रेलवे को कर्मचारियों के लिए नियम बनाने की आजादी – सुप्रीम कोर्ट

| November 11, 2018

रेलवे बजट का भले ही भारत सरकार के बजट में विलय कर दिया गया है। लेकिन रेलवे को कर्मचारियों के लिए नियम-कायदे बनाने की आजादी है। इस मामले में केंद्र कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता। सुप्रीम कोर्ट ने प्रमोटी और डायरेक्ट भर्ती कर्मचारियों के मामले में यह व्यवस्था दी। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि रेलवे, केंद्र सरकार के डीओपीटी (कार्मिक तथा प्रशिक्षण विभाग) के नियमों से बाध्य नहीं है। यह अपने कर्मचारियों के लिए नियम तथा सेवा शर्तें बनाने के लिए स्वतंत्र है। जस्टिस मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने यह व्यवस्था देते हुए कहा कि रेलवे स्थापना मैन्युअल (आईआरईएम) में कानूनी बल है और यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत रेलवे को शक्तियां प्रदान करता है।









यह है मामला 

मामला रेलवे के समूह ए की सिग्नल इंजीनियर सेवा का है। इसमें 50 फीसदी भर्ती सीधे होती है तथा शेष प्रमोशन के जरिए होती है। इस मामले में आरके कुशवाहा को सीधे सिग्नल इंजीनियर भर्ती किया गया और उनके साथ ग्रुप बी से प्रमोट हुए सिग्नल इंजीनियरों को वरिष्ठता दी गई। रेलवे नियमों के अनुसार यह वरिष्ठता उन्हें पूर्व सेवा के कारण दी गई। कुशवाहा ने इसे पटना कैट में चुनौती दी और कहा कि डीओपीटी के नियमों के अनुसार उन्हें वरिष्ठता मिलनी चाहिए। कैट ने रेलवे चेयरमैन से कहा कि इस मामले को देखें। पूर्व रेलवे चेयरमैन ने कुशवाहा की अर्जी खारिज कर दी और कहा कि प्रमोटियों की वरिष्ठता आईआरईएम-1 के प्रावधानों, जिन्हें अनुच्छेद 309 के अनुसार राष्ट्रपति की मंजूरी है, के तहत तय की गई है।




डीओपीटी सर्कुलर जारी नहीं कर सकता

पीठ ने कहा कि रेलवे को विशेष रूप से डीओपीटी को आवंटित बिजनेस से बाहर रखा गया है। चाहे यह पोस्टों का वर्गीकरण हो, क्लर्कियल स्टाफ की भर्ती हो, गैरभारतीयों की सिविल पोस्टों पर नियुक्ति हो, सेवा शर्त की निर्धारण हो, आचार नियमन हों, छंटनी और अस्थायी पदों का पुनरीक्षण हो आदि। इस मामले में डीओपीटी रेलवे को कोई बाध्यकारी सर्कुलर जारी नहीं कर सकता।




खर्च और राजस्व भी स्वायत्त 

कोर्ट ने कहा कि रेलवे को कार्य आवंटन नियम, 1961 के तहत शक्ति दी गई है कि वह सभी मामलों, जिनमें राजस्व और खर्च शामिल है, से निपटेगा। इसलिए रेलवे को अधिकार है कि वह कर्मचारियों की सेवा शर्तों में निधार्रण करे।

Category: Indian Railways, News

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