प्रमोशन में आरक्षण के खिलाफ ओबीसी कर्मचारी लामबंद

| June 18, 2018

प्रमोशन में रिजर्वेशन के खिलाफ अब जनरल और ओबीसी वर्ग के कर्मचारी लामबंद होने लगे हैं। दिल्ली इक्वालिटी फोरम ने रविवार को इस मामले में समता स्थल पर प्रदर्शन किया। जिसमे दिल्ली के सभी ओबीसी सरकारी कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। इसमे यह तय किया गया कि रिजर्वेशन के पक्ष मे हाल ही में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में 19 जुलाई को दिल्ली में कैंडल मार्च निकाला जाएगा। वहीं सितंबर में देश भर के कर्मचारी रामलीला मैदान में एकत्रित होंगे।








फोरम के अध्यक्ष विजेंदर सिंह के अनुसार प्रमोशन में रिजर्वेशन के मामले मे जो अदालत ने पहले नागराज मामले में जो फैसला दिया था, उसके अनुसार एडुकेसी, एफिसिएंसी और बैकर्वडनेस की जांच की जाएगी, लेकिन हाल में आए फैसले से इसका उल्लंघन होता है। इसके लिए उन्होंने रविवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री राजनाथ सिंह को ज्ञापन दिया। जिसके अनुसार अगर नियमों मे मौजूदा तरीके से बदलाव हुआ तो इसके विरोध में19 जुलाई को संसद भवन तक कैंडल मार्च किया जाएगा। सितंबर मे देश भर के सरकारी कर्मचारी रामलीला मैदान में लामबंद होंगे।




प्रमोशन में आरक्षण देने के केंद्र सरकार के शुक्रवार के फैसले पर सामान्य और पिछड़े वर्ग के कर्मचारियों में नाराजगी व्याप्त है। प्रमोशन में आरक्षण के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय तक लड़ाई लड़ चुकी सर्वजन हिताय संरक्षण समिति के नेताओं ने शुक्रवार रात बयान जारी कर सरकार से आदेश वापस लेने का मांग की है। समिति ने कहा कि केंद्र सरकार बाज न आई तो उसे इसका नतीजा भुगतना पड़ेगा।

उधर, प्रमोशन में आरक्षण की बहाली की मांग को लेकर आंदोलनरत आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति भी केंद्र सरकार के इस फैसले से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। समिति ने बयान जारी कर कहा कि उत्तर प्रदेश में आरक्षण अधिनियम 1994 की धारा 3 (7)15 नवंबर 1997 को बहाल किए बिना इसका लाभ यहां के अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के कर्मचारियों को नहीं मिलेगा।




आदेश तत्काल वापस नहीं लिया तो आंदोलन
पदोन्नति में आरक्षण देने के केंद्र सरकार के आदेश की भर्त्सना करते हुए सर्वजन हिताय संरक्षण समिति के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे ने कहा कि आदेश तत्काल वापस न लिया गया तो उत्तर प्रदेश के कर्मचारी, अधिकारी और शिक्षक अन्य प्रदेशों के साथ मोर्चा बनाकर आंदोलन करेंगे। केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की जानबूझकर गलत व्याख्या कर रही है।

सर्वोच्च न्यायालय ने अपने पहले के फैसले में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों को पदोन्नति देने पर रोक नहीं लगाई है बल्कि उसके लिए कुछ शर्तें तय की हैं। दुबे ने कहा कि शनिवार को समिति की आपात बैठक बुलाई गई है जिसमें आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।

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