AC कोच में बिना आईडी सवारी मिलने पर TTE पर बैठ सकती है जांच

| January 1, 2019

एसी कोच में अपना ‘हिसाब’ बनाकर सवारी बैठाना यात्रा टिकट परीक्षक यानी ट्रेवलिंग टिकट एग्जामनर (टीटीई) को महंगा पड़ सकता है। कोच में अगर चोरी या अन्य कोई आपराधिक वारदात होती है और जांच में सामने आता है कि एसी कोच में बिना आइडी के कोई सवारी सफर कर रही थी तो ऐसी स्थिति में टीटीई भी जांच के दायरे में होंगे। जीआरपी के आला अधिकारी इस बाबत प्रस्ताव बनाकर रेलवे अधिकारियों को भेज चुके हैं।








मंडल स्तर पर इस प्रस्ताव पर सकारात्मक प्रतिक्रिया रही है। जल्द ही इसे रेलवे बोर्ड को भेजा जाएगा। बोर्ड से हरी झंडी मिलने पर इसे देशभर में लागू किया जा सकता है। मुरादाबाद मंडल के जीआरपी थानों में पिछले काफी समय से ट्रेनों में चोरी होने के मुकदमा दर्ज हो रहे थे। समीक्षा में सामने आया कि साधारण या स्लीपर कोच ही नहीं, चोरों ने एसी कोच में भी मुसाफिरों को निशाना बनाया था।




सेकंड और फर्स्ट एसी के वीआइपी मुसाफिर भी चोरों ने नहीं छोड़े थे। जीआरपी ने अलग-अलग मामलों में छानबीन की तो पता चला कि कई ऐसे मामले थे, जिसमें एसी कोच के रिजर्व मुसाफिरों के अलावा अन्य लोगों ने भी सफर किया था। ये वो लोग थे, जो जनरल टिकट लेकर एसी कोच में चढ़े और टीटीई से टिकट का डिफ्रेंस यानी पेनाल्टी बनवाकर एसी कोच में सफर कर लिया।




अक्सर टीटीई जनरल या स्लीपर टिकट होने पर पेनाल्टी लेकर एसी कोच में सफर करा देते हैं। ऐसे लोग मौका पाकर अपराध कर बैठते हैं। एसपी रेलवे मुरादाबाद मंडल एससी दुबे एसी कोच में चोरी के कई मामले चेक किए। इसमें बिना आइडी जमा कराए महज पेनाल्टी लेकर सफर कराने की बात सामने आईं। अब टीटीई को भी जांच में शामिल किया जाएगा।

Category: Indian Railways, News

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