राइट्स की गलत कार्यप्रणाली रेलवे पर पड़ रही भारी

| July 11, 2018

देशभर में रेलवे विद्युतीकरण सहित रेलवे की अन्य परियोजनाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित करने का अहम जिम्मा संभालने वाली रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनॉमिक सर्विसेज लिमिटेड (राइट्स) की संदेहास्पद कार्यप्रणाली रेलवे पर भारी पड़ रही है। हाल में अनेक खंडों पर हुए विद्युतीकरण में निर्माण सामग्री के मानक न पाए जाने का मामला विजिलेंस से लेकर सीबीआइ जांच तक पहुंचा, इन सभी परियोजनाओं में लगाई गई निर्माण सामग्रियों को हरी झंडी राइट्स ने ही दी थी। रेलवे की साख और अनगिनत यात्रियों की सुरक्षा की अनदेखी क्यों की गई, यह सबसे बड़ा सवाल है जो राइट्स को संदेह के घेरे में ला खड़ा करता है। सीबीआइ जांच को यदि गति मिलती है तो राइट्स के अधिकारियों और कार्यप्रणाली पर गाज गिरना तय है।








अब रेलवे विद्युतीकरण के स्टील घोटाले की परतें एक-एक कर खुल रही हैं। एक और मामला सामने आया है। विद्युतीकरण प्रोजेक्ट में अंडर-वेट सामग्री के मामले में क्वालिटी इंजीनियर्स एंड काटेक्टर्स कंपनी और जैन स्टील इंडस्ट्री के बीच विवाद हो गया है। जम्मू-उधमपुर खंड पर विद्युतीकरण का प्रोजेक्ट पूरा करने वाली क्वालिटी इंजीनियर्स एंड काटेक्टर्स कंपनी के मालिक सतीश मंदोकर के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। यह मामला प्रोजेक्ट के लिए स्टील के कलपुर्जे की आपूर्ति करने वाली कंपनी जैन स्टील इंडस्ट्री के मालिक संजय जैन की शिकायत पर लोहा मंडी गोविंदगढ़ पुलिस ने दर्ज किया गया। आरोप है कि सतीश मंदोकर ने माल लेकर चेक दिया, जो बाउंस हो गया। इधर, मंदोकर का कहना है कि माल के मानक से कम वजनी होने के कारण पेमेंट रोकी गई। उनका कहना कि रेलवे ने अंडर-वेट सामग्री होने पर 79 लाख की रिकवरी निकाली है, अभी विजिलेंस और सीबीआइ की जाच चल रही है। इस बीच रिकवरी ओर बढ़ सकती है, इसलिए पेमेंट नहीं की गई। राइट्स की पुष्टि के बाद ही मंदोकर की कंपनी को जैन स्टील ने माल की सप्लाई की थी। सूत्रों के अनुसार रेलवे में व्यवस्था यही है कि राइट्स द्वारा जांच और स्वीकृति का प्रमाण पत्र जारी किए जाने के बाद ही सामग्री को साइट पर पहुंचाया जाता है। लिहाजा ठेकेदार कंपनी इसे बिना संकोच के निर्माण में इस्तेमाल करती है।




—– रेल राज्य मंत्री ने कहा, बख्शे नहीं जाएंगे रेलवे विद्युतीकरण घोटाले के दोषी :- जम्मू से ऊधमपुर, ऊधमपुर से कटड़ा, गाजियाबाद से मुरादाबाद और कोझिकोड से कन्नूर रेलवे लाइन के विद्युतीकरण में मानक से कम वजन का स्टील स्ट्रक्चर लगा करोड़ों रुपये का घोटाला करने वाले दोषी रेल अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा। आरोपों की जाच सीबीआइ कर रही है इस लिए किसी नई जाच एजेंसी से इस मामले की जाच करवाने की फिलहाल जरूरत नहीं है। यह दावा रेल राज्य मंत्री राजेन गोहाई ने जम्मू के एक दिवसीय दौरे के दौरान दैनिक जागरण से बातचीत में किया।




रेलवे विद्युतीकरण कार्य में तय मानकों से कम स्टील का स्ट्रक्चर लगाए जाने और आपूर्तिकर्ता दागी कंपनी को फिर से आपूर्ति की मंजूरी देने के मामले बारे में पूछे गए प्रश्न के जबाव में उन्होंने कहा कि घोटाले में दोषी पाये जाने वालों के विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाएगी। हालाकि गोहाई को विद्युतीकरण घोटाले के बारे में जानकारी नहीं थी, उन्होंने नार्दन रेलवे के जरनल मैनेजर विश्वेश चौबे से मामले के बारे में जानकारी जुटाई, उसके बाद यह आश्वासन दिया कि दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। आरोप है कि विद्युतीकरण के काम के दौरान लगाए गए स्ट्रक्चर में करीब 19 फीसद तक कम स्टील लगाया गया है, जिससे स्ट्रक्चर का वजन कम हो गया है, इन्हीं स्ट्रक्चर्स पर हाई वोल्टेज विद्युत तार लटकाए जाते हैं। यात्रियों की जाच कभी भी खतरे में पड़ सकती है। चूंकि यह घोटाला काफी बड़ा है, इस लिए रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी खुल कर कुछ भी नहीं बोल रहे। इतना हीं नहीं सीबीआई को स्ट्रक्चर्स का वजन करने की अनुमति तक नहीं दी जा रही, जिससे रेल अधिकारियों की कार्य प्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगता है।

Category: Indian Railways, News

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