7वां वेतन आयोग नहीं पुरानी पेंशन की मांग को लेकर हड़ताल पर देश भर के बिजली कर्मी

| January 8, 2019

नेशनल कोआर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इम्पलॉईस एंड इन्जीनियर्स (एनसीसीओईईई) ने इलेक्ट्रिसिटी (अमेण्डमेंट) बिल 2018 एवं केंद्र व राज्य स्तर पर चल रही निजीकरण की कार्यवाही के विरोध तथा पुरानी पेंशन की मांग को ले कर देश भर में हड़ताल करने का निर्णय लिया है.

नेशनल कोआर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इम्पलॉईस एंड इन्जीनियर्स (एनसीसीओईईई) ने इलेक्ट्रिसिटी (अमेण्डमेंट) बिल 2018 एवं केंद्र व राज्य स्तर पर चल रही निजीकरण की कार्यवाही के विरोध तथा पुरानी पेंशन की मांग को लेकर देश भर में हड़ताल करने का निर्णय लिया है. देश के लगभग 15 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर 8 और 9 जनवरी को दो दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल में हिस्सा लेंगे. हड़ताल का निर्णय देश भर की सभी ट्रेड यूनियनों की संयुक्त बैठक में लिया गया था और इसकी नोटिस भी केंद्र सरकार व सभी राज्य सरकारों को भेज दी गयी है. विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के आह्वान पर प्रदेश के सभी ऊर्जा निगमों के तमाम कर्मचारी व इन्जीनियर 08 व 09 जनवरी को हड़ताल करेंगे.








हड़ताल पर जाएंगे कर्मचारी
संघर्ष समिति ने यह भी एलान किया है कि यदि इलेक्ट्रिसिटी (अमेण्डमेंट) बिल 2018 को संसद के शीतकालीन सत्र में पारित कराने की कोशिश हुई तो बिना और कोई नोटिस दिए देश भर के बिजली कर्मचारी व् इंजीनियर उसी समय बिजली की सप्लाई बंद कर हड़ताल पर चले जाएंगे. संघर्ष समिति ने कहा है कि बिजली उत्पादन के क्षेत्र में निजी घरानों के घोटाले से बैंकों का ढाई लाख करोड़ रुपये पहले ही फंसा हुआ है फिर भी निजी घरानों पर कोई कठोर कार्यवाही करने के बजाय केंद्र सरकार नए बिल के जरिये बिजली आपूर्ति निजी घरानों को सौंप कर और बड़े घोटाले की तैयारी कर रही है.




समाप्त हो जाएगी सब्सीडी
समिति के अनुसार बिल पारित हो गया तो सब्सिडी और क्रास सब्सिडी तीन साल में समाप्त हो जाएगी जिसका सीधा अर्थ है कि किसानों और आम उपभोक्ताओं की बिजली महंगी हो जाएगी जबकि उद्योगों व व्यावसायिक संस्थानों की बिजली दरों में कमी की जाएगी. उन्होंने कहा कि संशोधन के अनुसार हर उपभोक्ता को बिजली लागत का पूरा मूल्य देना होगा जिसके अनुसार बिजली की दरें 10 से 12 रु प्रति यूनिट हो जाएंगी.

बढ़ेगी सराकरी कंपनियों की मुश्किल
बिल के अनुसार बिजली वितरण और विद्युत् आपूर्ति के लाइसेंस अलग अलग करने तथा एक ही क्षेत्र में कई विद्युत् आपूर्ति कम्पनियाँ बनाने का प्राविधान है. बिल के अनुसार सरकारी कंपनी को सबको बिजली देने (यूनिवर्सल पावर सप्लाई ऑब्लिगेशन) की अनिवार्यता होगी जबकि निजी कंपनियों पर ऐसा कोई बंधन नहीं होगा. स्वाभाविक है कि निजी आपूर्ति कम्पनियाँ मुनाफे वाले बड़े वाणिज्यिक और औद्योगिक घरानों को बिजली आपूर्ति करेंगी जबकि सरकारी क्षेत्र की बिजली आपूर्ति कंपनी निजी नलकूप, गरीबी रेखा से नीचे के उपभोक्ताओं और लागत से कम मूल्य पर बिजली टैरिफ के घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति करने को विवश होगी और घाटा उठाएगी.




