भूखे रेल चालकों के जिम्मे ट्रेन, खतरे में यात्रियों की जान

| July 19, 2018

हर एक ट्रेन के दो से ढाई हजार यात्रियों को सुरक्षित मंजिल तक पहुंचाने का दायित्व जिन ट्रेन चालकों के कंधों पर है वह उपवास रखकर काम कर रहे हैं। इससे यात्रियों की जान खतरे में पड़ गई है। लापरवाही इतनी बरती गई कि मानकों के तहत रेलवे ने इन भूखे-प्यासे रेल चालकों के मेडिकल कराने का भी कोई इंतजाम तक नहीं किया। मंगलवार से 48 घंटे का उनका उपवास शुरू हुआ है जो गुरुवार सुबह समाप्त होगा।








खतरनाक है यह उपवास : रेलवे में फिटनेस और स्वास्थ्य के सबसे कड़े मानक रेल चालकों के ही हैं। सिग्नल देखने में चूक सहित अन्य आकस्मिक स्थिति न हो इसके लिए तय समय पर उनका नियमित परीक्षण मंडल अस्पताल में किया जाता है। मंगलवार को उपवास पर जाते ही ट्रेन लेकर रवाना होने से पहले उनका मेडिकल परीक्षण किया जाना चाहिए था। ऐसा इसलिए क्योंकि यदि किसी चालक का ब्लड प्रेशर बढ़ा हो या फिर वह बीमार हो, कमजोर हो गया हो तो उसके उपवास में रहकर ट्रेन चलाने से खतरा हो सकता है। लेकिन रेलवे के डॉक्टरों ने स्वास्थ्य जांच नहीं की और चालक व सहायक चालक ट्रेन चलाते रहे।




>रेल चालकों की मेडिकल जांच का कोई इंतजाम नहीं

>ट्रेन चलाते समय चक्कर आया तो हो सकता बड़ा हादसा

इनकी बिगड़ी तबीयत 1जिनकी तबीयत बिगड़ी उनमें गझंडी में पदस्थापित सहायक रेल चालक मुकेश कुमार, गोमो में पदस्थापित रेल चालक आरआर प्रजापति, गझंडी में पदस्थापित रेल चालक पंकज कुमार शामिल हैं।रेलवे अस्पताल में भर्ती भूख हड़ताल के कारण बीमार ट्रेन चालक




भूख हड़ताल पर बैठे तीन चालकों की हालत बिगड़ी

डीआरएम कार्यालय के समक्ष धरना पर बैठे तीन रेल चालकों की हालत बिगड़ गई। उन्हें रेलवे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।’सुविधा टेनों में मिलेगी सामान्य मेल-एक्सप्रेस के तर्ज पर रिफंड की सुविधा1’जनवरी में शुरू हुई योजना को जुलाई 2019 तक दिया गया एक्सटेंशन

Category: Indian Railways, News

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