लोकसभा चुनाव में पुरानी पेंशन की बहाली का मुद्दा सियासी बनना तय

| September 29, 2018

पुरानी पेंशन की बहाली वर्ष 2019 के आम लोकसभा चुनावों में सियासी मुद्दा बनता दिख रहा है। जिस तरह से कर्मचारी और अधिकारी संगठन पुरानी पेंशन के मुद्दे पर लामबंद हो रहे हैं, उससे इस मसले का सियासी मुद्दा बनना तय माना जा रहा है। यदि ऐसा होता है तो निश्चित रूप से यह मुद्दा सत्तारुढ़ दल भाजपा के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। .








यह बात दीगर है कि पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा पिछले कई साल से येन-केन प्रकारेश उठता रहा है। लेकिन इस मुद्दे पर इस बार जैसी एकजुटता कर्मचारी संगठनों में कभी नहीं दिखी। पहली बार देखने को मिल रहा है कि जिलों से निकलकर यह मुद्दा प्रदेश में और प्रदेशों से होता हुआ देश व्यापी होता दिख रहा है। खासतौर से इस मुद्दे को रेलवे ने धार दी है। रेलवे एक ऐसा विभाग है जहां बड़ी संख्या में कर्मचारी हैं और वहां की कर्मचारी यूनियन बहुत ही मजबूत है। रेलवे की कर्मचारी यूनियन के साथ मिलकर पुरानी पेंशन बहाली मंच अटेवा इस मुद्दे को लोकसभा चुनावों में सियासी मुद्दा बनाने पर तुला है। यही नहीं, यूपी के 40 कर्मचारी और अधिकारी संगठन इस मुद्दे पर सारे मतभेद भुलाकर एक बैनर तले लड़ाई लड़ने को तैयार हो गए हैं। .




पुरानी पेंशन इसलिए भी मुद्दा बनने जा रही है, क्योंकि नई पेंशन योजना यूपी में लागू होने के एक दशक से ज्यादा समय बीतने पर भी जमीनी स्तर पर सफल नहीं हो पा रही है। इसका मुख्य कारण यह है कि कहीं बजट नही है तो कहीं संबंधित अधिकारी और कर्मचारी जानते ही नहीं कि कर्मचारी के वेतन से होने वाली पेंशन कटौती को कहां जमा कराया जाए। या पेंशन के पैसे को शेयर में कब और कैसे लगाया जाए। .

‘ इस मुद्दे को रेलवे के कर्मचारियों ने धार दी है.

‘ यूपी के 40 कर्मचारी और अधिकारी संगठन एक मंच पर आए हैं.




‘ इस मुद्दे को रेलवे के कर्मचारियों ने धार दी है.

‘ यूपी के 40 कर्मचारी और अधिकारी संगठन एक मंच पर आए हैं.

केंद्र सरकार द्वारा पुरानी पेंशन खत्म किए जाने के बाद यूपी में पहली अप्रैल, 2005 को या उसके बाद नियुक्त कर्मचारियों और अधिकारियों की पुरानी पेंशन खत्म कर दी गई थी। उनके लिए नई पेंशन योजना लागू कर दी गई। लेकिन नई पेंशन योजना को अफसर अभी तक ठीक से जमीन पर नहीं उतार पाए हैं। नई पेंशन योजना के प्रति कर्मचारियों और अधिकारियों में विश्वास भी नही है। कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि पुरानी पेंशन खत्म होने से कर्मचारी और अधिकारी भविष्य की जीविका को लेकर आशंकित हो गए हैं। नई पेंशन में कम राशि ही पेंशन के रूप में मिलेगी, जिससे जीवन निर्वाह कठिन होगा। .

पुरानी पेंशन निश्चित लोकसभा चुनाव में मुद्दा बनेगा, क्योंकि इसके खत्म होने से नए नियुक्त लाखों कर्मचारी और अधिकारियों को अपना भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है। चाहे वह आईएएस हो या आईपीएस, या राज्य सेवा के अधिकारी और कर्मचारी। वे इसके लिए सत्ता दल के साथ-साथ विपक्षी नेता राहुल गांधी से भी मिलेंगे। .

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