बिजली बोर्डों को खत्म किया जाना गलत निर्णय
समिति के पदाधिकारियों के अनुसार घाटे के नाम पर बिजली बोर्डों के विघटन का प्रयोग पूरी तरह असफल साबित हुआ है. संघर्ष समिति की मुख्य माँग इलेक्ट्रिसिटी (अमेण्डमेंट) बिल को वापस लेना, इलेक्ट्रिसिटी ऐक्ट 2003 की पुनर्समीक्षा और राज्यों में विघटित कर बनाई गयी बिजली कंपनियों का एकीकरण कर बिजली उत्पादन, पारेषण और वितरण का केरल और हिमाचल प्रदेश की तरह एक निगम बनाना है. उल्लेखनीय है कि केरल में बिजली उत्पादन, पारेषण और वितरण का एक निगम केरल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड लिमिटेड और हिमाचल प्रदेश में हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड लिमिटेड कार्य कर रहा है.

निजीकरण का होगा विरोध
बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की अन्य मांगे विद्युत् परिषद् के विघटन के बाद भर्ती हुए कर्मियों के लिए पुरानी पेंशन प्रणाली, समान कार्य के लिए समान वेतन, ठेकेदारी प्रथा समाप्त कर नियमित प्रकृति के कार्यों हेतु संविदा कर्मियों को वरीयता देते हुए तेलंगाना की तरह नियमित करना, बिजली का निजीकरण पूरी तरह बंद करना और प्राकृतिक संसाधनों को निजी  घरानों को सौंपना बंद करना मुख्य हैं. समिति के अनुसार इलेक्ट्रिसिटी संविधान की समवर्ती सूची में है और राज्य का विषय है किन्तु यदि इलेक्ट्रिसिटी (अमेण्डमेंट) बिल पारित हो गया तो बिजली के मामले में केंद्र का वर्चस्व बढ़ेगा और राज्यों की शक्ति कम होगी इस दृष्टि से भी जल्दबाजी करने के बजाये संशोधन बिल पर राज्य सरकारों, बिजली उपभोक्ताओं और बिजली कर्मचारियों की राय ली जानी चाहिए.

दिल्ली सरकार ने लगाई रोक
दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने बिजली आपूर्ति व वितरण को आवश्यक सेवा बताते हुए राष्ट्रीय राजधानी में बिजली कर्मचारियों की प्रस्तावित हड़ताल से पहले कदम उठाते हुए आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून (एस्मा) लागू कर दिया है. बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों ने अपनी मांगों को लेकर आठ या नौ जनवरी को एक दिवसीय हड़ताल की योजना बनाई थी. उनकी सेंट्रल ट्रेड यूनियनों की देशव्यापी दो दिवसीय हड़ताल में एक दिन शामिल होने की योजना थी. दिल्ली सरकार की ओर से शुक्रवार को जारी अधिसूचना के अनुसार, दिल्ली के उपराज्यपाल द्वारा बिजली कर्मचारियों, इंजीनियरों (बीएसईएस, बीएसईएस यमुना और टाटा पॉवर) की हड़ताल पर छह महीने की अवधि के लिए रोक लगाई जाती है. अधिकारियों के अनुसार, सभी तीन बिजली वितरण कंपनियों ने दिल्ली सरकार के बिजली विभाग को पत्र लिखकर उनसे प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी हड़ताल के मद्देनजर एस्मा लागू करने की मांग की थी. बिजली वितरण कंपनियों ने पत्र में कहा, “यह जरूरी है कि एस्मा के तहत आवश्यक प्रावधान आठ जनवरी की हड़ताल से पहले लागू किया जाए, क्योंकि हड़ताल से आवश्यक सेवा पूरी तरह ठप हो सकती है और दिल्ली के सभी निवासियों का जीवन प्रभावित हो सकता है. “

Category: News, Seventh Pay Commission

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