रेल चालकों को आराम के वक्त ड्यूटी नहीं, देशभर में ड्राइवरों की मनोवैज्ञानिक जांच हो रही

| August 5, 2018

रेलवे अब ट्रेन के ड्राइवर (लोको पायलट) और गार्ड को उनके निर्धारित आराम के वक्त ड्यूटी पर नहीं बुलाएगा। इससे रनिंग स्टाफ (ड्राइवर-गार्ड) को हेड क्वार्टर (घर) अथवा आउट स्टेशन पर पूरा आराम मिलेगा।.

रेलवे बोर्ड ने सुधारों के तहत 70 साल बाद रनिंग स्टाफ के नियमों में बदलाव किया है। इससे रेल संरक्षा मजबूत होगी और ट्रेन हादसों में कमी आएगी। रेलवे बोर्ड ने पिछले हफ्ते रनिंग स्टाफ के ड्यूटी आवर्स के नियमों में बदलाव करने संबंधी अधिसूचना जारी कर दी है। अधिकारियों ने बताया कि ड्राइवर-गार्ड को आठ घंटे ट्रेन चलाने के बाद 16 घंटे का आराम मिलता है, ताकि वह पूरी नींद ले सकें।







यदि ड्यूटी आठ घंटे से कम है तो आराम की अवधि 12 घंटे रह जाती है। लेकिन, रेलवे बोर्ड ने नियम में परिवर्तन कर दिया है। अब ड्यूटी आठ घंटे से कम होगी तो भी रनिंग स्टाफ को 16 घंटे का पूरा आराम मिलेगा। यह नियम हेड क्वार्टर (पोस्टिंग का स्थान) पर लागू होते हैं। जब रनिंग स्टाफ आउट स्टेशन पर होते है तो आठ घंटे की ड्यूटी पूरी होने पर रनिंग रूम में आठ घंटे आराम कर सकते हैं। यदि ड्यूटी कम की है तो उसे छह घंटे आराम करने के लिए मिलेंगे।








विदेशी कंपनी ट्रेन दुर्घटना करने वाले ड्राइवरों-सहायक ड्राइवरों की कुल 128 प्रकार की मनोवैज्ञानिक जांच कर रही है। जांच का काम पूरी तरह से कंप्यूटराइज्ड तरीके से किया जाता है। विशेषज्ञ आपातकालीन स्थिति में ड्राइवरों के दिमाग पर होने वाले प्रभाव के बारे में पड़ताल करते हैं, इसमें सवाल-जवाब किए जाते हैं। दुर्घटना के तुरंत बाद ड्राइवरों का रिएक्शन टाइम क्या रहता है।.

Category: Indian Railways, News

About the Author ()

Comments are closed.