तबादले में खेल पर रेल मंत्री को करना पड़ा हस्तक्षेप, अफसराें से जवाब तलब

| December 3, 2018

रेलवे में तबादलों के खेल पर रेल मंत्री पीयूष गोयल ने भी संज्ञान लिया है। रेलवे में अन्‍य कर्मियों के तबादले समय-समय पर होते रहते हैं, लेकिन कई अधिकारी अरसे से विभिन्‍न पदों पर जमे हुए हैं। इस पर रेल मंत्री पीयूष गोयल सख्त हो गए हैं। उन्होंने केंद्रीय सतर्कता आयोग की गाइड लाइन के अनुसार तबादला नहीं होने पर सभी महाप्रबंधकों से जवाब-तलब किया है और 3 दिसंबर तक रिपोर्ट देने को कहा है। 30 नवंबर को रेलवे बोर्ड से जारी आदेश को लेकर हड़कंप मचा हुआ है।








केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने अफसरों और कर्मचारियों का हर चार साल में तबादला करने के निर्देश दे रखे हैं। इस आधार पर रेलवे बोर्ड ने तबादला पॉलिसी बनाकर सभी महाप्रबंधकों को पहले से हिदायत दे रखी है। इसके बावजूद अफसर मलाईदार पदों पर जमे हुए हैं। कार्यकाल पूरा होने के बावजूद उन्हें हटाया नहीं गया है। तबादला होता भी है तो वे रुकवा लेते हैं।




मालूम हो कि 28 नवंबर को रेल मंत्री की बैठक में भी यह मुद्दा उठा था। इस पर उन्होंने संवेदनशील पदों से अधिकारी का तबादला पॉलिसी के अनुसार होने की इच्छा जताई थी। उसके बाद रेलवे बोर्ड द्वारा जारी आदेश में 11 अगस्त 2008 और 18 फरवरी 2009 को जारी तबादला आदेशों का भी जिक्र किया गया है।




अंबाला मंडल की बात करें तो भारतीय रेल यातायात सेवा (आइआरटीएस) और एसीएम (असिस्टेंट कॉमर्शियल मैनेजर) रैंक के एक अधिकारी का कार्यकाल पूरा होने के बावजूद तबादला नहीं किया गया। एसीएम छह साल से यहां बैठे हैं, जबकि उत्तर रेलवे के मुख्य वाणिज्य प्रबंधक (सीसीएम) दो बार उसके तबादले के आदेश दे चुके हैं। नियमों के अनुसार एक शहर में अधिकारी का कार्यकाल दस साल से अधिक नहीं होना चाहिए, जबकि दिल्ली में अधिकारी 20-20 साल से एक ही पद पर डटे हैं।

Source:- Jagran

Category: Indian Railways, News

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