रिटायर होते ही ट्रेन चालकों को मिलेगा तीन लाख

| June 30, 2018

सेवानिवृत्त होने के साथ ही ट्रेन चालकों को तीन लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। यह पुरस्कार अपने कार्यकाल में दुर्घटनारहित ट्रेन संचालन के लिए होगा। रेलवे बोर्ड इसके नियमों को आसान करते हुए यह व्यवस्था की है। इस व्यवस्था के बाद देश के 90 फीसद ट्रेन चालक इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। रेलवे में दुर्घटनारहित ट्रेन चलाने वाले चालकों के रिटायर होने पर पुरस्कार देने की व्यवस्था काफी पुरानी है, लेकिन इसके नियम इतने कठिन हैं कि चालकों को कई साल तक कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इसके बाद भी पुरस्कार मिलने की संभावना कम ही होती है। इसकी वजह से अधिकांश चालक उम्मीद ही छोड़ देते हैं। इस मामले को रेलवे बोर्ड के स्थायी वार्ता तंत्र (पीएनएम) की बैठक में नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेल मेन (एनएफआइआर) ने अप्रैल में उठाया था।








तर्क था कि चालक के सेवानिवृत्त होने के समय दी जाने वाले सर्विस बुक में दुर्घटनारहित ट्रेन चलाने का प्रमाण पत्र भी शामिल होता है। ऐसे में पुरस्कार के लिए आवेदन की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए। सेवानिवृत्त चालकों को पुरस्कार मिलने में पांच साल का समय लग जाता है। बैठक में नियम को सरल करने पर जोर दिया गया था। रेलवे बोर्ड के डायरेक्टर सेफ्टी (थर्ड) पी श्रीनिवास ने 10 जून को इस संबंध में पत्र जारी किया। इसमें बताया है कि एनएफआइआर की मांग पर रेलवे बोर्ड ने दुर्घटना रहित पुरस्कार के लिए नियम को सरल कर दिया है।




सेवानिवृत्त होने के समय दुर्घटना रहित पुरस्कार राशि भी दी जाएगी। सेवानिवृत्त होने वाले अधिकांश चालकों का वेतन एक लाख रुपये के आसपास हो जाता है। तीन माह के वेतन के बराबर दुर्घटना रहित पुरस्कार राशि देने का प्रावधान है। इसलिए चालकों को तीन लाख रुपये के आसपास पुरस्कार राशि मिल जाएगी। मंडल रेल प्रबंधक अजय कुमार सिंघल ने बताया कि बोर्ड के नए आदेश के अनुसार अब दुर्घटना रहित पुरस्कार दिए जाएंगे।

रेलवे अस्पताल में तैनात नर्सिग स्टाफ को अब नर्स या स्टाफ नर्स नहीं कह पाएंगे, अब इन्हें नर्सिग अधीक्षक कहना पड़ेगा। इसके अलावा रेलवे कर्मियों को वर्दी भत्ता के अलावा सुरक्षा के लिए जूता और हेलमेट भी मुहैया कराएगा। रेल प्रशासन ने रेल लाइनों में सुधार के साथ रेल कर्मियों की सुविधाओं में भी धीरे-धीरे वृद्धि करनी शुरू कर दी है। इसके अलावा कर्मियों के पद नाम बदलकर उन्हें सम्मान देना भी शुरू कर दिया है। पिछले साल जुलाई से पहले रेलवे चतुर्थ श्रेणी व तृतीय श्रेणी कर्मियों को वर्दी के नाम पर कपड़ा देता था। सफाई के लिए प्रत्येक माह 50 रुपये का भत्ता दिया जाता था। संरक्षा कार्य करने वाले कर्मचारियों को जूते व हेलमेट दिए जाते थे। ये काफी घटिया होते थे। ट्रेड यूनियन के नेता इसका विरोध करते थे। अगस्त 2017 से रेलवे बोर्ड ने वर्दी के कपड़े, जूते व हेलमेट के बजाय प्रत्येक साल पांच हजार रुपये देना शुरू कर दिया। बाद में यह राशि बढ़ाने की मांग होने लगी।




इसी के साथ अंग्रेजों के जमाने के पद नाम को हटाकर सम्मानजनक पदनाम देने की भी मांग उठने लगी। रेलवे बोर्ड ने कर्मियों की मांगों को देखते हुए पदनाम बदलने व सुविधा बढ़ाने के संबंध में आदेश जारी किया है। रेलवे बोर्ड के ज्वाइंट डायरेक्टर (पीसी) एमके पंडा ने 13 जून को पत्र जारी किया है। इसमें रेलवे अस्पताल में तैनात नर्सिग स्टाफ का पदनाम बदलने के आदेश दिए गए हैं। अब नर्सिग स्टाफ को नर्सिग अधीक्षक, वरिष्ठ नर्सिग अधीक्षक व मुख्य नर्सिग अधीक्षक के पदनाम से जाना जाएगा। इसके अलावा रेल कर्मियों को वर्दी भत्ता प्रत्येक साल पांच हजार रुपये मिलेगा। जूता व हेलमेट भी मिलेगा। रात में ड्यूटी करने वाले कर्मियों को रात्रि भत्ता भी दिया जाएगा। मंडल रेल प्रबंधक अजय कुमार सिंघल ने बताया कि रेलवे प्रबंधन ने नर्सिग स्टाफ का पदनाम बदल दिया है।’>>रेलवे बोर्ड के कर्मचारियों की सुविधाएं बढ़ाई गईं 1’>>वर्दी भत्ता के अलावा अब जूता व हेलमेट भी मिलेगा

Category: Indian Railways, News

About the Author ()

Comments are closed.