न्यूनतम मजदूरी लागू कराने को सरकार ने कसी कमर श्रम विभाग का अभियान दस से

| December 5, 2018

न्यूनतम मजदूरी लागू कराने को सरकार ने कसी कमर, श्रम विभाग का अभियान दस से 

सरकार का श्रम विभाग सभी श्रमिकों को बढ़ी हुई न्यूनतम मजदूरी दरों से भुगतान सुनिश्चित करने के लिए 10 दिसम्बर से शुरू कर दस दिनों का एक विशेष अभियान चलाएगा। इसके तहत श्रम विभाग के सभी जिलों में प्रवर्तन टीम बनाई जाएंगी। जिसमें सहायक श्रमायुक्त, श्रम अधिकारी, निरीक्षण अधिकारी, कंपनी निरीक्षक और श्रम निरीक्षक के नेतृत्व में विभिन्न कारखानों व कंपनियों का निरीक्षण किया जाएगा।








मंगलवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में श्रम मंत्री गोपाल राय ने कहा कि इस विशेष अभियान के अंतर्गत सभी जिला संयुक्त आयुक्तों व उपायुक्तों को यह आदेश दिया गया कि वे अपने जिले के नियोक्ताओं के साथ बैठकें कर उनसे न्यूनतम मजदूरी की बढ़ी हुई दरों को लागू कराए साथ ही उन्हें न्यूनतम मजदूरी के उल्लघंन पर दिल्ली सरकार द्वारा न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 2017 में किए गए कड़े प्रावधानों से अवगत करवाएं। इसके पूर्व 31 अक्टूबर के उच्चतम न्यायालय के आदेश के द्वारा बढ़ी हुई न्यूनतम मजदूरी दरों का समाचार पत्रों के माध्यम से प्रचार किया गया है।




अब एक नवम्बर से अकुशल श्रमिक का वेतन 14 हजार रपए प्रतिमाह ( 538 रपए प्रतिदिन), अर्धकुशल श्रमिक का वेतन 15,400 रपए प्रतिमाह ( 592 रपए प्रतिदिन) व कुशल श्रमिक का वेतन 16,962 रपए प्रतिमाह (692 रपए प्रतिदिन) है। उन्होंने बताया कि दिल्ली सरकार द्वारा न्यूनतम मजदूरी संशोधन अधिनियम 2017 लागू किया गया है। अब न्यूनतम मजदूरी का भुगतान न करने वाले नियोजकों पर 50 हजार रपए का जुर्माना या तीन वर्ष की जेल या दोनों का दंड एक साथ लगाया जा सकता है। सभी नियोजको को यह आदेश दिया गया है कि वेतन का भुगतान चेक द्वारा या सीधे बैंक ट्रांसफर द्वारा श्रमिकों के खाते में किया जाए।




श्रम मंत्री ने बताया कि जिन श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी नहीं मिल रही है, वे श्रमिक हेल्प लाइन 155214 पर अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं जिन पर श्रम विभाग द्वारा आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही न्यूनतम मजदूरी न देने वाले नियोक्ताओं के विरुद्ध शिकायत संबंधित जिला श्रम कार्यालय में दर्ज कराई जा सकती है। श्रम निरीक्षकों द्वारा शिकायतों के आधार पर नियोक्ताओं के रिकार्ड की जांच उनकी फैक्टरी या कार्यालय में की जाती है।

इस जांच के आधार पर श्रमिकों को संबंधित उप श्रमायुक्त के समक्ष अर्धन्यायिक प्रक्रिया के अंतर्गत दावा करने की सलाह दी जाती है। यदि नियोक्ता कोई रिकार्ड प्रस्तुत नहीं कर पता है तो मेट्रोपालिटन मजिस्ट्रेट के न्यायालय में उनका चलान लगाया जाता है। इसके अतिरिक्त उनके द्वारा प्रस्तुत रिकार्ड के आधार पर न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के प्रावधानों के उल्लघंन के लिए चालान मेट्रोपालिटन मजिस्ट्रेट के न्यायालय में दर्ज करवाई जाती है।

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