रेलवे बोर्ड की सख्ती से मेल एक्सप्रेस ट्रेनों के समय में सुधार

| September 26, 2018

रेलवे बोर्ड की सख्ती के बाद मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों के समयपालन में सुधार शुरू हो गया है। इसमें भारतीय रेल का रांची डिवीजन रिकॉर्ड 100 फीसदी समयपालन के साथ प्रथम स्थान पर है। जबकि इलाहबाद डिवीजन सबसे फिसड्डी है। .








इलाहाबाद डिवीजन में 60 फीसदी ट्रेनें लेट चल रही हैं और महज 40% ट्रेनें समयपालन पर खरी उतर रही हैं। भारतीय रेल का समयपालन 76 प्रतिशत तक पहुंच गया है। रेलवे बोर्ड ने अपने नए टाइम टेबल में मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों का समयपालन 95 फीसदी करने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत भारतीय रेल के सभी 68 डिवीजन के समयपालन की निगरानी की जा रही है। इसमें डाटा तैयार किया जा रहा है कि किस डिवीजन में समयपालन के मामले में मेल-एक्सप्रेस ट्रेनें पिट रही हैं। विदित हो कि ट्रेन के लेट होने पर लोको पॉयलट, गार्ड सहित स्टेशन मैनेजर व कंट्रोल रूम के कर्मियों की जवाबदेही तय की जाती है। जिस डिवीजन बिना किसी तकनीकी कारण के ट्रेन लेट होती है, ऐसी स्थिति में कर्मियों पर कार्रवाई की जाती है।.




रेलवे बोर्ड की सख्ती का नतीजा है कि पिछले दिनों की अपेक्षाकृत भारतीय रेल में मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों का समयपालन 70 फीसदी से बढ़कर 76 पहुंच गया है। जबकि दो माह पूर्व यह 60 प्रतिशत से नीचे था। पिछले हफ्ते (17 से 23 सितंबर) के रेलवे दस्तावेज के मुताबिक रांची डिवीजन से गुजरने वाली ट्रेनों का समयपालन 100 फीसदी रहा है। जबकि धनबाद, दानापुर सहित 21 डिवीजन में ट्रेनों का समयपालन 90 फीसदी से अधिक है। दिल्ली, आगरा, मुगलसराय, कटिहार सहित 21 डिवीजन में 80 प्रतिशत से अधिक ट्रेनें समयपालन पर खरी उतर रही हैं। कुल 68 डिवीजनों में इलाहाबाद सबसे पीछे है। यहां 40 फीसदी ट्रेनें राइट टाइम चल रही है। 60 फीसदी ट्रेनों की रफ्तार पर ब्रेक लगाने के कारण लेट हो जाती है। इसी कड़ी में लखनऊ डिवीजन में 48 फीसदी, मुरादाबाद में 56 फीसदी, हावड़ा में 58 प्रतिशत ट्रेनें सही समय पर चल रही हैं। जानकारों का कहना है कि खराब प्रदर्शन करने वाले डिवीजनों में कई दिशाओं से ट्रेनें आती है। स्टेशनों पर प्लेटफॉर्मों की संख्या कम होती है जिस कारण ट्रेनों को आउटर पर रोकना पड़ता है।.




करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान परिचालन में होता है .

प्रतिशत बाकी ट्रेनें कभी समय पर नहीं पहुंचती हैं.

फीसदी ट्रेन समयपालन पर खरी उतरती हैं .

हजार करोड़ से अधिक की चपत लगती है, प्रति वर्ष ट्रेनें लेट होने से रेलवे को .

सौ ट्रेन इसमें से हर रोज अपने निर्धारित समय पर पहुंचती हैं.

हजार से अधिक यात्री ट्रेन और मालगाड़ियां रेलवे रोज चलाता है .

Category: Indian Railways, News

About the Author ()

Comments are closed.