पेंशन की टेंशन: OPS और NPS के बीच अधर में यूपी सरकार, कर्मचारी हड़ताल पर अड़े

| October 23, 2018

एनपीएस के विरोध के बीच सरकार की तरफ पिछले दिनों ‘काम नहीं तो वेतन नहीं’ का फरमान जारी किया गया. इससे कर्मचारी संगठन और शिक्षक आदि भड़क गए हैं

उत्तर प्रदेश में पुरानी पेंशन व्यवस्था (ओपीएस) की बहाली को लेकर कर्मचारियों से बातचीत में सरकार को सफलता हाथ नहीं लग सकी है. कर्मचारी नई पेंशन स्कीम (एनपीएस) के विरोध में लगातार 25 से 27 तक तीन दिन की हड़ताल में अड़े हुए हैं. उधर प्रदेश सरकार ने कर्मचारियों पर हड़ताल पर न जाने के लिए दबाव बढ़ा दिया है. मामले में पिछले दिनों ‘काम नहीं तो वेतन नहीं’ का फरमान जारी किया गया. इससे कर्मचारी संगठन और शिक्षक आदि भड़क गए हैं.

उधर अटेवा पेंशन बचाओ मंच के प्रदेश मीडिया प्रभारी राजेश यादव कहते हैं कि 25 से 27 अक्टूबर तक कर्मचारी, शिक्षक अधिकारी पुरोनी पेंशन बहाली मंच हड़ताल करेगी. इसके बाद हम राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली अभियान के तहत यूपी और देश के सभी सांसदों के आवास पर जाकर एक दिन का उपवास रखेंगे.








सरकार की तरफ से संपर्क किए जाने की बात पर राजेश यादव कहते हैं कि सरकार अब एनपीएस के गुणगान करने में जुट गई है. वह बताने की कोशिश कर रही है कि ओपीएस की तुलना में एनपीएस ज्यादा फायदेमंद है. प्रदेश के मुख्य सचिव उसके फायदे गिना रहे हैं. राजेश कहते हैं तकि हमारा कहना है कि अगर एनपीएस इतनी ही फायदेमंद लग रही है तो प्रदेश के मुख्य सचिव को भी इसे ले लेना चाहिए.

इसी क्रम में पिछले दिनों लखनऊ में डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ की बैठक हुई, जिसमें तीन दिन के कार्य बहिष्कार आंदोलन पर टिके रहने का फैसला किया गया. मंच के संयोजक हरिकिशोर तिवारी के अनुसार विरोध अनुशासन मे होगा. सरकार अगर दमन करना चाहती है तो ये उसकी भूल है. उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव से हुई वार्ता में नई पेंशन की खामियो को अधिकारियो ने माना लेकिन उनका जवाब सकारात्मक नहीं रहा. अगर सरकार दमन पर उतरी तो 27 अक्टूबर के बाद आंदोलन अनिश्चितकाल के लिए खिंच सकता है.





style=”text-align: justify;”>उधर सरकार एनपीएस को पुरानी पेंशन से बेहतर बताने की तैयारी में भी जुट गई है. पता चला है कि वित्त विशेषज्ञों की एक टीम एनपीएस का पूरा विश्लेषण कर रही है, जिसे सीएम योगी आदित्यनाथ के सामने पेश किया जाएगा. इसके बाद एनपीएस को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने के लिए व्यापक प्रचार अभियान चलाया जाएगा. दावा है कि ओल्ड पेंशन स्कीम में जहां अधिक से अधिक 40872 रुपए महीने की व्यवस्था थी, वहीं एनपीएस में कर्मचारी को हर महीने अधिकतम 42,024 रुपए मिलेंगे. यही नहीं फैमिली के लिहाज से भी एनपीएस फायदेमंद है.

पुरानी पेंशन व्यवस्था (OPS)

— पुरानी पेंशन व्यवस्था का शेयर मार्केट से कोई संबंध नहीं था.

— पुरानी पेंशन में हर साल डीए जोड़ा जाता था.

— पुरानी पेंशन व्यवस्था में गारंटी थी कि कर्मचारी या अधिकारी की आखिरी सैलरी का लगभग आधा उसे पेंशन के तौर पर मिलेगा.

— अगर किसी की आखिरी सैलरी 50 हजार है तो उसे 25 हजार पेंशन मिलती थी. इसके अलावा हर साल मिलने वाला डीए और वेतन आयोग के तहत वृद्धि की सुविधा थी.

— नौकरी करने वाले व्यक्ति का जीपीएफ अकाउंट खोला जाता था.

— जीपीएफ एकाउंट में कर्मचारी के मूल वेतन का 10 फ़ीसदी कटौती करके जमा किया जाता था.

