 6 सौ से अधिक कर्मचारियों के मामले को प्रमुखता से उठाया था.




श्री गालव ने उन्हें बताया कि रेलवे बोर्ड की नई पॉलिसी से पमरे के एक भी कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं मिल सकेगा, क्योंकि जो भी मामले पमरे में पेंडिंग हैं, उसमें लार्जेस स्कीम के तहत रेलकर्मियों के बच्चों का मेडिकल टेस्ट, स्क्रीनिंग पूरी हो चुकी थी, मामले सिर्फ रेलकर्मी को रिटायरमेंट देकर उनके बच्चे को नियुक्ति पत्र प्रदान करना है. श्री गालव ने बताया कि रेलवे बोर्ड के एडीशनल मेंबर पर्सनल मनोज पाण्डे ने उनकी बातों को गंभीरता से लेते हुए आश्वासन दिया था.

Source:- Palpal India

Category: Indian Railways, News

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