प्रोन्नति में आरक्षण पर 12 साल पुराने मामले को खंगालेगा सुप्रीम कोर्ट

| July 12, 2018

नई दिल्ली : एससी/एसटी को प्रोन्नति में आरक्षण मामले पर सुप्रीम कोर्ट तीन अगस्त से सुनवाई करेगा। पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ देखेगी कि 2006 के एम. नागराज फैसले पर पुनर्विचार की जरूरत है कि नहीं। हालांकि, कोर्ट ने बुधवार को इस मामले में कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया है जिसका मतलब है कि संविधान पीठ में सुनवाई होने तक पूर्व व्यवस्था ही लागू रहेगी। यानी पिछड़ेपन के आंकड़े जुटाने के बाद ही इस पर कदम आगे बढ़ सकता है।








आंकड़े न होने से रद हुए सरकारों के आदेश : एम नागराज के फैसले में पांच न्यायाधीशों की पीठ ने कहा था कि एससी/एसटी को प्रोन्नति में आरक्षण देने से पहले सरकारों को उनके अपर्याप्त प्रतिनिधित्व और पिछड़ेपन के आंकड़े जुटाने होंगे। इस फैसले के आधार पर सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाई कोर्ट से कई फैसले आए, जिसमें पर्याप्त आंकड़े न होने के आधार पर राज्य सरकारों के प्रोन्नति में आरक्षण के नियम कानूनों को रद कर दिया गया है। कई राज्यों की अपीलें सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। इसी बीच गत वर्ष 23 अगस्त को दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार का डीओपीटी का केंद्रीय कर्मियों को प्रोन्नति में आरक्षण देने वाला आदेश रद कर दिया था। इसके खिलाफ केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील कर रखी है।




सभी याचिकाएं मुख्य मामले के साथ होंगी संलग्न : मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्र, एएम खानविलकर व न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने बुधवार को एससी/एसटी को प्रोन्नति में आरक्षण से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कहा कि फिलहाल संविधान पीठ विभिन्न मामलों की सुनवाई कर रही है। कोर्ट ने मौजूदा याचिकाओं को भी मुख्य मामले के साथ सुनवाई के लिए संलग्न करने का आदेश देते हुए केस को तीन अगस्त को 2 बजे सुनवाई के लिए लगाने का आदेश दिया। इससे पहले एससी/एसटी को प्रोन्नति में आरक्षण का विरोध कर रहे वकील राजीव धवन ने कहा कि गत 15 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर संविधान पीठ में सुनवाई का आदेश दिया था, लेकिन उसके बाद से विभिन्न पीठों द्वारा अलग-अलग आदेश दिए जाने से भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है।1केंद्र सरकार की ओर से पेश अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने उनकी दलील का समर्थन करते हुए कहा कि एम नागराज मामले पर पुनर्विचार होना चाहिए। कोर्ट जल्दी ही 7 जजों की पीठ का गठन करे, जो एम नागराज फैसले पर पुनर्विचार करे।




वहीं आरक्षण का विरोध करने वालों की ओर से पेश वकील शेखर नाफड़े ने कहा कि नागराज के फैसले पर पुनर्विचार की जरूरत नहीं है। इन दलीलों पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वह पहले ही मामला विचार के लिए पांच न्यायाधीशों की पीठ को भेज चुके हैं। पांच न्यायाधीशों की पीठ देखेगी कि नागराज के फैसले पर पुनर्विचार की जरूरत है कि नहीं। अगर पांच न्यायाधीशों की पीठ को फैसले पर पुनर्विचार की जरूरत लगती है तब सात न्यायाधीशों की पीठ का गठन किया जाएगा।’>>संवैधानिक बेंच तीन अगस्त को करेगी सुनवाई1’>>केंद्र की नागराज फैसले पर पुनर्विचार की मांग

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