रेलवे को घटे में पहुंचाने के लिए अधिकारी जिम्मेदार, योजनाए कैसे विफल हो रही हैं जानिए

| October 2, 2018

फ्लेक्सी फेयर ने प्रीमियर ट्रेनों की लुटिया डुबो दी है। अक्तूबर को रेलवे के लिहाज से पिक सीजन माना जाता है लेकिन राजधानी और दूरंतो में हर दिन चार सौ से पांच सौ सीट खाली रह जा रही हैं। करंट बुकिंग कर यात्री आसानी से प्रीमियर ट्रेनों में यात्रा कर रहे हैं। धनबाद से भले ही राजधानी और सियालदह राजधानी और सियालदह दूरंतो में सीट खाली नहीं मिलती, लेकिन हावड़ा और सियालदह से इन तीनों ट्रेन को यात्री नहीं मिल रहे हैं। वहां का कोटा खाली रहने के कारण धनबाद के यात्रियों के लिए करेंट बुकिंग 400 से 500 सीट खाली मिल रही है।.








‘ हवाई जहाज के किराए में छूट भारतीय रेल के लिए बड़ी चुनौती .

‘ दिल्ली जाने वाली ट्रेनों में यात्रियों का टोटा होना तय है.

अधिक किराया देकर लंबा सफर यात्रियों को रास नहीं आ रहा है। प्रीमियर ट्रेनों के फ्लेक्सी फेयर ने यात्रियों का जायका खराब कर दिया है। किराए के कारण ट्रेनों की अपेक्षा फ्लाइट के प्रति यात्रियों का झुकाव लगातार बढ़ रहा है। इसका असर ट्रेनों में घटती यात्रियों की संख्या के रूप में देखा जा सकता है।.

फ्लेक्सी फेयर के कारण प्रीमियर ट्रेनों में डायनेमिक प्राइसिंग के आधार पर किराया तय हो रहा है। कोलकाता और सियालदह से नई दिल्ली के बीच ट्रेन और हवाई जहाज की यात्रा की तुलना करने पर चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। एक अक्तूबर के लिए फ्लाइट और ट्रेन के किराए का तुलनात्मक अध्ययन करने पर पता चला कि ट्रेन की अपेक्षा हवाई जहाज से दिल्ली का सफर 25 से 35 प्रतिशत तक किफायती है। एक अक्तूबर को सियालदह राजधानी, हावड़ा राजधानी और सियालदह-नई दिल्ली दूरंतो का सेकंड एसी में किराया 4,150 से 4,185 रुपए चार्ज की जा रही थी। दिल्ली पहुंचने में कम से कम 17 घंटे लगते हैं, जबकि कोलकाता से फ्लाइट की यात्रा इकोनॉमी क्लास में महज 3,535 से 4,145 रुपए में पूरी हो रही है।.




ये फ्लाइट कोलकाता से दिल्ली पहुंचने में मात्र सवा दो घंटे से ढाई घंटे का समय लेते हैं। यही स्थिति रांची से दिल्ली के फ्लाइट के किराए की है। मात्र 28 सौ से 35 सौ रुपए किराए पर यात्री रांची से नई दिल्ली तक फ्लाइट की यात्रा कर ले रहे हैं। सिर्फ एक अक्तूबर ही नहीं अक्तूबर की अन्य तिथि में भी यही हाल है। .

फ्लेक्सी फेयर ने प्रीमियर ट्रेनों की लुटिया डुबो दी है। अक्तूबर को रेलवे के लिहाज से पिक सीजन माना जाता है लेकिन राजधानी और दूरंतो में हर दिन चार सौ से पांच सौ सीट खाली रह जा रही हैं। करंट बुकिंग कर यात्री आसानी से प्रीमियर ट्रेनों में यात्रा कर रहे हैं। धनबाद से भले ही राजधानी और सियालदह राजधानी और सियालदह दूरंतो में सीट खाली नहीं मिलती, लेकिन हावड़ा और सियालदह से इन तीनों ट्रेन को यात्री नहीं मिल रहे हैं। वहां का कोटा खाली रहने के कारण धनबाद के यात्रियों के लिए करेंट बुकिंग 400 से 500 सीट खाली मिल रही है।.




‘ हवाई जहाज के किराए में छूट भारतीय रेल के लिए बड़ी चुनौती .

‘ दिल्ली जाने वाली ट्रेनों में यात्रियों का टोटा होना तय है.

फ्लेक्सी फेयर ने प्रीमियर ट्रेनों की लुटिया डुबो दी है। अक्तूबर को रेलवे के लिहाज से पिक सीजन माना जाता है लेकिन राजधानी और दूरंतो में हर दिन चार सौ से पांच सौ सीट खाली रह जा रही हैं। करंट बुकिंग कर यात्री आसानी से प्रीमियर ट्रेनों में यात्रा कर रहे हैं। धनबाद से भले ही राजधानी और सियालदह राजधानी और सियालदह दूरंतो में सीट खाली नहीं मिलती, लेकिन हावड़ा और सियालदह से इन तीनों ट्रेन को यात्री नहीं मिल रहे हैं। वहां का कोटा खाली रहने के कारण धनबाद के यात्रियों के लिए करेंट बुकिंग 400 से 500 सीट खाली मिल रही है।.

‘ हवाई जहाज के किराए में छूट भारतीय रेल के लिए बड़ी चुनौती .

‘ दिल्ली जाने वाली ट्रेनों में यात्रियों का टोटा होना तय है.

Category: Indian Railways, News

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