Lesser Workforce costing too much for Railways

| June 28, 2018

ट्रेनों की लेटलतीफी को सुधारने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। इसके तहत बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ ही सिग्नल व्यवस्था का आधुनिकीकरण किया जा रहा है, लेकिन कर्मचारियों की कमी रेल प्रशासन की इस कवायद पर पानी फेर सकती है। उत्तर रेलवे में सिग्नल एंड टेलीकम्युनिकेशन (एसएंडटी) जैसे महत्वपूर्ण विभाग में भी एक चौथाई से ज्यादा पद खाली हैं, जबकि रेल परिचालन में इन कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।








यह सही है कि मौजूदा रेल नेटवर्क पर अत्यधिक दबाव है। नई लाइन बिछने, रेल लाइन का विद्युतीकरण होने, सिग्नल प्रणाली को अपग्रेड करने से ट्रेनों की रफ्तार भी बढ़ेगी, लेकिन कर्मचारियों की कमी भी दूर करनी होगी। इस समय सिग्नल मेंटेनर कैडर के कर्मचारियों की भारी कमी है। दिल्ली मंडल में इनके 626 पद स्वीकृत हैं, जबकि करीब 400 कर्मचारी ही काम कर रहे हैं। लगभग 35 फीसद पद रिक्त हैं। मुरादाबाद को छोड़कर अन्य रेल मंडलों की स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं है। लगभग सभी मंडलों में सिग्नल मेंटेनर की भारी कमी है। इसे लेकर रेलवे अधिकारी भी चिंतित हैं। कुछ दिनों पहले चीफ सिग्नल इंजीनियर ने सभी मंडलों को पत्र लिखकर रिक्त पदों को शीघ्र भरने को कहा है। साथ ही आवश्यकतानुसार नए पद सृजित करने और कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने का भी निर्देश दिया गया है।




अधिकारियों का कहना है कि सिग्नल प्रणाली को अपग्रेड किया जा रहा है, रेलवे स्टेशनों और रेल लाइन पर नए-नए उपकरण लगाए जा रहे हैं। इससे कर्मचारियों का काम भी बढ़ा है, लेकिन इस अनुपात में कर्मचारियों की तैनाती नहीं की गई है। इससे मौजूदा कर्मचारियों पर काम का दबाव बढ़ रहा है। इसका असर उनके काम पर भी दिख रहा है।




कर्मचारियों की कमी से सिग्नल प्रणाली के रखरखाव में दिक्कत होती है। ठीक से रखरखाव नहीं होने से सिग्नल फेल होने का खतरा रहता है। बरसात के मौसम में ट्रैक पर पानी भरने से यह परेशानी और बढ़ जाती है, इसलिए इस मौसम में ट्रैक व सिग्नल पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। ऐसे में यदि कर्मचारियों की कमी दूर नहीं की गई है तो आगामी दिनों में परेशानी और बढ़ेगी। इधर, अधिकारियों का कहना है कि खाली पड़े पदों को भरने की प्रक्रिया चल रही है। साथ ही कर्मचारियों को ट्रेनिंग भी दी जा रही है, जिससे कि उन्हें आधुनिक तकनीक की जानकारी मिल सके।

Category: Indian Railways, News

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