2019 में मोदी सरकार को बचाएंगे ये 3 कानून, कर्मचारियों को खुश करने की तैयारी

| June 24, 2018

आगामी लोकसभा चुनाव और इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए सरकार देश के कर्मचारियों और मजदूरों को खुश करने की तैयारी में है। सरकार नहीं चाहती कि ईज ऑफ डूईंग बिजनेस (कारोबार में आसानी) के चक्कर में मजदूर विरोधी छवि बने।

ऐसे में सरकार प्राइवेट नौकरी करने वालों से लेकर दिहाड़ी मजदूरों और रेहड़ी-पटरी वालों को कई तरह की राहत दे सकती है। सरकार कर्मचारियों को फायदा पहुंचाने के लिए 3 महत्वपूर्ण कानून जल्द पारित करने की तैयारी में है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण विधेयक है, ‘ऑक्युपेशनल सेफ्टी, हेल्थ ऐंड वर्किंग कंडीशंस (व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और काम करने की स्थिति) कोड।’ इस ड्राफ्ट कोड में प्रावधान किया गया है कि कम से कम 10 कर्मचारियों वाली कंपनी, फैक्टरी या संस्थाओं को अपने हर एंप्लॉई को अपॉइंटमेंट लेटर यानी नियुक्ति पत्र देना होगा। वे बिना अपॉइंटमेंट लेटर के कर्मचारियों से काम नहीं ले सकते हैं।








अपॉइंटमेंट लेटर देने का मतलब है कि उन्हें कर्मचारियों को मिनिमम वेज देना होगा और कंपनी लॉ के मुताबिक कर्मचारियों को सभी तरह की सुविधाएं देनी होंगी। इसके आलावा इस ड्राफ्ट कोड में कार्यस्थल पर कर्मचारियों को पूरी सुरक्षा देने का प्रावधान किया गया है।

कंपनी को इस बात का ध्यान रखना होगा कि वर्किंग प्लेस में ऐसी कोई चीज न हो, जिससे कर्मचारियों को बीमार या घायल होने का रिस्क हो। ऐसा होने पर कंपनी के खिलाफ ऐक्शन लिया जाएगा और उन्हें कर्मचारियों को मुआवजा देना होगा।
असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को नियुक्ति पत्र देने का होगा प्रावधान
कर्मचारियों और मजदूरों को खुश करने की तैयारी

कर्मचारी ‌भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के खाताधारकों के लिए अच्छी खबर है। पीएफ पेंशनर्स को मिलने वाली मिनिमम पेंशन 1000 रुपये से बढ़कर 2000 रुपये की जा सकती है। ईपीएफओ और लेबर मिनिस्ट्री ने यह प्रस्ताव तैयार कर दिया है। इस प्रस्ताव पर 26 जून को होने वाली सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टी (सीबीटी) की मीटिंग में मुहर लग सकती है। लेबर मिनिस्ट्री के सूत्रों के अनुसार इस बारे में मिनिस्ट्री और ईपीएफओ में सहमति बन गई है। मिनिमम पेंशन 2000 रुपये करने से सरकार पर 3000 करोड़ रुपये का सालाना बोझ पड़ेगा। ईपीएफओ के पास इतना सरप्लस मनी है कि इस बोझ को आसानी से उठाया जा सकता है। फिलहाल ईपीएफओ के मेंबर्स को न्यूनतम 1000 रुपये और अधिकतम 7500 रुपये तक पेंशन मिलता है।




दूसरा है- ‘कोड ऑन वेजेज।’ यह बिल केंद्र को सभी सेक्टर के लिए न्यूनतम मजदूरी तय करने का अधिकार देता है। इसका पालन राज्यों को भी करना होगा। इसके तहत 4 कानून- ‘मिनिमम वेजेज ऐक्ट 1948’, ‘पेमेंट ऑफ वेजेज ऐक्ट 1936’,alt147पेमेंट ऑफ बोनस ऐक्ट 1965’ और ‘इक्वल रिमुनेरेशन ऐक्ट 1976’ को मिलाकर वेजेज यानी वेतन की परिभाषा तय की जाएगी। तीसरा है- सोशल सिक्योरिटी कोड। इसके तहत सरकार ने रिटायरमेंट, हेल्थ, ओल्ड एज, डिसेबिलिटी, अनएंप्लॉयमेंट और मैटरनिटी बेनेफिट्स देने के लिए एक बड़ी व्यवस्था का प्रस्ताव किया है।
‘चुनाव से पहले रिस्क नहीं’




श्रम मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, इन तीन बिलों का ड्राफ्ट तैयार हो गया है। सरकार इन विधेयकों को आम चुनावों से पहले लागू करना चाहती है, ताकि चुनावी मैदान में कर्मचारियों और मजदूरों से कहा जा सके कि सरकार ने उनकी सेहत और भविष्य के लिए कितना कारगर कदम उठाया है। सूत्रों का यह भी कहना है कि चुनाव से ठीक पहले सरकार ऐसा कोई रिफॉर्म नहीं करना चाहती, जिससे उसकी छवि मजदूर विरोधी बने। इस लिहाज से कहा जा सकता है कि इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड फिलहाल ठंडे बस्ते में जाता हुआ दिखाई दे रहा है। जिन कानूनों पर सरकार के कदम ठिठक रहे हैं, उनमें सबसे प्रमुख है – इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड। इसके कुछ हिस्से कामगारों को नौकरी से हटाना आसान बनाते हैं।

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