रेलवे के इन कर्मचारियों को मिलेगी पदोन्नति, रेलवे बोर्ड ने कई अन्य महत्वपूर्ण कार्यों के लिए भी बजट पारित किया

| November 25, 2018

रेलवे बोर्ड ने रेल फार्मासिस्ट और निजी सचिव-1 को नाॅन फंक्शनल प्रमोशन देने की मांग मानते हुए आदेश जारी किए हैं। एनएफआईआर व डब्ल्यूसीआर एमएस करीब 12 साल से यह मांग करते आ रहे थे। वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ के मंडल सचिव अब्दुल खालिक ने बताया कि रेलवे हॉस्पिटल में दवाइयों का संग्रहण और वितरण करने वाले फार्मासिस्ट और प्रशासनिक सेवा में लगे निजी सचिव-1 (पर्सनल स्टेनो-1) को नाॅन फंक्शनल पदोन्नति देने की लड़ाई 12 साल से चल रही थी।








संघ के प्रवक्ता विमल मित्तल ने बताया कि विगत दिनों रेलवे बोर्ड ने एनएफआईआर/वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ की इस मांग पर निर्णय देते हुए फार्मासिस्ट को ग्रेड पे 4200 और पीएस-1 को ग्रेड पे 5400 नाॅन फंक्शनल आधार पर देने के आदेश जारी कर दिए हैं। उधर, वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ के मंडल सचिव अब्दुल खालिक ने बताया कि वरिष्ठ मंडल वित्त प्रबंधक कोटा से हुई वार्ता में तय हुआ कि लंबे समय से खराब पड़ी रेलवे कॉलोनी में अंडर ब्रिज से लेकर रेलवे सुरक्षा बल ट्रेनिंग सेंटर लोको के मध्य की मुख्य सड़क के नवीनीकरण के लिए 80 लाख का बजट पारित कर शीघ्र ही निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा।




जर्मन सरकार ने सौंपी रेलवे बोर्ड को व्यवहार्यता रिपोर्ट, मंजूरी मिली तो वर्ष-2030 में दौडऩे लगेगी हाई स्पीड ट्रेन

बेंगलूरु. चेन्नई और मैसूरु के बीच रेल यात्रा के समय में करीब 5 घंटे की कटौती हो सकती है। जर्मन सरकार द्वारा दोनों शहरों के बीच प्रस्तावित हाई स्पीड रेल नेटवर्क परियोजना को अगर रेलवे बोर्ड की मंजूरी मिलती है तो वर्ष-2030 में चेन्नई और मैसूरु के बीच का सफर मात्र दो घंटे में पूरा हो जाएगा जिसके लिए अभी न्यूनतम सात घंटे का समय लगता है।
गुरुवार को जर्मनी के राजदूत मार्टिन नेई ने नई दिल्ली में रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष अश्विनी लोहानी को 435 किलोमीटर के चेन्नई-मैसूरु वाया बेंगलूरु रूट के लिए व्यवहार्यता अध्ययन रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में 320 किमी प्रति घंटे की अधिकतम गति के साथ 435 किलोमीटर की दूरी को तय करने की परिकल्पना की गई है जिसके परिणामस्वरूप चेन्नई और मैसूर के बीच वर्तमान सात घंटों का सफर मात्र दो घंटे और बीस मिनट में पूरा होने का दावा किया गया है। नेई ने कहा कि जर्मन सरकार द्वारा कमीशन और वित्त पोषण दोनों पर अध्ययन किया गया था। यह रेल मार्ग न केवल बेहद व्यवहार्य पाया गया, बल्कि ट्रैफिक विकास को प्रबंधित करने का सबसे प्रभावी समाधान भी साबित हुआ है।




उन्होंने कहा कि परियोजना के लिए ढांचागत निर्माण पर करीब 1 लाख करोड़ रुपए की अनुमानित लागत आएगी जबकि रोलिंग स्टोक पर करीब 150 करोड़ का खर्च होगा। रिपोर्ट के अनुसार चेन्नई-अरकोणम-बेंगलूरु-मैसूरु हाई स्पीड रूट का 85 प्रतिशत भाग एलीवेटेड होगा जबकि 11 प्रतिशत भाग भूमिगत होगा। इसके तहत चेन्नई और बेंगलूरु के बीच यात्रा समय 100 मिनट में जबकि बेेंगलूरु और मैसूरु के बीच यात्रा समय 40 मिनट में पूर्ण होगा। लोहानी के अनुसार अगर चेन्नई-बेेंगलूरु-मैसूरु का सफर रेल से मात्र 2 घंटे 20 मिनट में पूरा होगा तो हवाई यात्रियों की एक बड़ी संख्या रेल सफर को तरजीह दे सकती है।

इससे इस रूट पर पर्याप्त संख्या में यात्री मिल सकते हैं। साथ ही आम यात्रियों का सफर भी ज्यादा बेहतर होगा और कम समय में उनकी यात्रा पूरी होगी। अगर इस प्रस्ताव को रेलवे बोर्ड की मंजूरी मिलती है तो प्लानिंग अवधि के लिए तीन वर्ष का समय चाहिए जबकि निर्माण अवधि के लिए नौ वर्ष का समय लगेगा। इस प्रकार वर्ष-2030 तक परिचालन आरंभ हो सकता है। चेन्नई-मैसूरु के अतिरिक्त हाई स्पीड रेल नेटवर्क के लिए देश के अन्य शहरों के बीच व्यवहार्यता अध्ययन जारी है। इसमें नई दिल्ली-मुम्बई, मुम्बई-चेन्नई, दिल्ली-कोलकाता, दिल्ली-नागपुर और मुम्बई-नागपुर रूट शामिल है।

Category: Indian Railways, News

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