रेल कर्मचारियों को पढ़ाई के लिए नहीं मिलेगा भत्ता

| September 6, 2018

रेलवे अधिकारियों और कर्मचारियों को अब विशेष पढ़ाई के लिए कोई भत्ता नहीं मिलेगा। उन्हें अपने खर्च पर ही पढ़ाई करनी होगी। पढ़ाई के लिए केवल छुट्टी मिलेगी। 1नौकरी में आने के बाद रेल अधिकारी और कर्मचारी विशेष पढ़ाई कर सकते हैं। कुछ अधिकारी तो पढ़ाई के लिए विदेश या इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आइआइएम) जैसे महंगे संस्थान में भी पढ़ाई करने जाते हैं। रेलवे ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों को पढ़ाई के लिए वेतन के स्थान पर भत्ता देता था। पढ़ाई शुरू करने से पहले रेलवे से अनुमति लेनी पड़ती है। लिखित रूप से देना पड़ता है कि पढ़ाई पूरी करने के बाद पांच या 10 साल तक रेलवे की नौकरी नहीं छोड़ेंगे। कुछ अधिकारी बेहतर लाभ पाने के लिए मामूली राशि रेलवे में जमा कर नौकरी छोड़कर किसी बड़ी कंपनी में चले जाते हैं। इसको देखते हुए रेलवे बोर्ड के ज्वाइंट डायरेक्टर (एफ) जी प्रिया सुदर्शनी ने पत्र जारी किया है। विशेष पढ़ाई के लिए कोई भत्ता या स्पेशल छुट्टी नहीं मिलेगी। मांग पर पढ़ाई के लिए छुट्टी मिलेगी। अर्जित अवकाश (पीएल) खत्म होने के बाद वेतन नहीं मिलेगा। डीआरएम अजय कुमार सिंघल ने पत्र जारी होने की पुष्टि की है। उत्तर रेलवे मजदूर यूनियन के मंडल अध्यक्ष मनोज कुमार शर्मा ने कहा कि इसका विरोध करेंगे।








ये एक्सप्रेस ट्रेन नहीं, स्कूल है जनाब

मुहम्मदपुर शुमाली के प्राथमिक विद्यालय को देखकर लगता है, जैसे किसी रेलवे स्टेशन पर आ गए हैं। ऐसा लगे भी क्यों नहीं, स्कूल भवन बिल्कुल ट्रेन जैसा है। इसे देखकर लोग हैरत में पड़ जाते हैं और काफी देर तक निहारते रहते हैं। अक्सर लोगों के मुंह से यही निकलता है, वाह क्या खूब है स्कूल। इसकी यह खासियत छात्रों-अभिभावकों को तो अपनी ओर खींचती ही है अधिकारी भी इस विद्यालय का दौरा करने में दिलचस्पी रखते हैं। यही कारण है कि विद्यालय की छात्र संख्या में पिछले एक साल के अंदर इजाफा हो गया है।1सैदनगर ब्लाक की बगरौआ ग्राम पंचायत के मझरा मुहम्मदपुर शुमाली के इस प्राथमिक विद्यालय को ट्रेन का लुक दिया है सहायक अध्यापक अजीत कुमार श्रीवास्तव ने। इसे हाल ही में मरम्मत के बाद चमकाया गया है। स्कूल को यह लुक शानदार पेंटिंग के जरिये दिया गया है। इसे शिक्षा की मेल नाम दिया गया है।




दूर से ही विद्यालय का आकर्षण लोगों को अपनी ओर खींचता है। देखकर लगता है, जैसे सामने ट्रेन खड़ी हो। क्लास रूम में प्रवेश करते बच्चे ऐसे लगते हैं मानो ट्रेन में सवार हो रहे हों। कमरे में आते-जाते बच्चे खुश होते हैं। अभिभावकों को भी यह लुभाता है। अजीत कुमार बताते हैं कि पहले स्कूल में 15 से 20 ही छात्र ही आते थे। अब छात्र 40 हो गए हैं और रोज पूरे बच्चे आते हैं। आकर्षण बढ़ने से अभिभावक खुद बच्चों को लेकर आते हैं। स्कूल में कंप्यूटर लैब और साइंस लैब भी बनाई गई है। हालांकि अभी कंप्यूटर नहीं लगे हैं, लेकिन अजीत अपने लैपटाप से ही बच्चों को पढ़ा रहे हैं।




दो साल पहले अजीत यहां हुए थे तैनात : अजीत की नियुक्ति इस प्राथमिक विद्यालय में दो साल पहले हुई थी। तब से ही वह शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए प्रयासरत हैं। वह बताते हैं कि विद्यालय में केवल दो शिक्षक हैं। दूसरे प्रधानाध्यपक साजिद हुसैन हैं, जो एनपीआरसी भी हैं, इसलिए वह दूसरे काम में भी लगे रहते हैं। फिर भी हम सब मिलकर शिक्षा का स्तर ऊंचा करने में लगे हैं।1स्कूली ट्रेन पर कविता भी लिखी : अजीत कुमार ने अपनी इस स्कूली ट्रेन पर कविता भी लिखी है और छात्रों के साथ इसका वीडियो भी बनाया है। कविता के बोले हैं- ‘छुक-छुक ट्रेन चली, छुक छुक ट्रेन चली। अजीत सर हैं ड्राइवर, बच्चे बन गए पैसेंजर. छुक छुक ट्रेन चली,छुक छुक ट्रेन चली।1यह ट्रेन नहीं स्कूल है जनाब।’>>मुहम्मदपुर शुमाली के प्राथमिक विद्यालय को दिया गया है ट्रेन का रूप1’>>सहायक अध्यापक अजीत कुमार ने अपने खर्च पर दिया रूप

Category: Indian Railways, News

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