कर्मियों की पेंशन स्कीम में बदलाव की तैयारी

| June 26, 2018

कर्मियों की पेंशन स्कीम में बदलाव की तैयारी में है। लंबे समय तक पेंशन चालू रखने के लिए ऐसा बदलाव करना जरूरी हो गया है। मंत्रालय इसको लेकर गंभीर है। एक्चुअरी केए पंडित की रिपोर्ट मिलने के बाद सीएमपीएफ रिपोर्ट में कोलकर्मियों की पेंशन दस माह के वेतन औसत से बढ़ाकर तीस माह करने का सुझाव दिया था। सब कमेटी ने तीस माह के वेतन से गणना करने का प्रस्ताव दिया है। तीस माह के प्रस्ताव को श्रम संगठन के प्रतिनिधियों ने भी अपनी मंजूरी दे दी है। सिर्फ एचएमएस ने अपनी सहमति नहीं दी है।

क्या है मामला : पेंशन स्कीम अप्रैल 1998 में लागू की गई थी। कोल माइंस भविष्य निधि संगठन में कुल सदस्यों की संख्या 9 लाख 39 हजार है। रिटायर हो गए 4.73 लाख सदस्यों को पेंशन मिलती है। अन्य 4.68 लाख कोलकर्मी भी कोल माइंस भविष्य निधि संगठन के सदस्य हैं।








स्टडी रिपोर्ट में भी बदलाव के संकेत : सीएमपीएफ के प्रभारी आयुक्त अनिमेष भारती ने चार सदस्यीय स्टडी कमेटी का गठन किया है। स्टडी कमेटी में आयुक्त स्तर के अधिकारी एके सिन्हा, एके सिंह, एसके सिन्हा, नवीन कुमार हैं। मामले का अध्ययन कर सभी ने अपनी रिपोर्ट प्रभारी आयुक्त सौंप दी है। इसमें भी स्कीम में बदलाव, फंड बढ़ोतरी को लेकर अपना मंतव्य दिया है।

अंशदान बढ़ाने पर एक हजार करोड़ की राशि होगी जमा

दसवें वेतन समझौते के तहत कोल इंडिया का सात व कोलकर्मियों का अतिरिक्त 2.1 फीसद मिलाकर कुल 9.1 फीसद अंशदान पेंशन फंड में बढ़ेगा। कोलकर्मियों के पेंशन फंड में अब 14 फीसद अंशदान जमा होगा। पहले 4.9 फीसद अंशदान ही कोल कर्मियों को जमा करना होता था। नए वेतन समझौते के तहत कोल इंडिया व कोलकर्मियों को प्रतिमाह सात-सात फीसद का अंशदान देना होगा। मौजूदा समय में स्थिति यह है कि कोल कर्मियों को 73 रुपये से लेकर 45 हजार तक पेंशन मिलती है।

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हर माह बढ़ रही पेंशन भुगतान की राशि : हर माह पेंशन मद में 191.14 करोड़ का भुगतान हो रहा है। पेंशन फंड में अभी करीब 13383 करोड़ जमा हैं। इसमें आठ हजार करोड़ सरकारी संस्थान में इंवेस्ट किया गया। तीस वर्ष तक पेंशन चलाने के लिए 58 हजार करोड़ की जरूरत है। यही हाल रहा तो 2020-21 में पेंशन फंड घटकर करीब 2479 करोड़ रुपये ही रह जाएगा। जून में पेंशन भुगतान की स्थिति यह हो गई थी कि कोल इंडिया से सौ करोड़ रुपये की मदद लेनी पड़ी थी।

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इनसेट-

कोल इंडिया की इकाई :

बीसीसीएल, ईसीएल, सीसीएल, एमसीएल, एसईसीएल, डब्लूसीएल, एनईसी, सीएमपीडीआइएल। कोल इंडिया की ये कंपनियां झारखंड, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश आदि प्रदेशों में हैं।




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कोट-

कोल मंत्रालय ने 60 माह का औसत गणना का प्रस्ताव दिया है, लेकिन यूनियन तीस माह पर राजी है। सब कमेटी ने भी इस पर अपनी सहमति दे है। स्कीम में बदलाव जरूरी है। बोर्ड ऑफ ट्रस्टी की बैठक में इस प्रस्ताव को पास कर मंत्रालय भेजा जाएगा। लंबे समय तक पेंशन चालू रखने के लिए ठोस निर्णय लेना जरूरी है।




– डीडी रामानंदन, जेबीसीसीआइ व सब कमेटी सदस्य

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इनसेट

कोल इंडिया ने जारी किया आदेश : कोल इंडिया के महाप्रबंधक पीवीकेआरएम राव ने सभी कोल कंपनियों को पत्र जारी एक अक्टूबर 2017 से पेंशन स्कीम में कोलकर्मियों के वेतन से 2.1 फीसद राशि पेंशन फंड काटकर जमा करने का आदेश दिया है। इस मद में कोल इंडिया व कोलकर्मियों को मिलाकर 14 फीसद अंशदान जमा होगा। पहले 4.9 फीसद अंशदान जमा होता था। नए वेतन समझौते के तहत कोल इंडिया व कोल कर्मियों को हर माह सात-सात फीसद का अंशदान देना होगा। पत्र सभी कोल कंपनियों को भेज दिया गया है।

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