केंद्र सरकार की कर्मचारी व मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ जनवरी में देशव्यापी हडताल

| November 26, 2018

केंद्र सरकार की कर्मचारी व मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ  हिमाचल प्रदेश की सभी यूनियनें राष्ट्रव्यापी हड़ताल के आह्वान के तहत 8 व 9 जनवरी 2019 को दो दिवसीय हड़ताल करेंगी। इसके तहत 8 जनवरी को सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन होंगे। इसके अलावा 9 जनवरी को ब्लॉक व तहसील स्तर पर प्रदर्शन किए जाएंगे। यह निर्णय केंद्रीय ट्रेड यूनियनों व राष्ट्रीय फैडरेशन की दो दिवसीय कालीबाड़ी में हो रही बैठक में लिया गया। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों व कर्मचारी फैडरेशन ने संयुक्त रूप से कहा कि केंद्र सरकार पूंजीपतियों के इशारे पर कठपुतली की तरह कार्य कर रही है।








यह सरकार मजदूरों के 44 श्रम कानूनों को खत्म करने की साजिश रच रही है। बीमा, बी.एस.एन.एल., बैंक, रक्षा, परिवहन व बिजली आदि क्षेत्रों का निजीकरण व विनिवेश किया जा रहा है। पूंजीपतियो के क र्जे माफ  किए जा रहे हैं जबकि गरीब किसानों को आत्महत्या के लिए मजबूर किया जा रहा है।




कर्मचारियों की पक्की नौकरी को खत्म करके कान्ट्रैक्ट प्रणाली को लागू किया जा रहा है। बैठक में वक्ताओं ने मांग की है कि बढ़ती महंगाई व सातवें वेतन आयोग की सिफरिशों के मध्यनजर मजदूरों का न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपए किया जाए। स्कीम वर्कर्ज को 45वें व 46वें श्रम सम्मेलन की सिफारिश अनुसार रैगुलर सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए।

सार्वजनिक क्षेत्र का निजीकरण व विनिवेश बंद किया जाए। पैट्रोल, डीजल, रसोई गैस व खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाई जाए। श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी संशोधनों पर रोक लगाई जाए। आऊटसोर्स व कान्ट्रैक्ट की जगह स्थायी रोजगार दिया जाए तथा समान कार्य के लिए समान वेतन दिया जाए।




नई पैंशन नीति को खत्म कर सब कर्मचारियों के लिए पुरानी पैंशन नीति बहाल की जाए। असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए सामाजिक सुरक्षा का उचित प्रबंध किया जाए। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों व राष्ट्रीय फैडरेशनों के संयुक्त आह्वान पर कालीबाड़ी हाल शिमला में आयोजित राज्य स्तरीय अधिवेशन में सीटू, एटक, एन.जैड.आई.ई. सहित अन्य संगठनों से लगभग 300 मजदूरों व कर्मचारियों ने भाग लिया।

Category: News, Seventh Pay Commission

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