रेलवे सुरक्षा बल अब रेलवे बोर्ड के चेयरमैन के अधीन होगा

| July 2, 2018

नई दिल्ली। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के नियंत्रण को लेकर महीनों से चल रही खींचतान का पटाक्षेप हो गया। अब आरपीएफ मेंबर ट्रैफिक के बजाए सीधे रेलवे बोर्ड के चेयरमैन के अधीन होगा।

इस आशय का आदेश जारी कर दिया गया है।

गौरतलब है कि इसका विरोध कर रहे रेलवे बोर्ड के सदस्य, यातायात मोहम्मद जमशेद रिटायर हो गए हैं। वह नहीं चाहते थे कि RPF का नियंत्रण सदस्य यातायात से वापस लिया जाए। इस कारण उनके रिटायरमेंट के एक दिन पहले यह फैसला लिया गया।

एक एजेंसी की खबर के मुताबिक रेलवे बोर्ड के अफसरों का एक तबका इस निर्णय से खुश नहीं है। उनका कहना है कि मैंबर ट्रैफिक राष्ट्र की जीवन रेखा रेलवे की परिचालन संबंधी सभी गतिविधियों के लिए जिम्मेदार होता है। इस वजह से वह जरूरत के हिसाब से बल्कि तैनाती करने के लिए सबसे उपयुक्त व्यक्ति माना जाता रहा है।








ट्रेनों के एसी डिब्बों में यात्रा करने वाले यात्रियों को अब नहीं मिलेगा यह सामान…

रेलवे बोर्ड ने एक आदेश जारी किया है जिसके मुताबिक एसी डिब्बों में यात्रा करने वाले यात्रियों को जो फेस टॉवेल दिए जाते हैं उनकी जगह पर अब सस्ते, छोटे और एक बार इस्तेमाल योग्य नैपकिन दिए जाएंगे. रेलवे, यात्रियों के लिए यात्रा अनुभव को बेहतर बनाने पर ध्यान दे रहा है. इसी क्रम में कुछ महीने पहले रेलवे बोर्ड ने एसी डिब्बों में यात्रा करने वालों को नायलॉन के कंबल उपलब्ध कराने का सभी जोनों को आदेश दिया था और अब कॉटन के बिना बुनाई वाले फेस टॉवल देने को कहा है.

फिलहाल फेस टॉवेल पर जो खर्च आता है वह प्रति टॉवेल 3.53 रुपये है. सभी रेलवे जोनों के महाप्रबंधकों को 26 जून को भेजे गए पत्र में बोर्ड ने कहा है कि नए नैपकिन पर खर्च कम आएगा क्योंकि उन्हें थोक में खरीदा जा सकता है और वह आकार में भी छोटे होंगे. एसी डिब्बों में यात्रा करने वालों के टिकट में बेडरोल की कीमत शामिल होगी.




योगी, तेंदुलकर और गडकरी समेत 174 वीआईपी ने नये रेलवे जोनों और मंडलों की मांग की
सचिन तेंदुलकर, शशि थरूर, नितिन गडकरी और योगी आदित्यनाथ सहित 174 अति विशिष्ट व्यक्तियों ने पिछले तीन साल में रेलवे बोर्ड से विभिन्न नये जोन और मंडल बनाने की मांग की है. रेल मंत्रालय के रिकार्ड्स से इसकी जानकारी मिली है. रेलवे अधिकारियों ने बताया कि ज्यादातर मांग ‘‘राजनीतिक कारणों से प्रेरित’’ है और ‘‘क्षेत्रीय सोच रेलवे की परिचालन आवश्यकताओं पर हावी नहीं हो सकती हैं.’’




रेलवे से मिली जानकारी के अनुसार 2014 से 31 मार्च 2017 तक 55 अतिविशिष्ट व्यक्तियों ने नये जोन और 119 अतिविशिष्ट व्यक्तियों ने नये मंडल की मांग की थी. रेलवे बोर्ड के एक पूर्व सदस्य ने बताया, ‘रेलवे जोन का निर्माण करना राजनीतिक बाध्यता है. अतीत में रेलवे बोर्ड की तरफ से गठित की गयी कमेटियों ने अपनी रिपोर्ट में न केवल यह कहा था कि अधिक रेलवे जोनों की स्थापना आर्थिक तथा परिचालन के तौर पर व्यवहार्य नहीं है लेकिन उन्होंने बोर्ड से मौजूदा जोन की संख्या कम करने का भी आग्रह किया था. फिर भी, मांग जारी है.’’

Category: Indian Railways, News

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