— जब वह रिटायर होता था तो उसे जीपीएफ में जमा कुल राशि का भुगतान होता था.

— सरकार की तरफ से आजीवन पेंशन मिलती थी.




नई पेंशन व्यवस्था (NPS)

— 1 अप्रैल 2005 से लागू हुई न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस)

— न्यू पेंशन स्कीम एक म्‍यूचुअल फंड की तरह है. ये शेयर मार्केट पर आधारित व्यवस्था है.

— पुरानी पेंशन की तरह इसमेें पेंशन में हर साल डीए नहीं जोड़ा जाता.

— कोई गारंटी नहीं है कि कर्मचारी या अधिकारी की आखिरी सैलरी का लगभग आधा ही उसे पेंशन के तौर पर मिले.

— एनपीएस के तहत जो टोटल अमाउंट है, उसका 40 प्रतिशत शेयर मार्केट में लगाया जाता है.

— कर्मचारी या अधिकारी जिस दिन वह रिटायर होता है, उस दिन जैसा शेयर मार्केट होगा, उस हिसाब से उसे 60 प्रतिशत राशि मिलेगी. बाकी के 40 प्रतिशत के लिए उसे पेंशन प्लान लेना होगा.

— पेंशन प्लान के आधार पर उसकी पेंशन निर्धारित होगी.

— नई व्यवस्था में कर्मचारी का जीपीएफ एकाउंट बंद कर दिया गया है.

विरोध इन बातों पर है

— 1 जनवरी 2004 को जब केंद्र सरकार ने पुरानी व्यवस्था को खत्म कर नई व्यवस्था लागू की. एक बात साफ थी कि अगर राज्य चाहें तो इसे अपने यहां लागू कर सकते हैं. मतलब व्यवस्था स्वैच्छिक थी. यूपी में इसे 1 अप्रैल 2005 को लागू कर दिया. पश्चिम बंगाल में आज भी पुरानी व्यवस्था ये लागू है.

— पुरानी पेंशन व्यवस्था नई व्यवस्था की तरह शेयर बाजार पर आश्रित नहीं है. लिहाजा उसमें जोखिम नहीं था.

— न्यू पेंशन स्कीम लागू होने के 14 साल बाद भी यह व्यवस्था अभी तक पटरी पर नहीं आ सकी है.

— नई स्कीम में कोई गारंटी नहीं है कि कर्मचारी या अधिकारी की आखिरी सैलरी का लगभग आधा ही उसे पेंशन के तौर पर मिले. क्योंकि शेयर बाजार से चीजें तय हो रही हैं.

— नई व्यवस्था के तहत 10 प्रतिशत कर्मचारी और 10 प्रतिशत सरकार देती है. लेकिन जो सरकार का 10 प्रतिशत का बजट है, वही पूरा नहीं है.

— मान लीजिए यूपी में मौजूदा समय में 13 लाख कर्मचारी है. अगर उनकी औसत सैलरी निकाली जाए तो वह 25 हजार के आसपास है. इस हिसाब से कर्मचारी का 2500 रुपए अंशदान है. लेकिन इतना ही अंशदान सरकार को भी करना है. मोटे तौर पर सरकार के ऊपर कई हजार करोड़ का भार आएगा. लेकिन सरकार के पास इसके लिए बजट ही नहीं है.

— नई व्यवस्था के तहत मान लीजिए अगर किसी की पेंशन 2000 निर्धारित हो गई तो वह पेंशन उसे आजीवन मिलेगी. उसमें कोई उतार-चढ़ाव नहीं होगा. पुरानी व्यवस्था में ऐसा नहीं था. उसमें हर साल डीए और वेतन आयोग के तहत वृद्धि की सुविधा थी.

— विरोध शेयर मार्केट आधारित व्यवस्था को लेकर है. कर्मचारियों का कहना है कि मान लीजिए कि एक कर्मचारी एक लाख रुपये जमा करता है. जिस दिन वह रिटायर होता है उस दिन शेयर मार्केट में उसके एक लाख का मूल्य 10 हजार है तो उसे 6 हजार रुपये मिलेंगे और बाकी 4 हजार में उसे किसी भी बीमा कंपनी से पेंशन स्कीम लेनी होगी. इसमें कोई गारंटी नहीं है.

— पहले जो व्यवस्था थी, उसमें नौकरी करने वाले व्यक्ति का जीपीएफ अकाउंट खोला जाता था. उसमें कर्मचारी के मूल वेतन का 10 फ़ीसदी कटौती करके जमा किया जाता था. जब वह रिटायर होता था तो उसे जीपीएफ में जमा कुल राशि का भुगतान होता था और सरकार की तरफ से आजीवन पेंशन मिलती थी. नई व्यवस्था में जीपीएफ अकाउंट बंद कर दिया गया है.

Category: News, Pensioners

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