ट्रेनों से एक साल में दो लाख तौलिये गायब, रेलवे के आंकड़ों में चौंकाने वाले खुलासे

| October 5, 2018

सोमवार को ही एक व्यक्ति को 3 कंबल, 6 चादरें और 3 तकिये चुराते पकड़ा गया था
यह कैसा सफर
बताया गया है कि हर बेडशीट की कीमत “132, तौलिया की “22 और तकिया की “25 होती है। एक सूत्र के मुताबिक, यह देखना कोच अटेंडेंट की जिम्मेदारी होती है कि हर यात्री सारा सामान वापस कर गया है। कई ट्रेनों में सेंसर-टैप और सीसीटीवी जैसी सुविधाएं होती हैं लेकिन वह एक यात्रा तक भी टिक नहीं पातीं। रेलवे इन सेवाओं को सस्ते विकल्पों से बदल देता है। वहीं, पश्चिम रेलवे के पीआरओ रविंदर भाकर ने इन









चोरियों को शर्मनाक बताते हुए कहा कि कुछ ट्रेनों में ट्रायल बेसिस पर डिस्पोजेबल तौलिये और तकिये के कवर दिए गए हैं।• मुंबई मिरर, मुंबई

रेलवे आपकी संपत्ति है… रेलवे स्टेशनों पर होने वाली इस तरह की घोषणाओं का कुछ लोगों ने शायद अलग ही मतलब निकाल लिया है। पश्चिम रेलवे के आंकड़े बताते हैं कि पिछले वित्तीय साल में 1.95 लाख तौलिये, 81,736 चादरें, 55,573 तकिया कवर, 5,038 तकिए और 7,043 कंबल लंबी दूरी की ट्रेनों से चुरा लिए गए। इनके अलावा 200 टॉइलट मग, 1000 नल और 300 से ज्यादा फ्लश पाइप भी हर साल चुराए जाते हैं।








मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सुनील उदासी ने बताया कि अप्रैल से सितंबर 2018 के बीच 79,350 तौलिये, 27,545 चादरें, 21,050 तकिया के कवर, 2,150 तकिया और 2,065 कंबल चुराए गए जिनकी कुल कीमत लगभग ₹62 लाख लगाई गई है। बता दें कि सोमवार को ही बांद्रा से ट्रेन में चढ़ने वाले रतलाम के एक व्यक्ति को 3 कंबल, 6 चादरें और 3 तकिये चुराने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। पिछले 3 वित्तीय वर्षों में भारतीय रेलवे को 4000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है जिनमें बड़ी मात्रा चोरी की वजह से हुए नुकसान की है। चादर और दूसरी ऐसी चीजों का नुकसान कोच अटेंडेंट को भरना पड़ता है जबकि बाथरूम के सामान का रेलवे को।

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