Supreme Court clears the way for Reservation in Promotions

| September 27, 2018

केंद्र और राज्य सरकारों में नौकरी कर रहे अनुसूचित जातियों (एससी) एवं अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के लोगों को पदोन्नति में आरक्षण देने का रास्ता साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पदोन्नति में आरक्षण के नागराज मामले में 2006 के फैसले को सात सदस्यों की संविधान पीठ के पास भेजने से इनकार कर दिया। .








इसके साथ ही पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने केंद्र सरकार का यह अनुरोध भी ठुकरा दिया कि एससी/एसटी को आरक्षण दिए जाने में उनकी कुल आबादी पर विचार किया जाए। नागराज प्रकरण में 2006 के फैसले में एससी/एसटी को पदोन्नति में आरक्षण देने के लिए शर्तें तय की गई थीं। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने एकमत से यह फैसला सुनाया। केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि एससी-एसटी समुदाय के लोगों को पिछड़ा माना जाता है और जाति को लेकर उनकी स्थिति पर विचार करते हुए उन्हें नौकरियों में तरक्की में भी आरक्षण दिया जाना चाहिए।




एससी/एसटी सर्वाधिक पिछड़े या समाज के कमजोर तबके में भी सबसे अधिक कमजोर हैं और उन्हें पिछड़ा माना जा सकता है। पदोन्नति दिए जाने के समय हर बार प्रशासन की दक्षता देखनी होगी। -सुप्रीम कोर्ट

‘ कोर्ट ने 2006 का फैसला बड़ी पीठ को भेजने से मना किया.

‘ केंद्र के कुल आबादी पर विचार करने के अनुरोध को ठुकराया




सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया है कि क्रीमी लेयर की अवधारणा एससी- एसटी को दिए जाने वाले आरक्षण में लागू होगी। संविधान पीठ ने बुधवार को दिए फैसले में कहा कि संवैधानिक कोर्ट किसी भी क्रीमी लेयर को दिए गए आरक्षण को रद्द करने के लिए सक्षम है। .

पांच सदस्यीय पीठ ने कहा कि नागराज मामले में फैसले के उस हिस्से पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता नहीं है, जिसने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिये क्रीमी लेयर की कसौटी लागू की थी। कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति की अपनी सूची में किसी भी जाति को एससी-एसटी के रूप में शामिल कर सकती है। ऐसे में उस समूह में क्रीमी लेयर का सिद्धांत बराबरी की कसौटी पर लागू किया जा सकता है। .

कोर्ट ने कहा कि आरक्षण का पूरा उद्देश्य यह है कि पिछड़ी जातियां अगड़ों से बराबरी के आधार पर आगे बढ़ें। यह संभव नहीं होगा यदि किसी वर्ग में क्रीमी लेयर सभी प्रमुख सरकारी नौकरियां ले जाए तथा शेष वर्ग को पिछड़ा ही छोड़ दे, जैसा वे हमेशा थे। .

केंद्र के आग्रह खारिज : कोर्ट ने कहा कि जब वह एससी-एसटी में क्रीमी लेयर का मामला लागू करता है तो वह अनुच्छेद 341 तथा 342 के तहत राष्ट्रपति द्वारा जारी एससी-एसटी की सूची में छेड़छाड़ नहीं करता। इससे सिर्फ वही लोग प्रभावित होते हैं जो क्रीमी लेयर के कारण छुआछूत और पिछड़ेपन से बाहर निकल आए हैं और जिन्हें आरक्षण से बाहर रखा गया है। कोर्ट ने केंद्र का यह आग्रह खारिज कर दिया कि एससी-एसटी में क्रीमी लेयर मामले को खत्म कर दिया जाए।

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