Loco Pilots refuse to drive trains

| July 2, 2018

जो मालगाड़ी कभी रूक-रूक कर चलती थीं, वही अब सुपर फास्ट की गति से दौड़ने लगी हैं जबकि, सुपर फास्ट ट्रेनें कछुआ गति से दौड़ रही हैं यानी मालगाड़ियों ने यात्री ट्रेनों की रफ्तार रोक दी है। इसकी वजह रेल प्रशासन भले ही लाइन की मरम्मत होना बताता है जबकि, वास्तविकता यह है कि ट्रेनें कारोबारियों के इशारे पर चल रही हैं। आलम यह है कि कारोबारियों का माल लेकर मालगाड़ी लखनऊ से मुरादाबाद साढ़े चार घंटे में पहुंच जाती है जबकि, सुपर फास्ट ट्रेनें आठ घंटे में पहुंच रही हैं। ट्रेनें लेट होने से जहां एक ओर यात्री परेशान हो रहे हैं, वहीं भीषण गर्मी के चलते एकाध की जान भी चली गई है।








वैसे तो इसके कई उदाहरण मिल जाएंगे, लेकिन ताजा वाकया बीते मंगलवार का है। पंजाब की ओर जाने वाली दो मालगाड़ी में बड़ी कंपनी का स्टील लदा था। मालगाड़ी को चलाने के लिए राप्ती गंगा एक्सप्रेस को कटघर स्टेशन पर रोक दिया गया जबकि, उसमें गंभीर रूप से बीमार यात्री के इलाज के लिए चिकित्सक मुरादाबाद स्टेशन पर ट्रेन आने का इंतजार कर रहे थे। इसके बाद भी ट्रेन को एक घंटे तक रोके रखा गया और दो मालगाड़ी व एक पैसेंजर को पास कर दिया गया। इसके चलते बीमार बुजुर्ग महिला को इलाज नहीं मिला और उसकी मौत हो गई जबकि, यही राप्ती गंगा एक्सप्रेस सोमवार को मुजफ्फरपुर से निर्धारित समय दोपहर दो बजे चली। गोरखपुर रात 8.55 बजे के स्थान पर 9.45 बजे पहुंचकर चल दी। इस ट्रेन को रात तीन बजे लखनऊ पहुंच जाना चाहिए था लेकिन, मंगलवार सुबह आठ बजे पहुंची यानी ट्रेन को लखनऊ पहुंचने में निर्धारित पांच घंटे के बजाय 10 घंटे लगे। इसका कारण ट्रेन को बीच-बीच में रोक कर 10 मालगाड़ी को निकालना रहा।

>> लखनऊ से ट्रेनें आठ तो मालगाड़ी साढ़े चार घंटे में पहुंच रहीं मुरादाबाद
>> ट्रेन को बीच रास्ते में रोक कर रखने के चलते लोगों की जान भी जा रही

मालगाड़ी को गंतव्य स्थान पर पहुंचने के लिए रेलवे एक्सप्रेस और मेल ट्रेन को बीच में रोकने के अलावा चालकों से बिना आराम कराए ही मालगाड़ी चलवाए जा रहा है। रविवार को चालक ने पिलखुआ स्टेशन पर मालगाड़ी रोक दी और चलाने से इन्कार कर दिया। आराम न मिलने से दिक्कत रविवार शाम पाच साढ़े बजे मुरादाबाद की ओर आने वाली डाउन बीसीएन मालगाड़ी को चालक ने पिलखुआ स्टेशन पर रोक दिया। कहा कि वह लगातार 10 घटे से अधिक मालगाड़ी चला रहा है।




अब वह गाड़ी नहीं चलाएगा। कंट्रोल रूम सूचना पहुंचते ही खलबली मच गई। रेलवे अधिकारी व लोको इंस्पेक्टर ने चालक को मनाने का प्रयास शुरू कर दिया। रेलवे व्यापारियों का माल समय से पहुंचने के लिए चालकों का उत्पीडऩ कर रहा है। थकवाट के कारण ट्रेन नहीं चलाई जा रही है। अगर कोई दुर्घटना हो जाती है तो रेल प्रशासन तत्काल चालक की सेवा समाप्त करने की कार्रवाई कर देता है। अधिकारियों ने चालक से हापुड़ तक मालगाड़ी चलाने का अनुरोध किया। आधे घटे बाद चालक ने मालगाड़ी को चलाया।

मेल एक्सप्रेस ट्रेनों के चालकों से आठ घटे तक चलवाई जा रही ट्रेन उत्तर रेलवे मजदूर यूनियन (उरमू) के मंडल मंत्री मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि रेल प्रशासन पूरी तरह से व्यापारियों व कारपोरेशन घराने के हाथों में खेल रहा है। मालगाड़ी को चलाने के लिए मेल एक्सप्रेस ट्रेनों को बीच में घटों रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि बेगमपुरा एक्सप्रेस प्रत्येक दिन निर्धारित समय पर शाहजहापुर तक पहुंचती है। उसके बाद मालगाड़ी को निकालने के लिए बेगमपुरा जैसी नान स्टाप ट्रेन को रोक दिया जाता है। जिससे यह ट्रेन मुरादाबाद तीन घटे देरी से पहुंच रही है। इस संबंध में कई बार मंडल रेल प्रशासन को पत्र भेजा जा चुका है। मेल एक्सप्रेस चालकों से छह घटे ड्यूटी कराने का नियम है, लेकिन आठ या उससे ज्यादा ड्यूटी कराई जा रही है।




तीन जुलाई को उत्तर रेलवे महाप्रबंधक के साथ पीएनएम की बैठक हो रही है, उसमें मामला उठाया जाएगा। बिना चालकों की संख्या बढ़ाए ही चलाई जा रही मालगाड़ी नार्दर्न रेलवे मेंस यूनियन (नरमू) के मंडल मंत्री राजेश चौबे ने बताया कि रेलवे प्रशासन ने कारपोरेट घराने से मालगाड़ी को समय से चलाने का करार कर लिया है और चालकों से 12 घटे तक मालगाड़ी चलवाई जा रही है। प्रत्येक दिन 80 से 90 मालगाड़ी चलाई जा रही हैं। जबकि 40 मालगाड़ी चलाने लायक चालक हैं। रेलवे प्रशासन चालकों को छुंट्टी देने बंद कर दिया है। चालकों से 12 घटे तक ट्रेनें चलवाई जा रहा है। इसको लेकर चालकों में काफी आक्त्रोश है। पिछले दिनों इस मामले को लेकर नरमू के सदस्यों ने डिप्टी सीओएम के समाने प्रदर्शन भी किया था।

Category: Indian Railways, News

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