रेलवे के टिकट चेकिंग स्टाफ को रनिंग भत्ता मिलेगा

| December 18, 2018

ट्रेन में चलने वाले गार्ड और लोको पायलट की तरह अब टीटीई को भी भत्ता मिलेगा। रेलवे ने इसके लिए एक सर्कुलर जारी किया है। इसके लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाई गई है। कमेटी अपनी रिपोर्ट तीन महीने में रेलवे बोर्ड को सौंपेगी। जिसके आधार पर यह निर्णय होगा कि टिकट चेकिंग स्टाफ को भत्ता मिलेगा या नहीं। .








काफी लंबे समय से चली आ रही टीटीई की इस मांग को रेलवे ने अब मान लिया है। इसके लिए रेलवे ने एक कमेटी का गठन किया है। मजदूर यूनियन के सहायक महासचिव एमके मल्होत्रा ने कहा कि बोर्ड के इस आदेश से टिकट चेकिंग स्टाफ को काफी राहत मिलेगी।.

इंडियन रेलवे टिकट चेकिंग स्टाफ ऑर्गेनाइजेशन (आईआरटीएसओ) से मिली जानकारी के अनुसार 5 सितंबर को संगठन की ओर से मंथन नाम से एक कार्यक्रम हुआ था। इसमें संगठन के पदाधिकारियों ने 109 सांसदों से टीटीई को रनिंग भत्ता दिया जाने का पत्र लिखवाकर रेलवे बोर्ड अध्यक्ष अश्विनी लोहानी को सौंपा था, जिसे रेल भवन भेजा गया। रेल भवन में इतने सांसदों के पत्र के बाद निर्णय लेते हुए इस पर कमेटी बनाकर रिपोर्ट मांगी गई है।




Indian Railways: कोच अटेंडेंट्स ही बेच रहे कंबल और करोड़ों की चोरी का आरोप यात्रियों पर! स्टिंग में पर्दाफाश

इससे पहले रेलवे ने 2017-18 के दौरान ट्रेनों के एसी डब्बों से लाखों तौलिया, चादर और कंबल गायब होने की बात कही थी। उस दौरान रेल अधिकारियों ने अपने कोच सहायकों का हवाला देते हुए कहा था कि यात्री अपनी यात्रा खत्म होने के बाद सामान लेकर चलते बनते हैं।

रेलवे ने पिछले फाइनेंशियल ईयर में करोड़ों रुपये के बेड-रोल चोरी होने के आरोप लगाए थे। तब गायब हुए सामान का शक यात्रियों पर किया गया, लेकिन अब ऐसा वाकया सामने आया है, जिसने रेलवे के दावे का पूरा पहलू ही बदलकर रख दिया है। अब जो हकीकत सामने आई है उसमें यात्री नहीं बल्कि असल गुनहगार कोच अटेंडेंट हैं। दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक एसी कोच में मिलने वाला कंबल उसके अटेंडेंट ही चोरी करके बेच रहे हैं। एक कंबल 400 रुपये में खुलेआम बेचा जा रहा है। इससे पहले रेल महकमा का कहना था कि वातानुकूलित (एसी) कोच से 14 करोड़ रुपये के चादर, कंबल और तकिया जैसे सामान चोरी हो गए।




भास्कर के मुताबिक उसने 9 से 12 दिसंबर के बीच सरयू-यमुना, रांची- जयनगर और टाटा-छपरा एक्सप्रेस में पड़ताल की। इस दौरान एसी कोच के अटेंडेंट महज 400 रुपये में कंबल बेचते हुए बेनकाब हुए। रिपोर्ट के मुताबिक सरयू-यमुना एक्सप्रेस के कोच अटेंडेंट ने 8 सौ रुपये में दो कंबल दे दिए। जबकि टाटा-छपरा के अटेंडेंट ने 1000 रुपये में तीन कंबल बेच डाले। रांची-जयनगर एक्सप्रेस के अटेंडेंट ने 2400 रुपये में 6 कंबल दिए।

गौरतलब है कि इससे पहले रेलवे ने 2017-18 के दौरान ट्रेनों के एसी डब्बों से लाखों तौलियां, चादर और कंबल गायब होने की बात कही थी। इनमें 46,515 कंबल, 4,71,007 चादर और 2,14,952 तकिया गायब होने का दावा किया गया। रेलवे ने इसके अलावा शौचालयों के मग, शीशे और यहां तक कि फ्लश-पाइप गायब होने की बात कही थी। उस दौरान रेल अधिकारियों ने इसका शक यात्रियों पर जाहिर किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अधिकारियों ने यह आरोप कोच अटेंडेंट्स के हवाले से लगाए थे। तब कोच सहायकों ने अपने अधिकारियों को बताया था कि यात्रा पूरी करने के बाद यात्री कंबल, चादर और तौलिया चुराकर ले जाते हैं।

Category: Indian Railways, News

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