Bullet train project is getting tougher day by day for Modi Government

| July 9, 2018

मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी अहमदाबाद-मुंबई बुलेट टेन परियोजना राजनीतिक और कूटनीतिक दावपेंचों में उलझ गई है। जहां एक तरफ गुजरात में कुछ संगठन अधिक मुआवजे के नाम पर किसानों को परियोजना के लिए जमीन देने के खिलाफ लामबंद कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, महाराष्ट्र में मनसे ने सीधे तौर पर परियोजना के विरोध में बिगुल फूंक दिया है। यही नहीं, शांतिपूर्ण नाभिकीय करार के प्रति जापान के रुख ने भी परियोजना के प्रति सरकार के जोश को कम किया है। ऐसे में परियोजना के समय पर पूरा होने को लेकर आशंकाएं गहराने लगी हैं।1जापान के सहयोग वाली देश की इस पहली हाईस्पीड रेल परियोजना का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले वर्ष सितंबर में किया था। लगभग 1.08 लाख करोड़ रुपये लागत की परियोजना के लिए जापान ने नगण्य ब्याज दर पर 88,000 करोड़ रुपये का सस्ता कर्ज दिया है।








लगभग 508 किलोमीटर लंबी परियोजना का अधिकांश भाग एलीवेटेड होगा। जबकि, बहुत थोड़ा हिस्सा जमीन के ऊपर और समुद्र के भीतर सुरंग से होकर गुजरेगा। परियोजना में मुख्य अड़चन एलीवेटेड हिस्से के कार्यान्वयन में आ रही है। इसके लिए जमीन पर पिलर खड़े किए जाने हैं। इसके लिए लगभग 1400 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है। इसमें 850 हेक्टेयर जमीन गुजरात और महाराष्ट्र के ग्रामीण व आदिवासी इलाकों में पड़ती है। आंदोलनों के कारण अभी तक मात्र 0.9 हेक्टेयर जमीन का ही अधिग्रहण हो सका है।




महाराष्ट्र में परियोजना का ही विरोध’ : परियोजना के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी संभाल रही रेल मंत्रलय की कंपनी नेशनल हाईस्पीड रेल कारपोरेशन आफ इंडिया लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) के एक अधिकारी के अनुसार, ‘महाराष्ट्र और गुजरात में हमें अलग-अलग दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जहां महाराष्ट्र में परियोजना का ही विरोध हो रहा है। वहीं, गुजरात में विरोध जमीन के मुआवजे को लेकर है। महाराष्ट्र के विरोध से निपटना हमारे बस के बाहर है। परंतु गुजरात में हमने कई गांवों का दौरा कर व सरपंचों से मुलाकात कर जाना है कि किसान निर्धारित मुआवजा लेने को तैयार हैं। लेकिन उन्हें डर है कि यदि उन्होंने ऐसा किया तो आंदोलनकारियों का कोपभाजन बन सकते हैं। इन स्थितियों में सरकार को ही कुछ करना होगा। अन्यथा चीजें हाथ से निकल सकती हैं।




11बुलेट ट्रेन की राह का रोड़ा अकेले जमीन हो ऐसा नहीं है। कुछ कूटनीतिक मसले भी इसकी रफ्तार रोक रहे हैं। इनमें शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए भारत और जापान के बीच हुआ नाभिकीय करार शामिल है। सूत्रों के अनुसार जुलाई, 2017 से लागू उस समझौते के तहत जापान से भारत को शांतिपूर्ण नाभिकीय तकनीक का हस्तांतरण होना था। लेकिन संबंधित प्रस्ताव को जापानी संसद ‘डायट’ ने अभी तक मंजूरी नहीं दी है।

Category: Indian Railways, News

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